चुदवाकर कुंवारी लड़की को बुखार हुआ

अब कोमल से कंट्रोल नहीं हो रहा था तो उसने मुझे पकड़ा और ज़ोर – ज़ोर से मेरे होंठ चूसने लगी. करीब 2 मिनट तक होंठ चूसने के बाद उसने मेरे होंठों को छोड़ा. फिर मैंने कोमल की कमर के नीचे तकिया लगाया और फिर उसकी टाँग को ऊपर की ओर उठा दिया और लंड को उसकी चूत पर लगाने ही जा रहा था कि उसने अपनी चूत पर हाथ रख लिया और बोली, “अबन, ये मेरा पहली बार है आराम से करना”…

हेलो दोस्तों, मेरा नाम अबन है और मैं 26 साल का हूँ. अभी मैं दिल्ली मे रहता हूँ और अन्तर्वासना का मैं पिछले 4 साल से पाठक हूँ. ये जो लेनी मैं आप लोगों के बीच में रख रहा हूँ ये मेरी पहली और सच्ची कहानी है अगर इसे लिखने में मुझसे कोई गलती हो गई हो तो मुझे माफ़ कर देना.

बात 2 साल पहले की है जब मैं पश्चिम बंगाल की एक कंपनी में काम करता था. कंपनी ने मुझे एक छोटे शहर में कमरा दे रखा था. रोज़ मैं सुबह 10 बजे कंपनी जाता और शाम ५ बजे वापस आ जाता था.

मेरे मकान मलिक की एक बेटी थी. जिसका नाम कोमल (बदला हुआ ) था. वो 21 साल की गोरे रंग की खूबसूरत लड़की थी. उसका सीना 34 कमर 26 और चूतड़ 34 के थे. कोमल की शक्ल और उसके फिगर को देख कर किसी भी लड़के का लंड अपने आप खड़ा हो जाए. कुल मिलाकर वह एक जबरदस्त माल थी.

एक दिन मैंने देखा कि वो मुझे गौर से देख रही है. उस दिन मैंने ध्यान दिया तो देखा तो मैंने पाया कि उसकी नज़रें मेरी जीन्स के ऊपर से मेरे लन्ड का मुआयना कर रही थीं. ऐसे देखते – देखते 2 महीने बीत गये और वो लगभग हर रोज़ ही मेरे लंड को जीन्स के ऊपर से ही देखती थी. फिर किया था, एक दिन मैंने सोच लिया कि अब इसका तो कुछ ना कुछ करना ही पड़ेगा.

एक दिन जब मैं शाम को कंपनी से लौट रहा था, उस समय वो बाज़ार जा रही थी. बाजार जाते समय वह मुझे सुनसान रास्ते में मिली. रास्ते में काफी अंधेरा था तो मैंने सोचा कि अब मुझे इससे अच्छा मौका नहीं मिलेगा. फिर यही सोच कर मैंने कोमल को पकड़ लिया और ज़ोर से बाहों में भर लिया.

अब कोमल गुस्से में मुझसे बोली, “ये क्या कर रहे हो?” तो मैं बोला, “जो करना चाहिए वही कर रहा हूँ.” यह सुन कर कोमल बोली, “ये बहुत ग़लत है”. तो मैं बोला, “मैं कुछ करूं तो गलत और तुम जो मुझे रोज़ देखती हो वो सही है”. फिर कोमल बोली, “छोड़ो मुझे, कोई देख लेगा”. तो मैं बोला, “पहले मिलने का वादा करो, तब मैं जाने दूँगा”. तो वो बोली, “अच्छा ठीक है, बाद में मिलती हूँ”. मैं बोला, “कब?” तो वो बोली, “किसी दिन समय देख कर मिलूंगी”. अब मैं बोला, “पहले वादा”. वो बोली, “अच्छा ठीक है, एक हफ्ते बाद”.

एक हफ्ते बाद उसका छोटा भाई, मम्मी और पापा किसी रिश्तेदार की शादी में कोलकाता चले गये लेकिन वो अपने बूढ़े दादा जी का ख्याल रखने का बहाना कर के शादी में नहीं गयी. उस दिन शाम को जब मैं कंपनी से लौटा तो उसने मुझे एक पर्ची फेंक कर दी. उस पर्ची मे लिखा था ‘रात को 11 बजे छत पर मुझसे मिलना’.

उसे पढ़ कर मैं बहुत खुश हुआ और रात के 11 बजे का इंतजार करने लगा. फिर वो घड़ी आ ही गयी. जब मैं ऊपर छत पर गया तो वो पहले से ही छत पर खड़ी थी. फिर मैंने पीछे से जाकर उसे अपनी बाहों में भर लिया और उस के कान के पास मुंह ले जाकर बोला, “मैं, तुम से बहुत प्यार करता हूँ”. तो वो बोली, “मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ”.

फिर मैं पीछे से ही उसकी चूची को धीरे – धीरे मसलने लगा. अब थोड़ी देर में मेरा लंड खड़ा हो गया और लंड कोमल के चूतड़ की दरार मे उसे महसूस हुआ तो वो पलटी और बोली, “नहीं, आज नही”. तना लंड देख कर उसने सोचा कि कहीं आज मेरा उसको चोदने का इरादा तो नहीं है.

अब मैं बोला, “ऐसा कुछ नहीं है”. फिर इतना बोल कर मैं लगा रहा और उसकी मस्त चूची को हल्के – हल्के सहलाता रहा. फिर मैं धीरे – धीरे उसके होंठ भी चूसने लगा. अब थोड़ी देर बाद वो मस्त होकर सिसकने लगी. फिर भी मैंने उसे अपने बदन से पूरा चिपका कर लगा रहा.

अब जब कोमल से नहीं रहा गया तो बोली, “अच्छा जो भी करना है जल्दी करो, मुझे अजीब सा लग रहा है”. तो मैं बोला, “मेरे कमरे में चलो”. वो तैयार हो गई. फिर मैं उसे अपने कमरे में लेकर आया और कमरे में कोमल को लिटा दिया और उसका सूट – सलवार उतार दिया और फिर मैंने अपने कपड़े भी उतार दिए.

अब कोमल से कंट्रोल नहीं हो रहा था तो उसने मुझे पकड़ा और ज़ोर – ज़ोर से मेरे होंठ चूसने लगी. करीब 2 मिनट तक होंठ चूसने के बाद उसने मेरे होंठों को छोड़ा. फिर मैंने कोमल की कमर के नीचे तकिया लगाया और फिर उसकी टाँग को ऊपर की ओर उठा दिया और लंड को उसकी चूत पर लगाने ही जा रहा था कि उसने अपनी चूत पर हाथ रख लिया और बोली, “अबन, ये मेरा पहली बार है आराम से करना”.

तो मैं बोला, “ठीक है, भरोसा रखो” और फिर मैंने उसका हाथ पकड़ के चूत से हटा दिया और धीरे से अपने लंड को चूत पर रख कर बहुत आराम – आराम से दबाने लगा. तब मुझे बहुत ही खूबसूरत एहसास हो रहा था. जैसे – जैसे मेरा लंड अंदर जा रहा था वैसे – वैसे उसकी चूत की परत ऐसे खुल रही थी जैसे कि गोंद से चिपका कागज अलग हो रहा हो.

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