दीदी ने नौकर से चुदवाई अपनी चूत

indian porn stories, desi sex kahani , chodan आज मैं आपको अपनी बड़ी बहन की सत्य कथा लिख के भेज रहा हूँ। यह कथा है एक उदासीन जीवन गुजार रही एक नवयौवना की, जिसने अपने बचपन से यौवन तक इतना ज्यादा एकाकीपन झेला था कि उससे निपटने का रास्ता उसने खुद ही ढूँढ लिया। अब आप लोग ही बताना कि यह सही था या गलत?

मेरा नाम अशोक है, मुंबई में रहता हूँ, उम्र 21 साल है। मेरे घर में कुल चार लोग हैं- मैं, मेरे माता पिता और मेरी बड़ी बहन। माता-पिता दोनों ही एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी में अच्छे पद पर हैं। मेरे घर में पैसे की कोई कमी नहीं है। नौकर-चाकर, गाड़ी और शानो-शौकत की हर चीज़ हमारे घर में है।

मेरे माता पिता हम दोनों भाई-बहन को समय नहीं दे पाते थे। इसलिए मुझे बचपन में ही बोर्डिंग में पढ़ने भेज दिया गया था। जबकि मेरी बड़ी बहन रश्मि मुंबई में रह कर ही पढ़ी है। दीदी की उम्र 25 साल है। वो हमेशा से ही अन्तर्मुखी रहने वाली और बहुत ही फेशनेबल है। उसके कोई खास सहेली या दोस्त नहीं थे और यह बात मुझे उसमें अजीब लगती थी।

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मगर मुझे इसकी वजह तब समझ आ गई, जब मुझे यह पता लगा कि दीदी के हमारे घर के सभी नौकरों के साथ शारीरिक-सम्बन्ध हैं। बात कई साल पहले की है, जब दीदी 18-19 के करीब होंगी। दीदी उस समय किसी पूर्णतया जवान कन्या जैसे शरीर की मालकिन थी। उनका कद 5’5″ और फिगर एकदम बढ़िया थी। मैं गर्मी की छुट्टियों में मुंबई आया था। दिन भर मुंबई की सैर की, फिर रात को दीदी के साथ खाना खाकर अपने कमरे में सोने चला गया।

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दस मिनट गुजरे होंगे, मुझे दीदी के कमरे से किसी आदमी की आवाज़ आई। दीदी का कमरा और मेरा कमरा सटा हुआ ही था। मुझे बड़ा अजीब लगा, क्योकि पापा तो थे नहीं, फिर दीदी इतनी रात को किस से बात कर रही है? मैंने सोचा कि शायद टीवी चल रहा है, मगर मुझे दीदी की दबी हुई चीख और कुछ हंसने खिलखिलाने की आवाज़ आई, तो मेरे अन्दर कीड़ा काटने लगा, आखिर दीदी किस से बात कर रही है? मेरे और दीदी के कमरे के बीच में एक खिड़की थी। मैंने एक स्टूल दीवार के पास लगा लिया और स्टूल पर चढ़ गया। अन्दर का दृश्य देख कर मेरे होश फाख्ता हो गए।

मैंने देखा कि हमारे घर का एक नौकर जावेद दीदी के बिस्तर पर अधनंगी अवस्था में लेटा है और दीदी उसकी कमर के ऊपर दोनों ओर पैर करके सवार है और बेतहाशा जावेद के शरीर को चूमे जा रही है। मैं इतना नादान नहीं था कि यह क्या चल रहा है, समझ न पाता।

जावेद के हाथ दीदी की टी-शर्ट के अन्दर थे और उनकी छातियों से खेल रहे थे। मुझे गुस्सा आया मगर मैं कुछ बोल न पाया क्योंकि मैं यह समझता था कि यह दीदी की रजामंदी से हो रहा है और न ही वो नादान है। शायद दीदी ने अपने अकेलेपन को इन्हीं नौकरों के साथ गुजारा था, इसलिए वो इन सब चक्करों मे पड़ गई होगी।

मैं चुपचाप उनके खेल को देखने लगा। दीदी ने जावेद के सर को पकड़ रखा था और अपने होठों को जावेद के होठों से चिपका कर चूमे जा रही थी। जावेद भी उतनी ही जोर से उन्हें अपने बदन से चिपटाए हुए था। दीदी उसके होठों, माथे, गर्दन को चूमते हुए छाती की ओर आ गई। जावेद की छाती के घने बालों को सहलाते हुए चूमते चूमते वो पेट की तरफ पहुँच गई।

फिर दीदी जावेद के ऊपर से उठ गई और उसने जावेद की तरफ देख कर हल्की रहस्यमयी मुस्कान दी। जावेद ने भी मुस्कुराते हुए दीदी की तरफ देखा। दीदी ने अपने हाथों से जावेद का अंडरवियर उतार कर उसे नंगा कर दिया, फिर उसके लिंग को पकड़ लिया।

जावेद के लिंग को देखकर मैं आश्चर्यचकित रह गया। जावेद का लिंग करीब 9 इंच लम्बा और 2 इंच मोटे व्यास का था। दीदी ने उसके लिंग और अंडकोष को प्यार से सहलाया। दीदी के हाथ के स्पर्श से ही उसके शिथिल लिंग में कसाव बढ़ गया। दीदी ने मुस्कुराते हुए लिंगमुंड को चूमा। फिर दीदी ने तुरंत उसका लिंग-मुंड अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसने लगी।

मैं विश्वास नहीं कर पा रहा था, मैंने अपने दोस्तों से सुना था कि लड़कियाँ इस तरह से मुखमैथुन करती हैं, वो कहते थे कि लड़कियों को ऐसा करना अच्छा लगता है, मगर मैं उनकी बातों को मजाक समझता था। मगर दीदी को इस तरह से करते हुए देख मुझे यकीन हो गया कि सच में उसे मजा आ रहा है।

दीदी उसके लिंग को मुँह के अन्दर लेते हुए ऊपर नीचे सर को चलाने लगी। जावेद का लिंग उनकी लार से सन गया था और चमकने लगा था। उसके लिंग की नसें तन गई थी। दीदी उसके आधे लिंग को मुँह में अन्दर लेकर चूसती थी फिर लिंग मुंड को चूसती थी। उसका लिंग मुंड लाल रसभरी की तरह फूल गया था।

जावेद ने दीदी के सर पर हाथ रख कर सर को लिंग की तरफ दबाया ताकि दीदी और ज्यादा लिंग को मुँह के अन्दर ले ले। मगर दीदी को खांसी आ गई। दीदी ने लिंग को मुँह से बाहर निकाल कर ‘नहीं’ की मुद्रा में सर हिलाया तो जावेद ने अपनी जिद छोड़ दी।

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