आंटी की तन्हाई चूत चोदन से मिटाई

मैंने दूसरी सिगरेट जला ली और उसके साथ वाइन पीने बैठ गया.

हमने काफी बातें की और दो दो पैग वाइन पी. फिर वाइन खत्म होने के बाद उसने डाइनिंग टेबल पर आ कर पहले से आर्डर से मंगाया हुआ खाना सर्व किया.

खाना खाने के बाद मैंने एक सिगरेट जलाई और उससे जाने का कहा.
उसने मेरी जांघ पर हाथ मारते हुए कहा- इतनी भी क्या जल्दी है यार.. बैठ कर बात करते हैं न.

हम दोनों उसके बैडरूम में गए. वहां जा कर वो मुझसे बात करने लगी.
आंटी ने सिगरेट का कश लेते हुए बताया कि उसके हंसबेंड 2 साल में एक बार घर आते हैं, वो भी सिर्फ 7 दिन के लिए आते हैं.

वो ये सब बताते हुए थोड़ी सेंटीमेंटल हो गयी थी. वो मुझसे चिपक सी रही थी. मैं उसे सांत्वना दे रहा था. उसके आंसू आने लगे थे.
मैंने आंटी के आंसू पौंछे और कहा- आप टेंशन नहीं लो, जब भी अकेलापन लगे, तो मुझे याद कर लिया करो.
तो उसने मेरी इस बात पर मुझे हग कर लिया और कहा- क्या तुम मेरी एक जरूरत पूरी कर सकते हो?

मेरा तो लंड खड़ा ही हो गया था और मुझे आंटी को चोदने की पड़ रही थी. इस वक्त वो मुझे एक माल सी लग रही थी लेकिन मैं अब भी संयम रखे हुए था कि शुरुआत आंटी की तरफ से होगी, तब ही इसके साथ सेक्स की सोचूंगा. मैंने आंटी से पूछा- कैसी इच्छा?
उसने कहा- क्या तुम मेरी शरीर की जरूरत पूरी कर सकते हो?

पहले तो मैं चुप रहा. फिर मैं कुछ बोलता, उससे पहले ही उन्होंने मेरे लिप्स पे अपने लिप्स रख दिए और मुझे स्मूच करने लगी. थोड़ी देर में मैं भी उसका साथ देने लगा.

इसी बीच उसने मेरी जीन्स में हाथ डाल दिया और लंड को पकड़ कर सहलाना शुरू कर दिया. मैं टांगें खोल कर उसको लंड सहलाने देने लगा. उसने मेरी शर्ट खोल दी और मेरे चौड़े मर्दाना सीने पे किस करने लगी.
इसके बाद में उसने अपनी नाइटी हटा दी और वो सिर्फ ब्रा पैंटी में आ गई. उसने मुझे हाथ से पकड़ा और उठने का इशारा किया. मैं यंत्रवत उसके साथ उठ गया. उसने मुझे बेड पे लेटा दिया.

वो नीचे से मेरी टांगों की तरफ आई और उसने मेरी जीन्स का बटन खोल कर जीन्स ओर अंडरवियरएक साथ नीचे कर दी. मैं पूरा नंगा हो गया था. मेरे खड़े लंड को देख कर वो एकदम से मचल गई और मेरी टांगों की तरफ से बेड पर आकर मेरे लंड को आंटी ने अपने मुँह में भर लिया. आंटी लंड चूसने लगी.
मुझे जन्नत का मजा आने लगा.

कुछ मिनट लंड चुसाई करने के बाद उसने अपनी ब्रा पैंटी भी उतार दी और मेरे सीने के दोनों तरफ अपनी दोनों टांगें डाल कर अपना एक निप्पल मेरे मुँह में डाल दिया. मैं आंटी के निप्पल को चूसने लगा और दूसरे चूचे को अपने हाथों से दबाने लगा. वो अब तक मेरे ऊपर लेट गई थी, जिससे मेरा लंड उसकी चूत से लग गया था.

काफी देर तक आंटी के बूब्स से मज़े लेने के बाद मुझे अपने लंड पर उसकी चूत से पानी रिसता सा महसूस हुआ. मैंने उसको लंड से थपकी दी, तो आंटी ने अपने हाथ से मेरे लंड को पकड़ा और अपनी चूत में फिट करके लंड के ऊपर बैठ गई.

मेरा लंड मोटा था. शुरू में मेरा आधा लंड ही आंटी की चुत में जा सका था. वो दर्द की वजह से कहराने लगी थी, पर कुछ देर में मेरा पूरा लंड अन्दर चला गया. वो कुछ देर लंड को अन्दर लेकर बैठी रही अपनी चूत से मेरे लंड की दोस्ती करवाती रही. फिर आंटी मेरे लंड पर ऊपर नीचे होने लगी.

उसके बाद मैंने आंटी को अपने नीचे लिया और लंड उनकी चूत में डाल कर उसको दबादब चोदने लगा.
इसी बीच वो एकदम से अकड़ कर झड़ गयी थी, पर मैं अब तक नहीं झड़ पाया था. मैंने लंड बाहर निकाला और आंटी ने मेर लंड को चूस कर खुद को दुबारा तैयार किया.

अब आंटी डॉगी स्टाइल में आ गयी. मैंने पीछे से उनकी चूत में लंड डाल दिया और काफी देर चोदने के बाद खुद को चरम पर आता हुआ महसूस किया तो मैंने आंटी से कहा- मेरा निकलने वाला है.
आंटी ने कहा- अपना रस मेरे बूब्स पर निकाल दो.
वो लेट गयी और मैं उसके ऊपर आ गया. वो मेरे लंड को अपनी मुठ्ठी में लेकर हिलाने लगी. थोड़ी देर लंड हिलाने के बाद मेरा सारा माल उसके मम्मों पे आ गया. उसने खुद को साफ किया और मेरे लंड को साफ किया.

इसके बाद एक दौर वाइन का फिर से चला और हम दोनों फिर से अभिसार के लिए गरम हो गए. उस रात हमने 3 बार चुदाई की, फिर सुबह हमने साथ में बाथ लिया. जाते समय आंटी ने मुझे 5000 रुपये दिए.
मैंने मना किया तो आंटी ने कहा- मैं तुमको कोई गिफ्ट देना चाहती थी, लेकिन इस वक्त सम्भव नहीं है, प्लीज़ तुम बुरा मत मानना, अपने लिए कुछ भी मेरी तरफ से ले लेना.

मैंने उसकी बात मान ली और उससे अलग होकर ओने घर चला गया.

कैसी लगी आपको मेरी कहानी. दोस्तो, प्लीज इस कहानी का फीडबैक मुझे ईमेल जरूर करें.

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