बुआ के साथ सम्भोग किया

कुमार एक अठरह वर्ष का हृष्ट-पुष्ट युवक हूँ और अपनी तैंतीस वर्षीय बुआ के साथ, मुंबई में एक दो कमरे वाले फ्लैट में रहता हूँ। मेरे जन्म के समय ही मेरी माँ का निधन हो गया था और तब से आज तक मेरी बुआ ने ही मेरी परवरिश की और मुझे पालपोस कर बड़ा भी किया। जब मैं दस वर्ष का था तब मेरे पापा दुबई में नौकरी करने चले गए थे और आज तक वापिस नहीं आये ! लेकिन वह हर माह बुआ को मेरी पढ़ाई और घर खर्च के लिए पैसे ज़रूर भेजते हैं और आज भी वह हर माह खर्चा भेजना नहीं भूलते !

मेरी बुआ एक बाल-विधवा है, जब वह चौदह वर्ष की थी तब उनका विवाह कर दिया गया था, लेकिन शादी के एक माह के बाद ही उनके पति की सांप के काटने से मृत्यु हो गई थी। उनके पति की अकाल मृत्यु के बाद, जिसमें उनका कोई दोष नहीं था, हमारे निर्दई समाज की कुरीतियों ने उन्हें अकारण ही शापित घोषित कर दिया। क्योंकि पति की मृत्यु के समय तक उनका गौना नहीं हुआ था इसलिए वह ससुराल ना जाकर अपने पीहर में ही रहने लगी। लेकिन उनके दुर्भाग्य ने उनका पीछा नहीं छोड़ा और उनके पति की मृत्यु के छह माह के बाद ही मेरे दादाजी भी गुज़र गए और वह बिल्कुल असहाय तथा अकेली हो गई। समाज से शापित कहलाने के कारण उनके लिए कोई और रिश्ता भी नहीं आया और उनका पुनर्विवाह नहीं हो सका था। इसलिए तब मेरे पिता ने अपनी बहन को सहारा दिया और उन्हें हमारे घर का एक सदस्य बना लिया।

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उन्ही पारिवारिक दुखद दिनों में, मेरा जन्म भी हुआ था और दुर्भाग्य से मेरी माँ का स्वर्गवास भी हुआ। बुआ बताती है कि मेरी माँ ने अंतिम साँस लेने से पहले मुझे उनकी गोद में डाल कर मेरी देखभाल और परवरिश की ज़िम्मेदारी दे दी थी। पहले के दस वर्ष तो बुआ मुझे पालने के लिए घर पर ही रही, लेकिन पापा के दुबई जाने के बाद उन्होंने घर की आमदनी बढ़ाने के लिए अथवा अपने को व्यस्त रखने के लिए एक गैर सरकारी संगठन में नौकरी भी कर ली।

अब जिस घटना का मैं विवरण करने जा रहा वह इस वर्ष मार्च के तीसरे रविवार की है जब मैं नहाने के बाद बाथरूम से बाहर अपने कमरे में आ कर अपना बदन पोंछ रहा था। तभी बुआ बाथरूम में लगे गीज़र से रसोई के लिए गरम पानी लेने के लिए मेरे कमरे में आ गई और मुझे बिल्कुल नंगा देख कर एक बार तो रुकी, मुझे निहारा और फिर मुस्कराती हुई बाथरूम से पानी लेने चली गई।

मुझे इस बात का बिल्कुल भी अंदेशा नहीं था कि रसोई में काम कर रही बुआ, रसोई के उस दरवाज़े से, जो मेरे कमरे में खुलता है, मेरे कमरे में भी आ सकती हैं। जब मैं कपड़े पहन कर बुआ से रसोई में जाकर इस बारे में खेद प्रकट किया तो बुआ ने कहा कि इसमें खेद करने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि उन्होंने तो मुझे जन्म से ही नंगा देखा है तथा दस वर्षों तक मुझे नग्न अवस्था में स्नान भी कराया है। अगर आज आठ वर्षों के बाद उसने मेरे को एक बार फिर से नग्न देख लिया है तो इसमें परेशान होने की कोई बात नहीं है, कभी कभी छोटे से घर में ऐसी घटना हो ही जाती है।

फिर बुआ ने मुझे अपने गले से लगा कर प्यार किया और कहा कि मैं इस बात को भूल जाऊँ। मैं रसोई से बाहर तो आ गया लेकिन बुआ का इस तरह गले से लगा कर प्यार करना और उनकी आँखों में जो चमक थी उसका कारण मुझे समझ में नहीं आया। अगले आठ दिन सामान्य रूप से निकल गए और मंगलवार को होली की छुट्टी थी। क्योंकि बुआ तो होली खेलती नहीं थी इसलिए मैंने अकेले ही पड़ोसियों के साथ खूब होली खेली तथा दोपहर एक बजे के बाद मैं बुरी तरह रंगा हुआ और पूरा गीला बदन लिए हुए घर लौटा !

मेरे को उस हालत में रंग और बाल्टी लिए घर में घुसते देख कर बुआ ने रसोई से ऊँची आवाज़ में ही कह दिया कि मैं कमरे को गन्दा नहीं करूँ और सीधा बाथरूम में जा कर नहा लूँ।

बुआ बहुत ही शक्की मिजाज़ की है इसलिए यह सुनिश्चित करने के लिए मैं उनके कहे अनुसार बाथरूम जाता हूँ या नहीं वह मेरे पीछे पीछे खुद भी वहीं बाथरूम में आ गई !

क्योंकि मैं तो होली के ही मूड में था इसलिए बुआ को देखते ही मैंने पलट कर बुआ को गले से लगा कर होली की मुबारक दी तथा उन के पूरे चेहरे पर गुलाल लगाया और उनके बदन को बाल्टी में रखे हुए नीले रंग से उन्हें पूरा भिगो दिया।

आकस्मिक रंग लगाने की मेरी इस हरकत से वह मेरे पर झल्ला उठीं और मुझे बहुत ही बुरी तरह डांटते हुए अपनी साड़ी, ब्लाउज और पेटीकोट को बाथरूम में ही उतार कर, पैंटी और ब्रा में ही अपना हाथ मुँह धोया तथा मुझे नहाने का आदेश देकर बाथरूम से बाहर चली गई।

उनके उस गुस्से के रूप को देख कर मैं घबरा गया और बाथरूम का दरवाज़ा बंद किये बिना, जल्दी से अपने सारे कपड़े उतार कर नहाने बैठ गया।

अभी आधा ही नहाया था कि बुआ फिर बाथरूम में आ गई और कहने लगी कि मेरी गर्दन के पीछे और पीठ पर बहुत रंग लगा हुआ था और क्योंकि वह रंग मुझ से उतर नहीं रहा था, इसलिए वह उसे अच्छी तरह रगड़ कर उतार देती हैं।

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