एक अनोखी प्रेम कथा

मोहिनी ने एक कातिल मुस्कान फेरी और बोली- मैं तो बस तुम्हें तैयार कर रही थी.

और कहकर उसने तुरंत महेंद्र की लूंगी खोल दी और उसका लंड मुँह में लेकर चूसने लगी.

महेंद्र का लंड अब पूरी उत्तेजना में आ चुका था अब उसे चूत की जरूरत थी. उसने मोहिनी से कमला को बुलाने को कहा. मोहिनी ने खिड़की से ही आँगन में काम करती कमला को आवाज दी. लेकिन उसके आने के पहले मोहिनी ने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए और बिस्तर पे जाकर महेंद्र के बगल में बैठ गयी. कमला कमरे में आई, लेकिन कमरे का नजारा देखकर मुँह घुमा कर खाड़ी हो गयी और मोहिनी से कहा- माँ आपने बुलाया था?

मोहिनी ने कहा- मैंने तो तुझे नहीं बुलाया.

ये कहकर वो नंगी ही कमला के पास आ गयी और उसकी पीठ को बड़े प्यार से सहलाते हुए बोली- कमला मैं जानती हूँ की तुझे ये सब देखने का बड़ा मन करता है, इसीलिए तू बहाने से यहाँ चली आई. ताकि हम दोनों को तू नंगा देख सके. ख़ास तौर से अपने चाचा का लंड देख सके. है न?

कमला- नहीं माँ! ऐसी घिनौनी बातें मात कीजिये. मैं जाती हूँ.

मोहिनी ने कमला की चोटी पकड़ ली. कमला की चीख निकल पड़ी. मोहिनी गरजी- अब जब तूने हमारे नंगे शरीरों को देख लिया है, तुझे भी अपना शरीर बिना कपड़ों के हमें दिखाना होगा.

कमला- नहीं माँ ! ऐसा मत कहो. मुझे जाने दो. मैं किसी से कुछ नहीं कहूँगी.

मोहिनी ने एक बहुत डरावनी हंसी हसी. उसने कहा – देख कमला! चुदेगी तो तू वैसे भी. लेकिन यदि तुमने अपने कपड़े खुद उतार दिए तो हो सकता है आज तेरी चुदाई न होकर कल हो.

कमला की आखों से आंसू निकलने लगे. मोहिनी ने कहा- चल एक खेल खेलते हैं. मैं जो जो कपड़े पहनूंगी तू वही कपडा उतार देना.

ये कहकर मोहिनी ने अपनी बड़ी चूचियों को अपने ब्लाउज के अन्दर कैद कर लिया. कमला ने भी न चाहते हुए अपनी चोली उतार दी. उसके नीम्बू के आकार के मम्मे देखकर महेंद्र की लार टपकने लगी. इधर मोहिनी ने अपनी साडी पहन ली और कमला को अपना घाघरा उतारने का इशारा किया. तभी अचानक से कमला के बाप नागेन्द्र की आवाज गूंजी वो अचानक से वापस आ गया था, शायद उसकी बस छूट गयी थी. मोहिनी, महेंद्र और कमला को काटो तो खून नहीं. घर के अन्दर का ये नजारा देखकर नागेन्द्र गुर्राया- ये क्या हो रहा था यहाँ?

महेंद्र – दददद….देखो न भैया! तुम्हारी बेटी क्या कर रही है??? मम्म…मैं इसकी बाप की उम्र का हूँ और ये मेरे साथ क्या करना चाहती है.

मोहिनी तुरंत से महेंद्र का खेल भाँप गयी. और उसकी हाँ में हाँ मिलाती हुए बोली – हाँ देखो न! कमला के बापू! इस लड़की पे कितना जवानी का जोश चढ़ा है. अच्छा हुआ तुम आ गए. लो देख लो अपनी बेटी की करतूत.

उधर कमला अचानक से रंग बदलते इन गिरगिटों की हरकतों से अवाक् खड़ी थी. शरीर का उपरी हिस्सा पूर्ण नग्न लिए अब कमला को अपने बाप का सामना करना था. नागेन्द्र ने कमला की चुटिया पकड़ ली और लगभग घसीटते हुए उसे कमरे में ले गया और बोला- बहुत चढ़ा है न जवानी का जोश! आज मैं शांत करता हूँ तेरी ये प्यास.

कमरे का दरवाजा बंद कर नागेन्द्र ने अपनी ही बेटी का उस दिन रेप कर डाला. एक महीने के अन्दर ही कमला का ब्याह पास के गाँव के अर्धविकसित दिमाग वाले रमेश से कर दिया गया. रमेश का एक हाथ भी लूला था. इन्दर तो बस तेजी से घटते इस घटनाक्रम का एक मूक हिस्सा बन कर ही रह गया.

कमला का ब्याह होने के बाद महेंद्र और मोहिनी की रंग रलियाँ और बढ़ गयीं. अब तो मोहिनी महेन्द्र के घर में भी जाकर उसकी लंड का रसपान करती. एक दिन दोनों नंगे ही चारपाई पे लेटे हुए थे, और बातें कर रहे थे. इस बात से बेखबर की इन्दर भी घर में पहले से ही छिपा हुआ है और उनकी बातें सुन रहा है.

मोहिनी- महेन्द्र! हम दोनों के रास्ते के सारे कांटे तो निकल गए. ये मेरा बुड्ढा पति कब निकलेगा?

महेन्द्र- मेरी जान काँटा खुद नहीं निकलता. निकालना पड़ता है.

मोहिनी- जैसे हमने कमला नाम का काँटा निकाला?

महेन्द्र- नहीं! कमला तो कली थी, जिसे मैं फूल बनाना चाहता था. लेकिन ऐन वक़्त पर ये बुड्ढा आ गया और खुद हाथ साफ़ कर गया.

मोहिनी- फिर तुमने कौन सा काँटा निकाला?

महेंद्र- इन्दर की माँ के नाम का! साली के इलाज में बहुत पैसे खर्च हो रहे थे और किसी काम की भी नहीं रह गयी थी. इसीलिए मैंने उसे मार दिया.

मोहिनी चौंकी- क्या बात कर रहे हो??? तुमने इन्दर की माँ को मारा?

महेन्द्र- हाँ! गला घोंट दिया था….स्स्साली….क..

अभी अपनी बात महेंद्र पूरी भी नहीं कर पाया था की इन्दर ने एक भरपूर हथौड़े के वार से महेंद्र का काम तमाम कर दिया.

इन्दर को हालातों के मद्देनजर अपने पिता की हत्या के जुर्म में 3 साल की जेल हो गयी.

इधर कमला ने अपने मानसिक रूप से विकलांग पति की सेवा में खुद को व्यस्त कर लिया. रमेश भी कमला को एक पल के लिए भी अकेला न छोड़ता. धीरे- धीरे साल दर साल बीतने लगे. कमला का यौवन अब पूर्ण विकसित हो चुका था. उसके गोल गोल मम्मे चोली के ऊपर से ही सारे बांके नौजवानों के आकर्षण का केंद्र बने रहते. उसकी बलखाती कमर न जाने कितने दिलों को घायल कर रही थी. लेकिन उसकी जवानी उसके किसी काम नहीं आ रही थी. रमेश को सेक्स नाम की चिड़िया का क ख ग…भी नहीं पता था और न ही उसकी कोई सम्भावना थी. कमला रात में पूरी नंगी होकर कई बार रमेश के लंड को सहला कर या चूस कर उसे उत्तेजित करने का प्रयास करती. लेकिन रमेश पे इसका कोई प्रभाव न होता.