भाभी को पेशाब करते देखा फिर चोदा

भाभी ने अपना हाथ बढ़ा कर मेरा लंड पकड़ लिया, तभी मैंने झुक कर उनके होंठों को चूमा, फिर चूसने लगा. वो इसमें मेरा पूरा साथ दे रही थी.

फिर मैं उठा और उनके बेटे को उठा कर दूसरी ओर लिटा दिया और इस ओर से उनके ऊपर लेट कर फिर उनके होंठ चूसना चालू कर दिया और एक हाथ से उनकी चुची मसलने लगा।

अब हम पूरे जोश में थे, मैं अपना लंड भाभी की चुत के ऊपर ही रगड़ रहा था.
काफी देर तक ऐसा ही चलता रहा, फिर मेरा माल निकल गया और मैं भाभी के ऊपर निढाल होकर पड़ा रहा।

जब मैं उठा तो देखा कि माल निकलने के कारण मेरी पैंट भी गीली हो चुकी थी.
भाभी यह देख कर हंसने लगी.
मैं बोला- अब ऐसे में मैं घर कैसे जाऊँगा, कोई देखेगा तो पूछेगा कि वहाँ क्या चल रहा था.

तो भाभी बोली- कुछ नहीं होगा, इसे अच्छे से पौंछ लो, थोड़ी देर में सूख जायेगा.
मैं कुछ नहीं बोला तो वो एक पेटीकोट देते हुए बोली- इसी से पौंछ लो… या ये भी मुझसे ही करवाओगे?
मैं बोला- आप ही पौंछ दो न!

तब मैं बिछावन से नीचे उतरा और मेरी पैंट नीचे सरका दी और भाभी मुझे मजाक में ताने मारते हुए पौंछने लगी.

इस बीच मेरे लंड फिर खड़ा हो गया तो भाभी बोली- क्यों? ये नहीं मानेगा क्या?
और हाथ से मेरी मुठ मारने लगी, थोड़ी देर बाद वो मेरा लंड मुह में लेकर चूसने लगी।

इस बार मुझे काफी मजा आया, मैं पूरी तरह से मदहोश हो चुका था और अंत में मैं भाभी के मुँह में ही झड़ गया.
फिर मैं कहाँ मानने वाला था, कहा- भाभी, अब तेरी चुत में करना है.
तो वो नहीं मानी.

मैंने काफी अनुरोध किया पर बात नहीं बन पाई, फिर मैं अपना घर आ गया।

फिर एक दिन शाम को वो मेरे घर आई, मैं उस वक्त छत पर था, वो भी कुछ देर नीचे रुकने के बाद छत पर आ गई. फिर हम लोगों के बीच मजाक होने लगा.
थोड़ा थोड़ा अंधेरा हो चुका था जिनका मैंने फायदा उठाया, पहले तो मैंने उन्हें छूना शुरू किया, फिर एक हाथ उनके कमर के पास से साड़ी के अन्दर घुसा दिया.

मेरा हाथ भाभी की चुत तक पहुंच चुका था, मैंने पाया कि भाभी ने अपनी चुत के बाल बनाये हुए थे, भाभी की चुत बिल्कुल चिकनी थी.
फिर मैंने एक उंगली भाभी की चुत में अन्दर घुसा दी, पर भाभी ने जोर से मुझे धक्का दिया, जिससे हमारे बीच कुछ फासला हो गया और मेरा हाथ भी बाहर निकल गया.

फिर वो बोली- ऐसा क्या छत पे करते हैं क्या? कोई देख ले तो पता भी है क्या होगा?
थोड़ी ही देर बाद वो नीचे चली गयी।

फिर क्या था… यह बात तो साफ हो चुकी थी कि अगर व्यवस्था सही से हो जाये तो फिर इसे आसानी से चोदा जा सकता है पर अब एक ही समस्या थी कि ऐसी व्यवस्था किया कैसे जाए।

इस रोज से मैं पूरा पागल हो चुका था, मुझे किसी भी तरह अब उन्हें चोदना ही था। इस उलझन में मैंने न जाने कितने बार मुठ मारीं.

आखिर चार दिन बाद जाकर मुझे एक मौका मिला, मेरे घर के लोग सामान की खरीदारी करने बाज़ार जा रहे थे, जो मेरे घर करीब पांच किलोमीटर दूर है, उस मैं घर पर अकेला रहने वाला था, मेरा पूरा ध्यान अब योजना बनाने पर था कि अब कैसे क्या करना है।

सुबह करीब ग्यारह बजे सब लोग बाजार की ओर निकल गये, मेरी तैयारी भी पूरी हो चुकी थी.

करीब बीस मिनट बाद मैं अपने घर की छत पे गया तो देखा कि भाभी के यहाँ पास की कुछ महिलाएँ बैठीं थी और बात चीत चल रही थी।
फिर मेरे दिमाग में एक आईडिया आया, मैं उनके घर गया और कहा कि मेरी दीदी आपको बुला रही और जल्दी आने को कहा है!

इतना कह कर मैं एकदम सभ्य लड़के की तरह अपने घर आ गया.

थोड़ी देर बाद भाभी भी आ गई, और पूछने लगी- दीदी कहाँ है?
तो मैंने कहा- अन्दर कुछ काम कर रही हैं!

भाभी अन्दर आ गई, फिर मैं भी उनके पीछे ही आया और दरवाजे का पर्दा गिरा के दरवाज़ा अन्दर से बन्द कर दिया.

मुझे अन्दर देख कर भाभी पूछने लगी कि घर में तो कोई भी नहीं है?
तो मैंने कहा- इसीलिए तो आपको बुलाया है भाभी!

फिर मैं उनसे लिपट कर चुम्मा चाटी करते हुए उनको बिछावन तक ले आया। फिर उनके होंठ और चुची को खूब चूसा, भाभी ने अपने हाथ से मेरा लंड पकड़ रखा था.
फिर धीरे धीरे कर हम दोनों ने एक दूसरे के कपड़े उतार दिए, उसके बाद भाभी ने लंड मुँह में ले लिया और मैं उनकी चूत पे हाथ फेरने लगा.

ऐसा करते हम दोनों 69 के पोजीशन में आ गये। हम दोनों एक दूसरे के मुख में झड़ चुके थे, फिर मैं उठ सीधा हुआ और अपना लंड भाभी की चूत रख दिया. तीन चार बार वहीं रगड़ा, फिर अन्दर पेल दिया. भाभी की चुत गीली और फैली हुई थी जिससे मेरा लंड एक बार में अन्दर चला गया.

काफी देर तक अन्दर बाहर करने के बाद मैं उनकी चुत में ही झड़ गया।

उसके बाद हम दोनों एक दूसरे को काफी जोर से लिपट के करीब दस मिनट तक पड़े रहे।

उस दिन मैंने फिर दो बार भाभी से सेक्स किया, फिर चुत चुदाई करवा कर भाभी वो अपने घर चली गयी।