भाई की दीवानी

भाई भी समझ चुके थे कि मैं जल्दी से जल्दी चुदवाना चाहती हूँ। उन्होंने मुझे थोड़ा ऊपर किया और मेरी चूची चूसने लगे। वो कुछ इस तरह से अपनी जीभ मेरी निप्पल पर घुमा रहे थे कि मैं तो पागल सी हो गई थी।
अब हम चुदाई करने की परफेक्ट पोजीशन में थे।

मैंने फिर से अपना हाथ नीचे किया और भाई के तने हुए लंड को पकड़ कर मेरी गीली चूत के दरवाजे पर रखा और अपनी गांड नीचे की और लंड पर बैठ गयी थी. मेरी चूत तो गीली थी इसलिए लंड पर दो तीन बार उठने बैठने की वजह से भाई का पूरे का पूरा लंड मेरी चूत के अन्दर चला गया। मजेदार चुदाई के लिए मैंने अपने दोनों हाथ पीछे कर के भाई की जाँघों पर रख लिए ताकि उनका लंड आराम से मेरी चूत में आ जा सके।

वो मेरी चूचियां मसल रहे थे और मैं उनके ऊपर उनका लंड अपनी चूत में लेकर चुदाई के लिए तैयार थी। चुदाई करने के पहले मैंने पोर्न फिल्मों की तरह भाई के लंड को अपनी चूत में पकड़े हुए अपनी गांड को थोड़ा ऊपर होकर गोल गोल घुमाया।
मैंने ऐसा पहली बार किया था और मुझे बड़ा मज़ा आया. मैं अपनी गांड गोल गोल घुमाती जा रही थी और उनका लंड मेरी चूत के अन्दर घूम रहा था। आप खुद समझ सकते हैं कि इसका क्या असर होता है।

भाई मेरा पूरा पूरा साथ दे रहे थे क्योंकि उनको भी मज़ा आ रहा था। अब मैं चुदवाना चाहती थी। मैंने धीरे धीरे अपनी गांड ऊपर नीचे करनी शुरू की थी लेकिन मेरी रफ़्तार अपने आप बढ़ती गई। मैं अपनी चूत का धक्का नीचे लगा रही थी और भाई अपने लंड का धक्का अपनी गांड ऊपर करके मेरी चूत में लगा रहे थे। मैंने देखा कि मेरी दोनों चूचियां हर धक्के के साथ ऊपर नीचे हिल रही थी।

भाई के गरमागरम लंड के धक्के मेरी गर्म और गीली चूत में लग रहे थे और चुदाई का मधुर संगीत बजने लगा। मैं चुदवाती हुई अपनी मंजिल पर पहुँचने के करीब थी और मैं भी अपनी गांड हिला हिला कर आगे पीछे करके चुदाई में भाई का साथ दे रही थी।

कुछ देर ऐसे ही चुदवाते हुए मैंने भाई के लंड के सुपारे को अपनी चूत में मोटा होता महसूस किया तो मुझे पता चल गया कि भाई का लंड भी पानी बरसाने को तैयार है। मैं भी झड़ने के काफी पास थी और भाई भी मेरी चूत में जोर जोर से धक्के मारने गए.
और फिर मैं तो अपनी मंजिल तक पहुँच ही गयी।

भाई लगातार मुझे चोदते जा रहे थे। और अचानक उनके लंड ने अपना गर्म गर्म रस मेरी रसीली चूत में बरसना शुरू कर दिया। भाई का लंड नाच नाच कर मेरी चूत अपने रस से भर रहा था और मैंने मज़े के मारे अपनी गांड भींच करके उनके पानी बरसते हुए लंड को अपनी चूत में जकड़ लिया और भाई के ऊपर लेट गयी।
मेरी आँखें तो मजेदार चुदाई के कारण बंद सी हो रही थी.

हम कुछ देर वैसे ही पड़े रहे। करीब 15 मिनट बाद हम दोनों एक दूसरे से अलग हुए। हम दोनों ने दोबारा बाथ लिया और कपड़े पहन कर सामान गाड़ी में रख दिया और घर को चल दिए।
रास्ते में भी हमने बहुत मज़ा लिया।

दिल्ली से वापस घर तक की घटना अगली कहानी में बताऊँगी।

दोस्तो, कैसी लगी आपको मेरी यह कहानी, मुझे मेल जरूर करना।
धन्यवाद

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