भाभी की गांड का उपहार

फिर करीब 10-15 धक्को के बाद भाभी मुझसे कहने लगी सन्नी रूको, मैंने पूछा क्यों क्या हुआ? अब वो कहने लगी कि तुम्हारा लंड बहुत शानदार है पता नहीं फिर कब इससे में अपनी चूत की चुदाई का मज़ा लूँ इसलिए अब में तुम्हारा लंड अपनी गांड में भी लेकर महसूस करना कहती हूँ, क्या तुम मेरी गांड मारना पसंद करोगे? मैंने कहा कि नेकी और पूछ पूछ, इस अच्छे काम में देर किस बात की? और मैंने जैसे ही उनकी चूत से अपना लंड बाहर निकाला तो उनकी चूत से पानी भी निकलने लगा था। अब मैंने भाभी को अपने सामने घोड़ी बनने को कहा और वो कहने लगी कि नहीं में खड़ी होकर नीचे झुक जाती हूँ ऐसे में ज्यादा मज़ा आएगा और फिर वो उसी तरह से खड़ी हो गयी। फिर मैंने जब पीछे से उनकी गांड देखी तो में क्या बताऊँ क्या मस्त द्रश्य था? में तो देखकर पागल सा हो गया और जल्दी से में उनकी गांड के छेद में अपना लंड डालने लगा, लेकिन छेद छोटा होने की वजह से मेरा लंड उनकी गांड में नहीं जा रहा था और मेरा लंड कभी फिसलकर ऊपर तो कभी चूत में घुस रहा था। फिर में जाकर भाभी के कमरे से तेल लेकर आया, उनकी गांड और अपने लंड पर ठीक से लगा लिया। अब भाभी कहने लगी कि सन्नी अब देर मत करो अगर वो लोग आ गए तो मेरी यह इच्छा पूरी नहीं हो पाएगी।

फिर मैंने बिना देर किए अपना लंड भाभी की गांड पर लगाकर मैंने उनको पूछा मुझे लगता है कि आपने कभी गांड नहीं मरवाई है? वो कहने लगी कि हाँ आज में पहली बार ही तुम्हारा लंड इतना लंबा और मोटा लंड अपनी इस गांड को उपहार में देना चाहती हूँ प्लीज सन्नी अब देर ना करो। फिर मैंने अपने दोनों हाथ भाभी के पेट के आगे लाकर आपस में जकड़ लिया और एक ज़ोर का धक्का मारा जिसकी वजह से मेरा दो इंच लंड उनकी गांड में घुस गया और वो ज़ोर से चीख पड़ी आईईईईईई नहीं सन्नी मुझसे यह दर्द अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है, तुम्हारा लंड बहुत मोटा मेरे लिए दुखदाई है, में तुम्हे अपनी गांड का उपहार नहीं दे सकती, ऊफ्फ्फ्फ़ प्लीज अब तुम इसको बाहर निकालो। अब में कहने लगा हाँ ठीक है में अभी अपना लंड बाहर निकालता हूँ। तुम बिल्कुल भी हिलना मत, नहीं तो तुम्हे और भी तेज दर्द होगा। फिर में धीरे से अपने लंड को बाहर निकालते हुए उसको बोला भाभी आप मुझे अपनी गांड उपहार में दो या ना दो, लेकिन में यह उपहार जरुर लेकर रहूँगा और मैंने एक और जोरदार धक्का उनकी गांड में मारकर अपना आधे से ज़्यादा लंड अंदर कर दिया। अब वो दर्द की वजह से रोने लगी थी और में उनसे कहने लगा कि प्लीज भाभी आप रोए नहीं, में थोड़ा और झुककर उनके बूब्स को सहलाते हुए उनका दर्द कम करने की कोशिश करने लगा।

अब में उनको कहने लगा, जैसे पहली बार चूत मरवाने में दर्द होता है उसी तरह से गांड मरवाने में भी वैसा ही दर्द होता है। फिर भाभी कहने लगी आआहह में सब समझती हूँ, लेकिन ऊऊहह ओह्ह्ह मुझे इतना दर्द होगा मैंने यह सोचा नहीं था आह्ह्ह्ह ठीक है तुम अब अपना उपहार ले लो जो होगा देखा जाएगा। फिर में धीरे धीरे भाभी की गांड में अपना लंड अंदर बाहर करने लगा था और करीब पांच मिनट बाद के भाभी भी अपने कूल्हों को हिलाने लगी थी। अब में तुरंत समझ गया कि मैंने भाभी की गांड से अपना पूरा लंड बाहर निकालकर उनकी गांड में वापस डालने लगा वो हर धक्के पे ऊहह्ह्ह आह्ह्ह्ह मम्म्म ऊऊईईईईई कर रही थी। फिर वो मुझसे कहने लगी कि सन्नी तुम्हारे लंड का कोई जवाब नहीं है, कोई भी कुंवारी लड़की या शादीशुदा औरत तुम्हारे लंड से अपनी चुदाई करवाने के लिए कुछ भी कर जाएगी, लेकिन अगर उनको पता चल जाए कि तुम्हारे पास इतना लाज़वाब लंड है। दोस्तों मेरा लंड अपनी इतनी तारीफ सुनकर पूरे जोश में आकर गांड की धुनाई कर रहा था और भाभी हर धक्के पर आअहह आआअहह कर रही थी। फिर करीब बीस मिनट गांड मारने के बाद मेरा लंड और टाइट होगा और मैंने अपनी स्पीड को पहले से भी तेज कर दिया। दोस्तों भाभी अब मेरे हर एक धक्के को नहीं झेल पा रहा थी और उनके मुहं से ऊऊओफफफ्फ़ आआआअहह मर गयी की आवाज आने लगी थी।

फिर में उनसे कहने लगा कि भाभी में अब झड़ने वाला हूँ क्या में तुम्हारी गांड में ही अपने वीर्य को निकाल दूँ? वो कहने लगी कि हाँ एक बूँद भी बाहर नहीं गिराना। दोस्तों तब तक में अपनी चरम सीमा पर आ गया था और मैंने भाभी की कमर में हाथ डालकर एक जोरदार धक्के से अपना पूरा लंड उनकी गांड की गहराईयों में पहुंचाकर अपना वीर्य निकालने लगा और जिसको निकलते हुए भाभी अपनी गांड में महसूस कर रही थी। फिर जब मैंने पूरी तरह से झाड़कर अपना लंड उनकी गांड से बाहर निकाला तब मैंने देखा कि उनकी गांड गांड ना होकर लाल रंग के बड़े से छेद में बदल चुकी थी। फिर मैंने भाभी को उनकी गांड को सामने लगे शीशे में देखने के लिए कहा और वो झुके हुए अपनी गांड को शीशे में देखकर बिल्कुल दंग हो गयी और वो मुझसे कहने लगी यह क्या मेरी गांड है? और इतना बोलते है दरवाजे की घंटी बज गई। अब हम दोनों तुरंत समझ गये कि वो लोग वापस आ गये है। फिर भाभी जल्दी से बाथरूम की तरफ अपने कपड़े उठाकर चली गये और में जल्दी जल्दी अपने कपड़े पहनकर दरवाजा मैंने कुछ इस तरह से खोला जैसे में सो रहा था। फिर जब दरवाजा खुला तो कीर्ति मुझसे पूछने लगी तुमने इतनी देर क्यों लगाई? मैंने उसको बोला कि में सो रहा था और शायद भाभी बाथरूम में है।