दादा पोता ने पंजाबन की चूत चोद दी

मैं भी उनकी पीठ पर अपने हाथ घुमाने लगी और अपने नाख़ून भी उनकी पीठ पर गड़ाने लगी. दादा जी का लंड एकदम सख्त होकर मेरी चूत के दाने से रगड़ खा रहा था. मैं इतनी गर्म हो चुकी थी कि मेरी चूत से पानी की बौछार हो रही थी जिससे दादा जी का लंड भी भीग चुका था. मगर दादा जी मेरी चूत में अपना लंड ना डाल कर मुझे बुरी तरह से तड़पा रहे थे. इसलिए मैंने खुद ही अपने चूतड़ों को थोड़ा ऊपर उठा कर अपनी चूत को दादा जी लंड के ऊपर सैट किया और फिर धीरे धीरे उनके लंड पर अपना वजन डाल कर बैठने लगी.

मेरी इस अदा से दादा जी के मुँह से ‘आआह्ह्ह..’ की आवाज़ निकल गयी और उन्होंने भी अपनी कमर को अकड़ाते हुए अपना लंड सीधा मेरी चूत में धकेल दिया. इससे मेरे मुँह से भी कामवासना से भरी सिसकारियां निकलनी शुरू हो गईं. दादा जी का पूरा लंड मेरी चूत के अन्दर घुस गया.

अब दादा जी ने कहा- अरे वाह मेरी रानी.. तूने तो एक ही बार में पूरा लंड निगल लिया.
मैंने दादा जी की आँखों में देखा और कहा- आप तो इतना तड़पा रहे थे अपनी रानी को … इसी लिए आपकी रानी ने पूरा एक साथ ही निगल लिया.
फिर दादा जी मेरी तरफ देख कर मुस्कराए और बोले- सच में रानी … मुझे नहीं पता था कि तुझमें इतनी तड़प है.. वरना कब से डाल दिया होता.
मैंने कहा- दादा जी.. अभी तो बहुत तड़प बाकी है.. वो भी आपसे ही पूरी करवानी है.
दादा जी ने कहा- अच्छा.. तो फिर यह लो रानी.. जितनी मर्ज़ी, तड़प पूरी करो..

ये बोलते हुए दादा जी ने मुझे कमर से कस के पकड़ते हुए नीचे से ज़ोर का धक्का लगा दिया. मेरे मुँह से ‘आह्ह्ह्ह..’ की तेज आवाज़ निकल गयी और मैं भी अपनी कमर को हिलाने लगी.

मैं दादा जी जांघों पर उनकी गोद में बैठी अपने चूतड़ हिला हिला कर उनका लंड अपनी चूत के अन्दर बाहर करने लगी. दादा जी भी मेरी पतली कमर में से अपने हाथ डाले हुए मेरे बदन को मसलने लगे और अपने चेहरे को मेरे चुचों के ऊपर रगड़ने लगे.

मैंने पूरी तरह से अपने आप को दादा जी की बांहों के हवाले करते हुए आंखें बंद कर लीं और फिर अपनी बांहें ऊपर उठा कर अपने बालों में हाथ घुमाते हुए पीछे की तरफ झुक गयी, जिससे मेरी चूत का दबाव दादा जी के लंड के ऊपर और ज़्यादा बढ़ गया. मैं पूरी तरह से मदहोश हुई दादा जी का लंड झटकों के साथ अपनी चूत के अन्दर बाहर करने लगी. दादा जी भी अपने लंड को अकड़ाए हुए ज़ोर ज़ोर के धक्के मेरी चूत में लगा रहे थे. मेरी मादक सिसकारियां पूरे कमरे में गूँज रही थीं. दादा जी भी मुझे चोदने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे.

लंड चूत के अन्दर ही डाले हुए दादा जी ने कुछ देर के बाद मुझे पीछे को करते हुए बेड पर लिटा दिया और खुद मेरे ऊपर आ गए.

अब दादा जी ने मेरी दोनों टाँगों को पकड़ कर ऊपर की तरफ उठा दिया और फिर अपने लंड पर अपना पूरा वजन डाल कर लंड मेरी चूत के अन्दर बाहर करने लगे. इस आसन से उनका पूरा लंड मेरी चूत की जड़ तक चोट करने लगा था. मेरे मुँह से सिसकारियां निकलनी और भी तेज हो गयी थीं.

उधर दादा जी ज़ोर ज़ोर के धक्के मारते हुए बोल रहे थे- आह. ले रानी.. खूब चिल्ला मेरी रानी.. और ज़्यादा चिल्ला.. तू जितना चिल्लाएगी.. उतना ही मेरा लंड तुझे ज़्यादा चोदेगा… आह ले!
दादा जी के मुँह से ऐसी बात सुनकर मैं और भी ज़्यादा चिल्लाने लगी और ज़ोर ज़ोर से आहें भरने लगी. इससे दादा जी ने भी अपनी चुदाई की रफ़्तार बढ़ा दी. मुझे भी ज़्यादा मज़ा आने लगा. सच में यह मेरा पहला अनुभव था कि ज़्यादा चिल्लाने से चुदाई में ज़्यादा मज़ा आता है. मैं भी ज़्यादा से ज़्यादा मज़ा लेना चाहती थी.

दादा जी ने मुझे करीब बीस मिनट तक चोदा और फिर मेरी चूत के अन्दर ही उन्होंने अपना लावा छोड़ दिया. मैं भी बुरी तरह से थक चुकी थी.. और दादा जी से पहले ही झड़ चुकी थी. दादा जी का वीर्य मेरी चूत में उनके तेज तेज झटकों से निकल रहा था. वो इस वक्त मुझे इतना कस के पकड़े हुए थे कि मेरा हिलना भी मुश्किल था. इसलिए मैं भी अपनी चूत के अन्दर उनका हर एक झटका मजबूती से झेल रही थी.

आख़िरकार दादा जी का पूरा माल मेरी चूत में निकल गया और दादा जी ने मुझ पर से भी अपनी पकड़ ढीली कर दी. फिर वे मेरी चूत में लंड डाले हुए ही मेरे ऊपर लेट गए मगर अभी भी उनके हाथ मेरे बालों और मेरे बदन पर ऐसे घूम रहे थे जैसे अभी उनकी प्यास पूरी नहीं हुई हो और वो दूसरे राउंड के लिए खुद को तैयार कर रहे हों.

मगर उनका लंड धीरे धीरे ढीला होकर मेरी चूत से बाहर फिसल रहा था. मैं भी बुरी तरह से थकी हुई थी. दादा जी भी अपने लंड को तैयार ना देख कर मुझ पर से लुड़क कर बेड पर लेट गए.

अभी हम दोनों को लेटे हुए पाँच मिनट ही हुए थे कि विकास भी कमरे में आ गया और दादा जी से हिचकिचाते हुए बोला- दादा जी.. अब्ब्.. अब आअ.. आप दूसरे क..क्क्क….कमरे में चले जाइए..
दादा जी ने उसकी तरफ देखा और बोले- मैं कहीं नहीं जाऊंगा.. तूने जो करना है मेरे सामने कर!
अपने दादा जी के सामने विकास कुछ भी बोल नहीं पाया और वो अपनी पैंट और अंडरवियर उतार कर मेरे पास आक़र लेट गया. मैं तो पहले से ही नंगी लेटी हुई थी. विकास मेरे ऊपर आकर लेट गया और मुझसे लिपट कर मेरे बदन को मसलने लगा.

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