भाभी की गांड का उपहार

दोस्तों मेरे लंड का तो अब बड़ा ही बुरा हाल था और यह सब तो आप लोग भी खुद ही समझ सकते हो कि उस समय मेरी क्या हालत रही होगी? में अब और भी ज़ोर ज़ोर से उनके बूब्स को अपने दोनों हाथों से मसलने दबाने लगा था। फिर वो मुझसे एकदम लिपट गयी और अब हम दोनों की साँसे तेज चलने के साथ ही फूलने भी लगी थी और बाकी बच्चे सो रहे थे, लेकिन फिर भी हम दोनों को डर लग रहा था। फिर भी मैंने भाभी का ब्लाउज खोल दिया और में दोनों बड़े आकार के एकदम मुलायम बूब्स को ब्रा के ऊपर से ही सहलाने लगा था और मेरे बहुत बार कोशिश करने के बाद भी ब्रा का हुक नहीं खुल पा रहा था। अब भाभी अपने नरम गुलाबी होंठो से मेरे होंठो को रगड़ रही थी और तभी मैंने महसूस किया कि भाभी मेरे पजामे के नाड़े को खोलकर उसके अंदर अपने एक हाथ को डालकर मेरे लंड को सहला रही थी जिसकी वजह से मुझे बड़ा मस्त मज़ा भी आ रहा था और में चकित भी था और मुझे डर भी लग रहा था। फिर भाभी ने मेरे कान में मुझसे कहा कि तुम्हारा लंड तो बहुत बड़ा और यह मोटा भी बहुत है, लेकिन आज नहीं चोद सकते। कल अच्छा प्लान बनाकर हम दोनों ही पूरे घर में अकेले होंगे और उसके बाद आगे का काम करेंगे।

दोस्तों मुझसे यह बात कहकर मेरा हाथ पकड़कर अपनी साड़ी के अंदर चूत पर ले गयी और वो मेरे लंड के ऊपर नीचे अपनी मुठ्ठी को करके मुठ मारने लगी। अब में भी उसकी चूत को सहलाने और अपनी ऊँगली से चुदाई करने लगा था और उनकी चूत की झांटे सहला रहा था और तभी वो मुझसे एकदम चिपक गयी। फिर में कुछ देर बाद ही उसके हाथों में झड़ गया और वो नीचे आकर मेरे वीर्य को चाटने के बाद अधनंगी अवस्था में ही उठकर बाथरूम में चली गयी। फिर आकर दोबारा वो अपनी ठीक जगह पर आकर लेट गयी और अब भाभी और मेरे बीच रमेश सो रहा था। फिर दूसरे दिन सवेरे में उठते ही मन ही मन में सोच रहा था कि अब भाभी का आगे का क्या विचार है? जब हम दोनों अकेले घर पर होंगे उसके बाद में भाभी के साथ कैसे चुदाई करके मज़े लूँगा? तभी भाभी ने कृति से कहा कि तुम सब लोग शॉपिंग करने चले जाओ, विनय और सन्नी को किताब की दुकान और रमेश को खिलोनो की दुकान पर ले जाओ। अब में उनके मुहं से वो बात सुनकर बड़ा चकित हो गया और सोचने लगा कि हम सब चले गये तो भाभी तो घर में अकेली होगी। फिर थोड़ी देर में वो मौका देखकर मुझसे कहने लगी जब सब लोग जाने लगें तुम झूठा बहान बना देना कि तुम्हारा पेट दर्द हो रहा है और फिर तुम उन सभी के साथ मत जाना।

अब मैंने वो बात सुनकर उनको कहा वाह मान गया मेरी प्यारी भाभी आपने कितना अच्छा जाल बनाया है जिसमे सभी एक साथ फंस जाएँगे और किसी को हमारे ऊपर बिल्कुल भी शक नहीं होगा और मैंने उनके हाथ को धीरे से सहला दिया। फिर मैंने ध्यान देकर देखा कि भाभी ने उस समय ब्रा नहीं पहनी थी और अब मुझे रात की ब्रा ना खुलने की बात याद आ गई और मुझे हँसी आ गयी। फिर मैंने देखा कि भाभी सभी खिड़कियाँ बंद कर रही थी और कहने लगी कृति देखो कितनी मक्खियाँ बाहर से अंदर आ रही है। अब में तुरंत समझ गया कि भाभी का मेरे साथ अपनी चुदाई का विचार बन रहा है और सोचकर मेरा लंड थोड़ा थोड़ा खड़ा हो चला था। फिर मैंने जाते समय आखरी वक्त में अपने पेट दर्द का बहाना बना दिया और वो एकदम सफल रहा। अब कृति, विनय और रमेश बाजार के लिए घर से निकल पड़े और भाभी ने जब दरवाजे पर खड़े होकर देखा कि वो लोग बहुत दूर जा चुके थे, तभी तुरंत भाभी ने दरवाजा भी बंद कर दिया। अब हम दोनों पूरे घर में बिल्कुल अकेले थे और घर की सभी खिड़कियाँ दरवाजे भी बंद थे और उसी समय में भाभी के पास जाकर उनके बदन से चिपक गया। दोस्तों भाभी पहले से ही अपने ब्लाउज के बटन खोल चुकी थी और अब वो मुझे चूम रही थी और वो मुझसे कहने लगी।

अब इस समय अपने पास बहुत समय है वो सभी लोग करीब दो घंटे से पहले वापस नहीं आने वाले। फिर भाभी ने जल्दी से मेरी पेंट की चेन खोली और मेरा लंड पेंट से बाहर निकालकर सहलाने लगी थी और मैंने उनकी साड़ी पेटिकोट को कमर से ऊपर कर दिया और फिर पहली बार उनकी नंगी चूत बिना किसी डर के देखी ओह्ह्ह। दोस्तों वाह क्या मस्त नज़ारा था? मेरी प्यारी भाभी की वो पतली लकीर वाली चूत का वो मनमोहक द्रश्य मुझे आज भी अच्छी तरह से याद है और मुझे अपनी भाभी पर प्यार आ जाता है। अब में उनकी चूत के होंठो को खोलने लगा था। फिर भाभी मुझसे कहने लगी कि चलो बिस्तर पर आराम से करेंगे और वो मुझे मेरे होंठो पर चूमने लगी। अब मैंने उनकी साड़ी को उतार दिया उनका ब्लाउज तो पहले से ही खुला हुआ था। फिर भाभी ने मेरा साथ देते हुए अपने पेटिकोट का नाड़ा ढीला कर दिया और अपने पेटिकोट को भी नीचे गिरा दिया, जिसकी वजह से अब वो मेरे सामने सिर्फ़ अधखुले ब्लाउज को पहने खड़ी थी और में पेंट शर्ट पहने था। में अभी नंगा नहीं था। फिर भाभी ने अपने ब्लाउज को भी उतार फेंका और वो पूरी नंगी होकर मुझसे लिपट गयी। अब मैंने उनकी गांड को सहलाते हुए उनको अपनी गोद में उठा लिया और भाभी मेरे गले में अपने दोनों हाथों को डालकर एकदम सिमट गयी और वो मेरे होंठो को चूमती रही।