मेरी बुआ की चुदाई के किस्से

मैं बोली- एक एक करके आना.
लल्लन बोला- तुम तो दोनों साथ में लेने वाली थी ना, कोशिश तो करो.
मैंने बोला- पागल हो.. बकवास मत करो एक एक करके आओ.
उसने कहा- अच्छा..! बकवास तो तू कर रही है. एक तुझे चोदेगा तो दूसरा मुट्ठी मारेगा क्या?
मैंने कहा- लाओ मैं मार देती हूँ.

तब उसने मुझे लिटाया और ऊपर आ गया. उसने मेरी चूत पर लिंग टिकाया और मेरी चुचियों पर हाथ मार के बोला- घुसा दूं?

मैं चुपचाप ऊपर देखने लगी, तभी दूसरे आदमी जिसका नाम भूरे था.. उसने अपना लिंग हाथ में दे दिया और कहा- जो पूछ रहा है, बताती क्यों नहीं?
उसने फिर से पूछा- घुसेड़ दूँ अपना लंड तुम्हारे अन्दर?
मैंने धीरे से इशारा किया- हां.

बस एक ही झटके में पूरा लिंग अन्दर हो गया. मेरी कमर दर्द से उठ गयी. मैंने मुट्ठी भींच लीं, जिससे भूरे के लंड पर ज़ोर पड़ गया. उसने मेरी चुची दबाते हुए कहा- क्या हुआ, फट रही है?
मैं चुप रही और धक्के झेलने लगी. थोड़ी देर बाद उन्होंने पोज़िशन बदल ली और अब भूरे मेरे ऊपर चढ़ गया था और लल्लन का मेरे हाथ में था.

बाहर बारिश हो रही थी और अन्दर हम लगे हुए थे. कुछ देर बाद हम तीनों झड़ गए और अलग हो गए.

हम तीनों को करीब आधा घंटा हो चुका था. मैं इतनी देर बाहर नहीं रह सकती थी. मैंने जल्दी से कपड़े पहने और स्कूल चली गयी. मैंने उन्हें पलट के भी नहीं देखा.

स्कूल में आते ही बृजेश ने पूछा- भाभी जी, कहाँ गयी थीं?
मैंने बोला- कहीं नहीं घर (ससुराल, जो स्कूल के पास ही है) चली गयी थी.
उसने कहा- ठीक है.
तभी लल्लन अन्दर आया और बोला- मैडम जी पट्टी वहीं भूल आई थीं आप.

बृजेश ने मुझे देखा, तो मैं शर्म से पानी पानी हो गई थी. लल्लन पट्टी रख कर चला गया.

बृजेश ने पूछा- भाभी मुझसे कोई ग़लती हो गयी क्या?
मैंने कहा- हां तुम्हारी वजह से ही मुझे जाना पड़ा.
उसने सवालिया निगाह से मुझे देखा.
तब मैंने उसे पूरी बात बताई. उसने मुझसे माफी माँगी क्योंकि स्कूल के अन्दर मेरी चुदाई करने की वजह से ही उन बच्चों ने हमें देखा था और मैं फिर चुद गयी थी.

इस कहानी के बाद मैंने बुआ से पूछा- क्या वो दोबारा भी आए.
उन्होंने कहा- हां दो चार बार और आए. एक बार तो उन दोनों ने मुझे खेत में ही चोदा था.
“बताओ न बुआ कैसे?”
“वो अगली बार…”

पाठको! यह मेरी पहली कहानी है. कहानी आपको कैसी लगी, ये ज़रूर बताएं ताकि अगला किस्सा आपके लिए और बेहतर तरीके से पेश हो सके.
धन्यवाद.