बीवी गैर मर्द की बांहों में चुदी मेरे सामने

वो जैसे जैसे बोलती जा रही थी, मुझको करना पड़ रहा था.

फिर बोली- हां… अब खड़े लंड के टोपा को मुँह में ले और कुत्ते की तरह जीभ निकल कर पूरी मार.

विवेक का लंड फुल टाइट हो चुका था. वो वीडियो बना रही थी. वो विवेक से बोली- इस भड़ुए ने तुम्हारा लंड चूस कर खड़ा कर दिया मेरी जान… अब अपनी इस जान की चूत मार लो.

उसने फ़ोन को साइड में रख कर मुझको अपने पैर से जोर से लात मारी, मैं डबलबेड के नीचे आ गया. कामिनी खुद विवेक के खड़े लंड पर चढ़ गई.

विवेक ने कामिनी के बड़े बड़े गोरे गोरे मम्मों को अपने दोनों हाथों से मसलना शुरू कर दिया.

कामिनी की चूत तो पहले ही विवेक से चुदने के लिए पानी छोड़ने लगी थी, विवेक बोला- मेरी जान तुमको तो बहुत गुस्सा आता है.
कामिनी विवेक के लंड पर उछलते हुए बोली- नहीं आना चाहिए क्या जी?
तभी उसका ध्यान मेरी तरफ गया और बोली- तुमको बहुत मजा आता है साले चुदाई देखने में… चल सर नीचे कर के मुर्गा बन जा.
मैंने कहा- बाहर चला जाऊं मैं?
कामिनी बोली- नहीं, जाना नहीं है… मुर्गा बन जल्दी.

मैं ऐसे ही खड़ा रहा.

विवेक बोला- छोड़ो न.
बोली- चल दीवार की तरफ मुँह करके कोने में खड़ा हो जा.

मैं दीवार की तरफ मुँह करके खड़ा हो गया. विवेक कामिनी को अपने लंड पर गेंद की तरह उछाल रहा था.

कामिनी ‘ऊहह हह आअहह…’ कर रही थी और बोल रही थी- क्या उछाल उछाल कर चूत लेते हो सैयां जी… तुम्हारा लंड मेरी बच्चेदानी तक जा रहा है.

विवेक ने उसको ऐसे ही काफी देर उछालने के बाद उसको पलट कर बेड पे डाल दिया और उसकी एक टांग कंधे पे रख कर उसकी चूत में धक्के देने शुरू कर दिए.
पहले ही झटके में कामिनी जोर से बोली- उम्म्ह… अहह… हय… याह… माँआ…

विवेक ने जोरदार झटके देने शुरू कर दिए. कामिनी कामुक सिसकारियां लेने लगी- आअहह आअहह ऊऊहह…

वो विवेक के सीने पर और गांड पे हाथ फेरने लगी. अब विवेक ने उसका एक पैर भी नीचे कर दिया और दोनों टांगें पूरी तरह फैला दीं.
वो बोली- कितनी टाँगें फैला फैला के लोगे… चूत 35 की और गांड 42 की हो जाएगी.

विवेक ने धकापेल चालू कर दी. कामिनी ‘ऊऊऊ ओह… आउऊउ आअहह…’ करती जा रही थी.

फिर विवेक ने कामिनी को उल्टा करके लिटा दिया और पीछे से लंड घुसाया, वो बोला- अब जरा टाइट जाएगा मेरी जान.

उसका लंड इतना बड़ा था कि पीछे से भी कामिनी को पूरा मजा दे रहा था. वो अपनी गोरी गोरी चिकनी चिकनी गांड से विवेक के लंड को धक्का दे रही थी. विवेक भी सुरा और सुंदरी के नशे में चूर था.

विवेक बोलता जा रहा था- आह… क्या चिपक चिपक कर चूत देती हो मेरी जान…
कामिनी कह रही थी कि तुम भी तो एंगिल बदल बदल के चूत लेते हो मेरे राजा…

काफी देर ऐसे ही वो मेरी बीवी की चुत में धक्के देता रहा.

कामिनी बोली- जानू अपनी पिचकारी सीधे करके छोड़ना.

अब विवेक ने कामिनी को साइड से लिटा के अपना लंड घुसा दिया और बोला- टांगें चिपकाओ मेरी जान.
कामिनी ने अब अपनी गांड को पीछे हिलाते हुए धक्का देना शुरू कर दिया.

कामिनी बोली- आह… क्या मजा देते हो राजा… इतनी देर से पेले जा रहे हो मेरी जान… मैं दो बार निकल गई हूँ, अब तो छोड़ दो पिचकारी अपनी!
विवेक बोला- आह… छोड़ देंगे… अभी तो लंड के मजा लो.

फिर विवेक ने कामिनी को सीधा कर दिया और दोनों टांगें कंधों पर रख कर दोनों हाथों से कामिनी की बड़ी बड़ी गोरी गोरी चूचियों को मसलने लगा और फुल स्पीड में धक्का देने लगा.

कामिनी ‘बसस… आअहहहह… छोड़ दो छोड़ दो…’ कहती जा रही थी.
विवेक बोला- अब मैं पिचकारी छोड़ने वाला हूँ.
वो बोली- तो छोड़ दो मेरी जान… आज तुम्हारी पिचकारी से मेरी चूत भर जाने दो.

विवेक ने एक जोरदार झटके के साथ पिचकारी छोड़ दी और एक तरफ लेट गया.

कामिनी जोर से बोली- राहुल!
मैंने कहा- हां…
वो बोली- जल्दी से इधर आ… और साफ़ कर.
मैंने कहा- टॉवल ले आऊं?
वो बोली- साले टॉवल से नहीं.
“तो फिर कैसे साफ़ करूँ?”

वो बोली- फिर ऐसे कर कि अपनी जीभ बाहर निकाल और जितनी मेरी चूत में लंड की मलाई निकली है, सब साफ़ कर दे.
मैं बोला- जो बोला था, वो सब कर दिया था, अब ये नहीं हो पाएगा.
वो बोली- होगा… जरूर होगा, चल जल्दी कर भोसड़ी के… तू है ही इस लायक साले जल्दी आ.
मैं बोला- प्लीज छोड़ दो यार!
वो बोली- मैं तेरी यार नहीं हूँ… समझा! जल्दी आ… नहीं आया ना तो याद करेगा… ऐसी गांड मारूंगी तेरी कि जिन्दगी भर याद रखेगा… चल जल्दी आ.
विवेक बोला- भोसड़ी के बहरा है क्या… क्या नाटक है? साले गांड पे लात खा के ही मानेगा… जल्दी कर, जैसा मैडम ने कहा.

मरता क्या न करता… मैं कामिनी के पास गया और उसकी चूत से विवेक का माल निकल रहा था, पिचकारी भी उसने लम्बी वाली छोड़ी थी. मैंने जैसे ही चुत पर जीभ फेरी, वैसे ही गन्दा सा कसैले से स्वाद के मारे मेरा दिमाग झनझना गया.

कामिनी ने पूरी ताकत से पीछे से मेरे बाल पकड़ लिए और बोली- जल्दी कर साले चादर गन्दी हो जाएगी, जल्दी जीभ निकाल कुत्ते की तरह… जो तू है भी… और चाट जल्दी.

मैं जितना साफ़ करता, विवेक के लंड की मलाई फिर बाहर आ जाती, मैंने कहा- ये तो निकलती ही जा रही है.
वो बोली- बहनचोद भड़ुए… असली मर्द जब पिचकारी छोड़ते हैं, तो चूत से बहती रहती है. तेरे जैसे नामर्द छोड़ते हैं तो चूत गीली भी नहीं होती.
मैं उसकी भाषा से आहत होने लगा था.