अपनी सगी भाभी को पटा कर चोदा

मैं भी उनके रूम में चला गया, सोचा कुछ काम होगा. रूम में जाने के बाद हम दोनों बेड पर बैठ गए.
तभी भाभी ने मुझे मोबाइल में सेक्स स्टोरी एप दिखाते हुए कहा- ये एप आपने डाली है?
मैं थोड़ा घबरा गया और डरते हुए बोला-नहीं नहीं.. ये एप मैंने नहीं डाली.
भाभी- तो ये कैसे आ गयी?
मैं- मुझे नहीं पता.

भाभी- खा जाओ मेरी कसम.
मैं- आपकी कसम खाने की क्या जरूरत है.. मैं बोल रहा हूँ ना.. मैंने नहीं डाली.
भाभी- आप रोज दिन में मेरे पास आके क्यों सो जाते हो?
मैंने अनजान बनते हुए कहा- कब सोया?
भाभी- आप सोते हो और मेरे बोबों को भी हाथ लगाते हो.

उनके मुँह से बोबे शब्द सुनते ही में आश्चर्यचकित हो गया.
मैंने अनजान बनते हुए कहा- मैंने कब लगाया?
भाभी- आखिर आप मुझसे चाहते क्या हो?
मैं कुछ नहीं बोला.

भाभी ने फिर पूछा, तो भी मैं डर के मारे कुछ नहीं बोल पाया.
भाभी- ये सेक्स स्टोरी की एप आपने ही डाली है.. मुझे सब पता है.
मैंने अपने डर को कम करते हुए उनकी आँखों में देखा- देखो भाभी ये एप मैंने नहीं डाली पर ये एप तो बहुत अच्छा है और आपको इसकी कहानियां पढ़ लेनी चाहिए.
भाभी- हां वो तो है.. इसमें मुझे भी इंटरेस्ट आ रहा है.
मैं- ये तो अच्छी चीज है और मैं आपके पास इसलिए सोता हूँ क्योंकि आप मुझे बहुत पसंद हो.
भाभी- अगर तुम्हारे भैया जी को यह पता चल गया तो?
मैं- अरे भाभी इस कि बात तो केवल आपको और मेरे को ही पता रहेगी और अपन दोनों पागल नहीं है जो भैया को ये बात बताएंगे.

भाभी- आपकी कोई जीएफ है?
मैं- नहीं भाभी.
भाभी- अगर हो तो बता दो.
मैं- अरे भाभी नहीं है.
भाभी- अगर शादी हुई तो आप मुझे भूल जाओगे.
मैं- भाभी आप बिलकुल पागल हो.. आप तो मुझे बहुत पसंद हो.

यह कह कर मैंने अपना एक हाथ उनके पेट पर रख दिया.. फिर धीरे से उनके मम्मों पर रख दिया और उन्हें ब्लाउज के ऊपर से ही सहलाने लगा.
भाभी- पहले दरवाजा तो बन्द कर दो.

मैंने झट से उठ कर दरवाजा बंद किया और आकर भाभी के साथ लेट गया. अब मैं उनके मम्मों को सहलाने लगा. फिर मैं उनके ब्लाउज को खोलने लगा और ब्लाउज को खोल कर उनके मम्मों को सहलाने लगा. भाभी ने मेरे सर को अपनी चूचियों की तरफ खींचा तो मैंने उनका एक दूध अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगा. लगभग 8-10 मिनट चूची चूसने के बाद मैंने उनका हाथ अपने लंड पर रख दिया. भाभी मेरे लंड को ऊपर से ही सहलाने लगीं.

फिर मैंने एक हाथ उनके नीचे डाल कर उनके साड़ी को ऊपर कर दिया तो पाया कि उन्होंने पेंटी नहीं पहन रखी थी और वो एकदम नंगी थीं. उनकी चुत एकदम गीली हो चुकी थी.

मैंने देर ना करते हुए अपनी दो उंगलियों को उनकी चुत में डाल दिया और फ़िंगरिंग करने लगा. थोड़ी देर में भाभी मस्त हो गईं- उसको अन्दर डालो ना.
मैं- उसको किसको?
भाभी- अपने लंड को…

फिर मैं भाभी को चोदने के लिए उनकी चुत के ऊपर आ गया और अपने लंड को उनकी चुत पर सैट करके चुत में लंड डालने लगा. लेकिन मेरा लंड उनकी चुत में नहीं जा रहा था तो मैंने थोड़ी पॉन्ड्स क्रीम ली और थोड़ी क्रीम अपने लंड पर लगा ली. थोड़ी क्रीम उनकी चुत में भी लगा दी और लंड घुसाने लगा. इस बार मेरा लंड उनकी चुत में चला गया. अभी मेरा आधा लंड ही अन्दर गया था कि वो चीख पड़ीं और मुझे बोलने लगीं- बहुत तेज दर्द हो रहा है.. लंड बाहर निकालो.

भाभी मुझे धक्का देने लगीं, लेकिन मैं भी जोर लगा कर वहीं रुका रहा और उनके बूब्स चूसने लगा. उनके दर्द के कम होने का इंतजार करने लगा. जैसे ही मुझे लगा कि उनका दर्द कम हो गया, मैंने एक और झटका मारा और पूरा लंड चुत की गहराइयों में चला गया.

उनको फिर से दर्द होने लगा. मैं थोड़ी देर रुक कर धीरे धीरे झटके मारने लगा. थोड़ी देर ऐसे ही करने के बाद उनकी चुत ने पानी छोड़ दिया.. पर मैं लगा रहा.
फिर थोड़ी देर में भाभी बोलीं- जोर जोर से झटके मारो ना..

तो मैं जोर जोर से झटके मारने लगा. कुछ देर बाद जैसे ही मेरे लंड का पानी निकलने लगा, तो मैंने लंड बाहर निकाल कर उनके पेट पर पिचकारी छोड़ दी और हम दोनों कुछ देर वहीं लेट गए.
भाभी ने कुछ देर बाद उठ कर कपड़े ठीक किए और बाहर चली गईं.

भाभी अब मेरी पक्की जुगाड़ बन गई थीं, उनके साथ ही बाकी की चुदाई की कहानी अगली बार लिखूंगा.

प्रिय पाठको, मेरी भाभी संग चुदाई की कहानी आपको कैसी लगी.. प्लीज मुझे मेल करके सुझाव अवश्य दें.
मेरा ईमेल पता है.

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