अन्तर्वासना वश मैं गैर मर्दों से चुदी

वो कुछ देर सुस्त सा लेटा रहा और मुझे सहलाता रहा.

मैंने अपने मोबाइल में देखा, तो तीन बज रहे थे. मैंने तनिष्क को बोला- अब तुम अपने रूम में चले जाओ.
उसने मुझे एक किस किया … मेरे मम्मों को भी मसला और चला गया.

उसने जाते समय दरवाजा उड़का दिया और मैं बिना लॉक किए नंगी ही बिस्तर सो गयी.

मैं एक घंटे ही सो पाई होऊंगी कि तभी मुझे लगा कि कोई मेरी चूत चाट रहा है. मुझे मजा आने लगा, तो मैं आँख बंद करके पड़ी रही और चुत चुसाई का मज़ा लेने लगी. मैंने सोचा कि संजय अंकल या तनिष्क ही वापस आ गए होंगे.

लेकिन कुछ देर बाद जब मैंने आँख खोल कर देखा, तो मैं चौक गयी. मैंने देखा कि ये तो सपना की वो ही चाचा हैं, जो मुझे ताड़ रहे थे. मुझे अब भी गोली का असर था. मैंने मन ही मन सोचा कि मजा आ गया; एक और नया लंड मिलने जा रहा है. मेरी अन्तर्वासना को शांत करने के लिए एक और लंड आ गया था.

लेकिन दिखावे के लिए मैं तुरंत उठी और बोली- आप ये क्या कर रहे हैं … आपका दिमाग़ खराब है क्या!

मैं अभी कुछ और बोलती, तब तक उन्होंने मुझे कसके पकड़ लिया और बेड पर चित लिटा दिया. मैं कुछ चिल्लाती या कुछ बोलती, तब तक उन चाचा जी ने मेरे मुँह में मेरी पैंटी को डाल दिया. मैं कसमसा कर रह गई.

उन्होंने अपने पैरों से मेरे दोनों पैरों को दबा लिया और अपने दोनों हाथों से मेरे हाथों को पकड़ लिया. वे मुझे चाटने और चूमने लगे … मेरे बूब्स को भी चाटने और काटने लगे.

मुझे बहुत दर्द हो रहा था. मेरे दोनों चूचे एकदम लाल हो गए थे, लेकिन मैं कुछ नहीं कर पा रही थी.

फिर उन्होंने वहीं पास में रखी ब्रा से मेरे दोनों हाथों को बाँधा. एक पास पड़े कपड़े से मेरे पैरों को बांध दिया.

उनके सामने में एकदम नंगी बेबस पड़ी थी. उन्होंने मेरे पूरे शरीर को खूब चूमा और चाटा. इसके बाद चाचा जी ने अपने सारे कपड़े उतार दिए. उनका लंड छह इंच का था, लेकिन बड़ा मोटा था.

चाचा जी ने मेरे मुँह से मेरी पैंटी निकाली और अपना लंड मेरे मुँह में डाल कर चुसवाने लगे. कुछ देर तक तो मैंने नाटक किया, फिर मैं सही से उनके लंड को चूसने लगी.

उन्होंने मुझे सहयोग करते देखा, तो मुझे औंधा किया और मेरी गांड फैला कर लंड अन्दर पेल दिया. मेरी गांड सूखी थी, पर उन्होंने ये सब कुछ नहीं देखा. मैं दर्द से बिलबिला उठी. चूंकि अभी थोड़ी देर पहले ही तनिष्क के लम्बे लंड से गांड मराने के कारण मेरी गांड खुली हुई थी, इसलिए कुछ ही देर में मेरी गांड में मुझे मजा आने लगा.

चाचा जी पहले तो मेरी खूब जम कर गांड मारी और फिर चूत में लंड पेल दिया. चाचा जी का लंड छोटा जरूर था, लेकिन उनका स्टॅमिना बहुत ज़्यादा था. चाचा जी पूरे आधे घंटे तक मेरी चुदाई की और अपना लंड झाड़ कर उठ गए.

चाचा जी ने कहा- मुझे मालूम है तुमको भी मुझसे चुदने में मज़ा आया है. अब आगे भी तुम्हारी इसी तरह चुदाई करूँगा.
मैंने उन्हें स्माइल दी. अपना सर हिला कर चुत पर हाथ फेरा और उन्हें अपनी रजामंदी देते हुए हामी भर दी.

फिर उन्होंने मुझे खोल दिया और हम दोनों ने एक लंबा क़िस किया. इसके बाद चाचा जी ने अपने पेंट की जेब से एक सिगरेट निकाली और सुलगा आकर मजा लेने लगे. मैंने हाथ बढ़ाया, तो चाचा जी ने मुझे सिगरेट दे दी.

चाचा जी लंड सहलाते हुए कमरे से निकल गए. मैंने सिगरेट फूंकते हुए चुदाई के मीठे दर्द का मजा याद किया.

फिर मैं सो गयी और कुछ टाइम बाद उठ गई. काफी देर हो गई थी. मैंने जल्दी से नहा धोकर तैयार हुई और नीचे आ गई.

मैंने नीचे आकर देखा, तो संजय अंकल भी आ गए थे. उन्होंने मुझे देख कर स्माइल पास की, तो मैं समझ गयी कि अभी अंकल भी मुझे चोदेंगे.

मैंने भी उनको आंख दबा कर स्माइल दे दी.

हम दोनों कमरे में आ गए और बाथरूम में अंकल मुझे कुतिया बना कर चोदने लगे. कुछ देर बाद तनिष्क आ गया उसने भी मुझे हचक कर चोदा.

उस वो पूरे एक हफ्ते तक इन तीनों ने मेरी जम कर चुदाई की. इसी बीच संजय अंकल के एक ड्राइवर ने भी मुझे चोदा और शादी वाले दिन भी इन तीनों ने मुझे रगड़ा.

शादी के दूसरे दिन मैं अपने घर आ गई.

इस तरह मेरी सहेली की शादी में मैंने अपनी अन्तर्वासना के वशीभूत होकर कई अलग अलग लंड से अपनी चुत की चुदाई का मजा लिया.

ये मेरी अन्तर्वासना स्टोरी एकदम सच्ची है. आपको कैसी लगी, प्लीज मुझे मेल करें. धन्यवाद.
आपकी मदभरी माधुरी