चाची की बातों ने सेक्स जगाया

हैल्लो दोस्तों, आप सभी कामुकता डॉट कॉम के चाहने वालों के सामने मेरा एक नया सेक्स अनुभव को लेकर आया हूँ। दोस्तों आप में आपकी सेवा में यह जो सच्ची घटना लेकर आया हूँ इसमे मुझे अपनी गाँव की चाची को चोदने में मुझे बहुत मज़ा आया था। फिर उनकी चुदाई करने के बाद मेरी हालत एक ऐसे बाघ जैसी हो गयी थी जिसके मुहं को एक बार खून का स्वाद लग गया हो और अब में तो चुदाई के लिए किसी चूत के चक्कर में ही रहने लगा था। अब में हमेशा मन ही मन सोचते हुए उस चूत की चुदाई करके उसकी संतुष्टि और अपने मन को बड़ा खुश महसूस करने लगा और इसलिए अब मुझे उस किसी कामुक चूत के विचार कुछ ज्यादा ही आने लगे थे। फिर इसी बीच एक दिन वो गर्मियों के दिन थे और में अपने घर की छत पर सोया हुआ था और उसी छत पर मेरे घर में ही किराए से रहने वाली एक औरत भी सोई हुई थी, जिसको में हमेशा चाची कहता था। दोस्तों गरमी ज्यादा होने की वजह से मुझे नींद नहीं आ रही थी, लेकिन फिर भी में अपनी दोनों आँखों को बंद करके नींद आने का इंतजार कर रहा था।

दोस्तों उसी छत के दूसरे हिस्से में मेरी वो किराएदार चाची और उनके पति भी सोए हुए थे और देर रात को करीब 12 बजे मैंने कुछ आहट को सुना। अब मैंने सुना कि मेरी वो चाची अपने पति से बड़ी ही धीमी आवाज में कुछ बातें कर रही थी। दोस्तों मुझे अब एकदम साफ सुनाई दिया वो अपने पेटीकोट को ऊपर करके, मेरे चाचा को उनकी चुदाई करने के लिए कह रही थी, लेकिन उनके पति को चुदाई करने से ज़्यादा पैसे कमाने में ज्यादा रूचि थी। अब चाचा ने उनके पेटीकोट को नीचे करके उनकी चूत को वापस ढक दिया था। उनको चुदाई करने के उस काम में बिल्कुल भी रूचि नहीं थी। फिर मैंने उन दोनों का वो नाटक देखकर मन ही मन सोचा कि उनके पति को सेक्स में कोई रूचि नहीं है और मेरे हिसाब से वो छक्के थे। दोस्तों क्योंकि जिस आदमी का लंड अपने पास लेटी औरत जो अपनी चुदाई करने के लिए तैयार है, उसकी चूत को देखकर खड़ा ना हो उस मर्द को हम छक्का कहे तो कोई गलत बात नहीं है। दोस्तों जैसा कि आप सभी लोग जानते है कि में अपने घर में अकेला ही रहता हूँ और मेरे परिवार के सदस्य कहीं और रहते है और में अपने घर की देखभाल के लिए यहीं पर अकेला रहता हूँ।

दोस्तों उसके बाद मेरी चाची अपनी चुदाई के लिए तरसती अपनी प्यासी चूत को लिए सो गई और में भी उनको देखकर कुछ बातें सोचते हुए सो गया, लेकिन अब मेरी सोच उनके लिए बिल्कुल बदल चुकी थी और में उनकी उस मजबूरी, उस अधूरेपन और उस कमी को बहुत अच्छी तरह से समझ चुका था और अब में उसकी चुदाई के सपने विचार बनाने लगा था और वही बातें सोचकर मुझे पता नहीं कब नींद आ गई। अब में अपनी चाची के साथ बहुत हंसी मजाक बातें करके हमारे बीच की दूरी को कम करने लगा था और अब में हर समय उनकी चुदाई के सपने देखने लगा था। फिर दो दिन के बाद भगवान ने मेरे मन की बात को सुनकर मुझे एक बहुत ही अच्छा मौका दे दिया और मेरी अच्छी किस्मत से मेरी चाची के पति उनकी खेती के काम से अपने गाँव चले गये। अब पूरे घर में सिर्फ़ में और मेरी चाची ही थी और में मन ही मन दोनों को पूरे घर में अकेला देखकर बहुत खुश था, क्योंकि हम दोनों के मन के अंदर सेक्स की वो भूख एक जैसी थी, लेकिन हम दोनों में से कोई भी अपने मन की उस बात को खुलकर किसी को बता नहीं पा रहे थे और हम दोनों चुप ही रहे।

दोस्तों किसी बात को सोचकर में शांत ही रहा, मेरी बिल्कुल भी हिम्मत नहीं हुई। वैसे मेरे मन में आगे बढ़ने की बहुत इच्छा थी और फिर रात को करीब आठ बजे अचानक से बिजली भी चली गई, जिसकी वजह से मुझे गरमी ज्यादा महसूस होने पर में हर बार की तरह में उस रात को भी छत पर जाकर लेट गया था। फिर कुछ देर बाद मेरी चाची भी ऊपर आ गई और मेरे बिस्तर से थोड़ी दूरी पर ही चाची ने भी अपना बिस्तर लगा लिया, जहाँ से में उनको उस हल्के अंधेरे में भी साफ देख सकता था। अब हम दोनों में से किसी को नींद नहीं आ रही थी और हम ऐसे ही इधर उधर करवटे बदल रहे थे, लेकिन मुझे यह भी बहुत अच्छी तरह से पता था कि अगर चाची को एक बार खुलकर अपने मन की बात के बारे में बता दिया जाए तो वो बड़े आराम से तैयार हो सकती थी। फिर मैंने यह बात अपने मन में सोचकर हिम्मत करके बिना समय गंवाये अपने हाथ से चाची के हाथ को थोड़ा छू लिया, लेकिन वो मुझसे कुछ नहीं बोली और वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा दी। अब में तुरंत समझ गया कि मेरा सोचना समझना एकदम ठीक वैसा ही निकला। उनको मेरे छूने की वजह से किसी भी तरह की कोई भी आपत्ति नहीं है, जिसका मतलब साफ था कि उनके में भी वही सब चल रहा है?

अब जो मेरे मन में भी था, में उनके थोड़ा सा पास गया और फिर उनके बिल्कुल नज़दीक चला गया जहाँ से हम एक दूसरे की उस गरम गरम तेज गति से चली रही सांसो को बहुत आराम से महसूस कर रहे थे। फिर मैंने सही मौका देखकर अपना एक हाथ उठाकर उनकी कमर पर रख दिया और उनके कूल्हे में चिकोटी काटी, लेकिन वो अब भी शांत ही रही। अब तक बिजली आ चुकी थी और फिर उसी समय चाची ने मुझे इशारे से अपने साथ नीचे चलने को कहा। अब में खुश होकर तुरंत तैयार हो गया और फिर वो मुझे सीधे नीचे अपने बेडरूम में लेकर जा पहुंची और वहां पर पहुंचते ही वो मुस्कुराती हुई अपनी साड़ी के पल्लू को अपनी छाती से हटाने लगी, लेकिन मैंने उन्हे ऐसा करने से रोक दिया और उन्हे एक कटोरी में तेल लाने को कहा और वो झट से जाकर तेल लेकर आ गई। अब मैंने उन्हे अपनी बाहों में भरकर बिस्तर पर लेटा दिया और फिर में उनके पेटीकोट को ऊपर करके उसके अंदर घुसने लगा।

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