एक अनोखी प्रेम कथा

इन्दर आगे बढ़ा और कमला ने आखें बंद कर ली. उसने कमला को घुमा कर उसकी पीठ अपनी ओर कर ली. कमला की गर्दन पे एक किस करते हुए इन्दर उसकी पीठ चूमने लगा. कमला की सिस्कारियां निकलने लगीं. इन्दर ने भी अपने शरीर से एक एक कपडा अलग कर दिया. कमला का यौवान उसके लंड में पहले ही तनाव पैदा कर चुका था. उसने कमला के भारी नितम्बों के बीच की घाटी से अपना लंड चिपका दिया.

कमला सिहरन के मारे खड़ी भी नहीं हो पा रही थी. इन्दर ने उसे अपनी गोद में उठा लिया और चारपाई पे लिटा दिया. इन्दर ने कमला के ऊपर आकर उसके अधरों (होठों) का रसपान करना शुरू कर दिया. कमला के जीवन का ये पहला चुम्बन था और शायद आखिरी भी. वो इस अनमोल अनोखे क्षण को पूरा जीना चाहती थी.

इन्दर कमला के स्तनों को चूमते हुए उसकी जाँघों के बीच आ गया और अपने होठों से कमला की चूत चूसने लगा. अचानक से इन्दर ने आसन बदल दिया और उल्टा होकर अपना लंड कमला के होठों से सटा दिया और स्वयं कामला की चूत का रसपान करने लगा. कुछ ही देर बाद कमला का योनी रज बह निकला.

अब इन्दर कमला के होठों को अपने होठों से चूसने लगा. कमला पे फिर से मदहोशी छाने लगी. कमला तड़पने लगी और इन्दर के लंड को पकड़ कर अपनी चूत पे दबाने लगी. इन्दर ने कमला की दोनों टांगों को फैलाया और एक जोरदार धक्के से अपने लंड को कमला की चूत में प्रवेश करा दिया. कमला की चीख निकल गयी और वो इन्दर को अपने ऊपर से हटने के लिए धक्का देने लगी. लेकिन इन्दर उससे अलग नहीं हुआ. बस ऐसे ही पड़ा रहा और उसके होठों को चूसता रहा. कुछ देर बाद जब कमला का दर्द कुछ कम हुआ तो इन्दर ने फिर से अपने लंड की हलचल शुरू की.

अब कमला को असीम सुख मिल रहा था. अब हर धक्के का जवाब कमला भी अपने नितम्बों को उछाल कर दे रही थी. जब दोनों का ये देह यज्ञ समाप्त हुआ तब तक दोनों अपना स्खलन कर चुके थे. इन्दर ने अपना वीर्य कमला की योनी के अन्दर ही छोड़ दिया था और कमला के कहेनुसार वहां से चला गया था अपनी जीवन की दूसरी यात्रा पे.

कुछ ही महीनों के बाद कमला और रमेश को उनका खिलौना मिल चुका था. नाम था “इन्दर”.