दादा पोता ने पंजाबन की चूत चोद दी

मुझे भी अलग अलग तरीके से चुदवाने में मज़ा आता है इसलिए मैंने झट से अपनी 36 इंच चौड़ी गांड को ऊपर उठा दिया. मैंने अपने सिर को तकिये के ऊपर रख दिया और अपनी कमर को भी नीचे के तरफ झुका दिया. इससे मेरे दोनों बड़े बड़े चूतड़ दोनों तरफ फैल गए और मेरी चूत और गांड का छेद विकास के सामने आ गया. विकास ने मेरी गांड को अपने हाथों में पकड़ कर प्यार से सहलाया और फिर मेरी खुली हुई चूत के अन्दर अपना लोहे की रॉड जैसा लंड घुसेड़ दिया.

मोटा लंड अन्दर जाते ही मेरे मुँह से सिसकारियां निकलनी शुरू हो गईं और मैं आहें भरती हुई विकास के लंड से अपनी चुदाई करवाने लगी.

मगर तभी मेरी नज़र खिड़की पर पड़ी और हमें अपनी चुदाई बीच में ही छोड़नी पड़ी.

दरवाजे को लात मारते हुए दादा जी ने विकास को आवाज दी- अरे नालायक दरवाजा खोल … वरना तेरी टांगें तोड़ कर रख दूँगा.

विकास भी बुरी तरह कांप रहा था और वो अपने कपड़े तलाश करने लगा. मगर इतनी देर तक दादा जी दरवाजे पर कम से कम दस बार लात मार चुके थे. विकास अपना अंडरवियर ही पहन पाया था और उसे दरवाजा खोलना पड़ा.

मैं भी मुश्किल से अपनी पैंटी ही पहन पाई थी और बाकी का बदन मुझे वहां पड़ी एक चादर से ही ढकना पड़ा. मैं बेड के दूसरे कोने में जाकर बैठ गयी.

विकास ने दरवाजा खोला तो दादा जी गुस्से से अन्दर आते हुए विकास पर चिल्लाए- अरे नालायक … तुझे शरम नहीं आई यह सब कुछ करते हुए.. तेरी उम्र अभी पढ़ने लिखने की है और तू यह सब कुछ कर रहा है?
विकास डर के मारे कुछ भी नहीं बोल पा रहा था, मगर दादा जी उस पर गुस्से से चिल्ला चिल्ला कर बहुत कुछ बोले जा रहे थे.

दादा जी ने फिर गुस्से से चिल्लाते हुए कहा- यह तो अच्छा हुआ कि तुम्हारी दादी ने मुझे गांव से तुम्हारे पास रहने के लिए भेज दिया और तुम्हारी ऐसी हरकतों का मुझे पता चल गया. अब आने दो तुम्हारे माँ-बाप को … तुम्हारी अच्छे से पिटाई करवाता हूँ.

तभी दादा जी ने मेरी तरफ देखा और फिर गुस्से से मेरी तरफ बड़े- अब तू बता … तू कौन है? और तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई हमारे बच्चे के साथ यह सब करने की?
ऐसे ही चिल्लाते हुए दादा जी ने मुझे बाजू से पकड़ा और खड़ी कर दिया. मैं पेंटी में अपने सीने से लगाई हुए चादर को संभालते हुए दादा जी को सॉरी बोलने लगी.

मगर दादा जी ने मुझे बाजू से पकड़े हुए ही दूसरे हाथ से मेरी चादर को खींच कर नीचे गिरा दिया और मुझे बाहर की ओर धकेलते हुए बोले- चल अब ऐसे ही अपने घर जा … तुझे कोई कपड़ा नहीं मिलेगा.
मगर मैं दादा जी के सामने हाथ जोड़ते हुए और साथ ही अपने चुचों को छिपाने की कोशिश करती हुई बोली- दादा जी, प्लीज़ मेरे कपड़े दे दीजिए. मैं आगे से विकास से कभी नहीं मिलूंगी.

विकास भी दादा जी के सामने हाथ जोड़ने लगा और माफी माँगने लगा.
मगर दादा जी ने गुस्से से कहा- अभी करता हूँ माफ़, तू चल पहले बाहर का मेन दरवाजा बंद करके आ!
दादा जी ने विकास को उंगली से इशारा करते हुए कहा.

विकास ने जल्दी से अपनी पैंट पकड़ी और बाहर की तरफ भाग गया.

दादा जी ने मेरी तरफ गुस्से से देखा और मुझे बांहों से पकड़ कर बेड पर गिरा दिया और बोले- चल अब तुझे करता हूँ माफ़… वे ये कहने के साथ ही खुद भी मेरे ऊपर लेट गए.

मैं कुछ बोल पाती, उससे पहले ही दादा जी ने मेरे होंठों को अपने मुँह में ले लिया और मेरे होंठों को चूसना शुरू कर दिया. दादा जी लंड उनकी धोती में से मुझे मेरी चूत पर महसूस होने लगा था.. मैं समझ गयी थी कि दादा जी अब मेरी चुदाई करके ही मुझे माफ़ करेंगे. मैं उनको बिना रोके टोके उनका साथ देने लगी. वैसे भी जितना दादा जी मुझे पहले डरा चुके थे, उससे अब मैं कुछ भी बोलने से डर रही थी कि कहीं दादा जी को मना किया तो मुझे पकड़ कर नंगी हालत में बाहर ही ना निकाल दें इसलिए मैं चुपचाप उनका साथ देने लगी.

दादा जी ने अपनी धोती उतार कर फेंक दी और मैंने भी उनका साथ देते हुए उनका कुर्ता ऊपर को निकाल दिया.

दादा जी की सफेद और काले बालों से भरी छाती, मेरे गोरे मुलायम चुचों पर रगड़ने लगी. मैं भी अपने चुचे उछाल उछाल कर उनके सीने से रगड़ने लगी. फिर दादा जी ने मेरी बांहें छोड़ कर मेरे चुचों को पकड़ लिया और उनको ज़ोर ज़ोर से दबाते हुए मेरी पेंटी के ऊपर से ही अपने लंड को दबाने लगे.
वैसे तो अभी दादा जी भी कच्छा पहने हुए थे.. मगर उनका लंड एकदम टाइट हो चुका था और किसी असली मर्द का लंड महसूस हो रहा था.

तभी विकास भी दरवाजा बंद करके अन्दर आ गया और दादा जी को मेरे ऊपर चढ़े देख भौंचक्का देखता रह गया.
दादा जी ने भी उसकी तरफ देखा और बोले- कर दिया दरवाजा बंद.. चल अभी दूसरे कमरे में बैठ.. तुझको बुलाता हूँ बाद में.
विकास भी बिना कुछ बोले चुपचाप कमरे से मेरी तरफ देखता हुआ बाहर चला गया.
मैंने भी उसको ऐसे जाते देख एक हल्की से स्माइल दे दी.

अब दादा जी मेरे ऊपर से उठे और मेरी दोनों टाँगों के बीच बैठते हुए मेरी पेंटी को खींच कर उतार दिया और फिर अपना भी कच्छा उतार कर खुद घुटनों के बल बैठ गए. उन्होंने मुझे भी मेरे हाथों से पकड़ कर बिठा दिया. फिर जाने उनको क्या सूझा, उन्होंने मुझे खींच कर अपनी तरफ मुँह करके मुझे अपनी जांघों पर बिठा लिया. ऐसा करने से मेरी चूत दादा जी के लंड के साथ टकरा गयी. दादा जी मेरी कमर के पीछे से अपने हाथ डाल कर मुझे अपने साथ सटा लिया और फिर मेरे दोनों चुचों को बारी बारी अपने मुँह में लेकर चूसने लगे. साथ ही वे अपने हाथ मेरी पीठ और मेरे बिखरे हुए बालों में घुमाने लगे.

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