पी ले बेटा मेरी जवानी की दूध को !! ललित बेटा तू मस्त पेलता है रे

हाय फ्रेंड्स मेरा नाम सिम्मी है। मैं अकबरपुर में रहती हूँ। मै देखनें मे बहत गजब की माल लगती हूँ। मेरी उम्र 32 साल है। मै एक दम भूरी गोरी हूँ। मेरे बाल बहुत ही ज्यादा सिल्की है। मै किसी हीरोइन से कम नहीं हूँ। मेरा गोल गोल मुखड़ा बिल्कुल चाँद की तरह चमकीला है। मेरी आँखे बहुत ही नशीली लगती है। एक बार नजर उठाके देख लू तो आशिको की लाइन लग जाती। मै ज्यादा अमीर घर की तो नहीं थी। लेकिन फिर भी बहुत अमीर अमीर घरानों से मेरे लिए रिश्ते आते रहते थे। आखिरकार मेरी शादी हो ही गयी। मै एक अच्छे घर की बहू हो गयी। लेकिन मेरे को जैसा मर्द चाहिए था। वो मेरे को नहीं मिल सका। मेरा हसबैंड साला एक नंबर का गांडू था। उसका लंड छोटा और बेकार था। मेरे को उसके लंड से खेलने में मजा ही नहीं आ रहा था। फिर भी शादी के बाद मिला हसबैंड का लंड स्वीकार ही करना पड़ा। मेरा घर शहर में था। कई कॉलेज मेरे घर से नजदीक भी थे। दूर के लड़के रूम लेकर वही पर रहते थे। मेरे हसबैंड ने भी नीचे के सारे कमरे लड़को को दे दिया था। मै ज्यादा खुश तो नहीं थी।

लेकिन फिर भी उस छोटे लंड के आदमी के साथ अपनी जिन्दगी काट रही थी। रात में मेरे हसबैंड देर से आते थे। मै भी कुछ देर तक उनके लंड से ही खेल पाती थी। मैं अपनी चूत में ऊँगली कर करके काम चला रही थी। जिस दिन वो घर पर नही रहते थे। मै बैगन चूत में घुसाकर काम चलाती थी। लेकिन लंड को खाने में जो मजा था। वो बैगन और मूली में कहाँ था। मेरे यहां अक्सर नए नए लड़के रूम लेने के लिए आया करते थे। ऐसा ही कुछ एक दिन हुआ जब मैने एक लड़के को देखा जो की मेरे कॉलेज के बॉयफ्रेंड के जैसा था। एक बार तो मेरी आँखे धोखा खा गयी। मै उसी के यादो में खो गयी। लेकिन क्या इत्तेफाक था वो.. नाम भी उस लड़के का मेरे बॉयफ़्रेंड का था। ईश्वर इतनी सिमिलेरटी किसी को दे सकता है। मैंने कभी सपने में भी कल्पना नहीं की किया था। उसका नाम नागेंद्र था।
मेरी चूत में उसे देखते ही खुजली होने लगी। वो मेरे घर में रूम के लिए आया हुआ था। नीचे के सारे रूम पहले से किराए के लिए उठे हुए थे। लेकिन मेरे रूम के पास में ऊपर एक रूम खाली था। नागेंद्र बहुत ही ज्यादा विनती के साथ रूम के लिए कह रहा था। फिर भी मेरे हसबैंड न.. न. कर के बातो को टाल रहे थे। लेकिन जब मैंने उनसे कह कर उनको रूम देंने के लिए कहा। तो वो मना भी नहीं कर पाए। उन्होंने उनको रूम दे दिया। वो अकेले ही रूम में रहता था। वो मेरे घर में घुल मिल गया था।

वो अक्सर मेरे हसबैंड के साथ बात करते हुए मेरे को ताड़ता रहता था। मैं उसकी नजर ही देखती रहती थी। वो मेरी चूचे को ही ज्यादा लाइक करता था। मैं जब भी उसे देखती तो उसकी नजर मेरे चूचे के ऊपर ही रहती थी। मै भी मजे लेने के लिए उसे अपने रूम में बुला लेती थी। जब मेरे हसबैंड बाहर होते थे। तो मैं उसे अपने कमरे में बुलाकर मजे लिया करती थी। बात करने में वो मुझसे बहुत ही ज्यादा फ्रैंक हो गया था। हर तरह की अच्छी बुरी बातें मेरे से कर रहा था। एक दिन उसके बॉथरूम की पाइप ब्लॉक हो गयी थी। उसके बॉथरूम में पानी नहीं आ रहा था। वो मेरा बॉथरूम यूज़ करने के लिए मेरे से कहने लगा। वो मेरे को भाभी कहता था।

“भाभी मै आपका बॉथरूम यूज़ कर सकता हूँ” नागेंद्र ने कहा
“हाँ क्यों नहीं तुम मेरा सब कुछ यूज़ कर सकते हो” मैने मुस्कुराते हुए कहा

अंदर बॉथरूम ने मेरी ब्रा और पैंटी टंगी हुई थी। मै भी नहाने ही जा रही थी। लेकिन उसे कॉलेज जाने की देरी हो रही थी। इसीलिए मैंने उसे ही पहले नहाने को कह दिया। वो नहाने के लिए अंदर घुसा। करीब आधा घंटा बाद वो अंदर से निकला। मै भी घर का काम काज निपाटा रही थी। कुछ देर बाद मैंने भी नहाने के लिए बॉथरूम में घुसी। नहाकर जब मैने अपनी ब्रा और पैंटी को उठाया तो वो मेरे को गीला लगा। मैंने सोचा की मेरे हाथ गीले रहे हो शायद इसीलिए ये गीला लग रहा हो! हिंदीपोर्न स्टोरीज डॉटकॉम लेकिन एक जगह पर दूध की तरह सफेद सफेद माल लगा था। नागेंद्र मेरी ब्रा पैंटी पर मुठ मार कर गया हुआ था। उसके माल की मदमस्त खुशबू को सूंघकर मै मदहोश हो गयी। जब वो कॉलेज से लौटकर आया। तो मैंने उसे अपने रूम में बुलाया। शाम के 6 बज रहे थे। वो डरता हुआ मेरे रूम के अंदर आया।

“क्या बात है नागेंद्र बड़ी सफाई से तुमने मेरी पैंटी पर अपना माल गिराकर उसे पोंछ कर चले गए थे।” मैंने कहा
वो अपना सर नीचे झुकाये अपराधियो की तरह खड़ा था। वो एक भी बार मेरे बातो का कोई जबाब नहीं दिया।
मै उससे सवाल करने लगी।
“मेरे को तुम पसंद करते हो। ये तो मेरे को पता था। लेकिन तुमने ऐसा क्यों किया कि मेरी ब्रा और पैंटी पर पाना माल गिरा दिया” मै मुस्कुराते हुए उससे पूँछ रही थी

जब उसने मेरे को मुस्कुराते देखा तो वो भी थोड़ा खुश हुआ।
“मेरा मन आपकी पैंटी से खेलने को किया तो मैंने खेल लिया। मेरा माल छूटने वाला था। आपकी पैंटी सामने थी। तो उसी पर गिर गया” उसने बहुत ही सफाई से कहा
इस तरह से कह रहा था। जैसे गलती उसकी नहीं जो उसने मेरी पैंटी पर माल गिराई। गलती मेरी थी जो पैंटी बॉथरूम में रख दी थी।
“तुम्हारा मन अगर पैंटी के अंदर रहने वाले सामान को देखने को करे तो वो भी तुम देख लोगे!!” मैंने मजाक करते हुए पूछा

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