ठरकी सेठ, चोदू नौकर और चुदक्कड़ परिवार

इस तरह सेठ कई बार दोपहर के समय में सेठानी की चुदाई करने आते थे.
इस बात को सेठ का दुकान वाला नौकर कल्लू भी नोट कर रहा था.
अब वो सेठ पर नजर रखने लगा था कि दोपहर में सेठ घर क्यों जाते हैं.

एक दिन कल्लू ने पूछा- आप रोज इस टाइम घर क्यों जाते हैं?
सेठ- मैं तो खांड खाने जाता हूं.
कल्लू- खांड तो दुकान में भी है.
सेठ- घर जाकर मैं घी मिलाकर खाता हूं.

फिर अगले दिन सेठ जी दुकान से घर आए तो कल्लू भी उनके पीछे आ गया और देखने लगा कि क्या हो रहा है.
सेठ की बेटी उस वक्त कॉलेज में होती थी और बेटा दुकान पर.
घर में सेठ और सेठानी ही रहते थे दोपहर में.

कल्लू पीछे पीछे आ गया. मगर दरवाजा अंदर से लॉक होने के कारण वो कुछ देख नहीं सकता था.
मगर उसको उन दोनों की आवाजें सुनाई देने लगीं.

फिर जब दरवाजा खुलने की आवाज हुई तो झट से एक तरफ छिप गया.

कुछ देर बाद सेठ घर से दुकान के लिए निकल गये.

अब कल्लू घर में अकेला था और सेठानी कमरे में. चुदाई की आवाजें तो वो पहले ही सुन चुका था.

उसके अंदर भी हवस जागी हुई थी. सेठ के जाने के बाद उसने कमरे में अंदर झांक कर देखा तो सेठानी बेड पर टांगें फैलाये नंगी लेटी हुई थी.
उसका हाथ उसकी चूत को तेजी से रगड़ रहा था.
सेठानी की आंखें बंद थीं. वो एक हाथ से चूची दबा रही थी और दूसरे से अपनी चूत को रगड़ती जा रही थी.

कल्लू इस नजारे का मजा वहीं दरवाजे से ही लेने लगा.

मगर अचानक सेठानी ने उसको देख लिया. सेठानी एक बार तो चौंकी और उसकी इस बदतमीजी पर चिल्लाने की हुई मगर अगले ही पल उसके मन ने पलटी मार ली.

उसकी चूत की आग धधक रही थी और सामने जवान हट्टा कट्टा नौकर उसकी चूत को निहार रहा था. उसने सोचा कि क्यों न चूत की आग को इसके लंड से बुझवा लिया जाये?

कल्लू को सेठानी ने आवाज लगा कर अंदर बुलाया तो वो डरता हुआ चला गया.

सेठानी ने उससे कहा- दरवाजा बंद कर दे और मेरे पास आ जा।

अब कल्लू दरवाजा बंद करके सेठानी की तरफ बढ़ने लगा.

कल्लू के मन में अंदर ही अंदर लड्डू फूट रहे थे. उसको पक्का यकीन था कि सेठानी अपनी चूत चुदवाने के लिए ही बुला रही है.
उसका लंड ये सोचकर खड़ा हो गया था कि उसको इतने मोटे चूचों वाली औरत की चूत चोदने को मिलेगी.

विमला सेठानी बोली- वहां से क्या देख रहा था? तुझे ये चाहिए क्या?
सेठानी ने उसके सामने अपनी चूत को दो उंगलियों से फैलाते हुए कहा.

सेठानी की चूत देखकर कल्लू के मुंह में पानी आ रहा था.
उसका लंड उसके पजामे में हिलौरें मार रहा था.
सेठानी भी उसके लंड को उछलता हुआ देख चुकी थी.

कल्लू ने धीरे से हां में गर्दन हिला दी.
सेठानी बोली- तो फिर वहां क्या खड़ा है? ऊपर आ जा जल्दी.
सुनते ही कल्लू झट से बेड पर चढ़ गया उसने अपनी शर्ट और पजामा उतार फेंके. अगले ही पल उसने अंडरवियर भी उतार दिया.

कल्लू का काला मोटा लंड देखकर विमला सेठानी की बांछें खिल गयीं. उसने कल्लू का हाथ पकड़ कर अपने ऊपर खींचा और उसको अपनी चूचियों पर लेटाकर उसके होंठों को पीने लगी.

सेठानी की चूत की आग देखकर कल्लू भी उस पर टूट पड़ा और उसके जिस्म को नोंच नोंचकर खाने लगा. कभी उसके होंठों को चूसता तो कभी चूचियों को जोर से भींचते हुए चूसने लगता.

फिर एकदम से नीचे पहुंचा और सेठानी की चूत को मुंह देकर खाने लगा. सेठानी ने उसके सिर को अपनी चूत में दबा लिया और गांड को उठाकर अपनी चूत उसके मुंह में धकेलने लगी.

कल्लू का लंड फटने को हो रहा था. मगर वो चूत चूसने का भी पूरा मजा लेना चाहता था.

फिर उसने सेठानी की चूत में दो उंगली फंसा दी और चोदने लगा.
सेठानी पगला गयी और उसके लंड की मुठ मारने लगी.
फिर वो लंड को अपनी चूत पर लगवाकर उसकी गांड को दबाने लगी.

अब कल्लू के भी बर्दाश्त के बाहर थी बात. उसने एक जोर का धक्का मारा और सेठानी की आह्ह … के साथ कल्लू नौकर का लंड उसकी चूत में उतर गया.

नौकर का लंड चूत में जाते ही सेठानी ने उसको बांहों में भर लिया.
काफी मोटा और लम्बा लंड था. सेठानी की चूत भर गयी और कल्लू ने उसकी चूत में धक्के लगाने शुरू कर दिये.

सेठानी कल्लू की पीठ को नोंचते हुए सिसकारियां लेने लगी- आह्ह … चोद दे … जोर से … आह्ह कल्लू … पूरा घुसा दे … चोद साले … आह्ह तेरे मालिक का लंड फिसड्डी है. चोद मुझे आईई … आह्ह … और चोद.

कल्लू लंड अंदर पेल कर जोर जोर से चोदने लगा तो सेठानी को नए लंड से खेलने में मज़ा आने लगा. कल्लू सेठानी की चूची किसी बच्चे की तरह दबा कर चूस रहा था.

सेठानी मज़े करने लगी और पांच मिनट में झड़ गई।

मगर कल्लू कहां रुकने वाला था. वो तो चोदता ही रहा।
सेठानी भी मज़े से चुदवाती रही. कल्लू का पानी झड़ने तक सेठानी दो चार बार झड़ गई।

कल्लू की तो लॉटरी लग गई. सेठानी की चूत को वीर्य से भरकर वो खुश हो गया. सेठानी भी मुस्करा रही थी. फिर उसने कल्लू को जाने के लिये कहा.

चूत चुदाई करके कल्लू दुकान पर वापस आया.
सेठ जी ने पूछा कि कहां था तू तो कल्लू बोला- आज मैं भी खांड खाने गया था।
सेठ जी हंस पड़े।