फूफा जी का बड़ा लंड दोबारा चूत में लिया

फूफा जी ने अपना लंड मेरी चूत में हिलाते हुए कहा- हाअ… हाअ! शायद हो गया होगा नशे में… मगर मैंने तुम्हारे कपड़े तो नहीं उतारे और मेरे कपड़े भी?
मैंने भी फूफा जी के हल्के हल्के झटकों का साथ देते हुए अपनी कमर हिलनी शुरू कर दी और फूफा जी का लंड मेरी चूत में अंदर बाहर होने लगा.

चुदाई का मजा लेते हुए मैंने फूफा जी की बात का जवाब देते हुए कहा- आपके कपड़े तो आपकी पम्मी ने उतारे हैं, उससे पूछिए जाकर!
पम्मी का नाम सुनते ही फूफा जी हैरान रह गये और बोले- पम्मी, कौन पम्मी? मैं किसी पम्मी को नहीं जानता!
मैंने कहा- अच्छा तो रात को बड़ा पम्मी को याद कर रहे थे… और मुझे पम्मी समझ कर मेरा ही रे*प कर दिया?

यह बात सुनकर फूफा जी चुप हो गये और मुझे अपनी बांहों में कस के जकड़ते हुए ज़ोर ज़ोर से अपने लंड के धक्के मेरी चूत में लगाने लगे. मैं भी अपनी कमर को उनके झटकों के साथ हिलाने लगी. उनका लंड मेरी चूत में से पूरा बाहर निकल कर फिर से अंदर घुस जाता, जिससे मुझे बहुत मजा आ रहा था.
मैं ऐसी चुदाई के लिए ही तो फूफा जी के पास आई थी.
और उनका हब्शी लंड मेरी चूत की दीवारों को फैलाता हुआ जब अंदर घुसता तो मेरी चूत में मीठा मीठा सा दर्द घुल जाता, जो मुझे बहुत आनन्दित कर रहा था.

मैं अपनी चरमसीमा पर पहुँच चुकी थी और मैं ज़ोर ज़ोर से फूफा जी का लंड अपनी चूत में घुसाने के लिए अपनी गांड को उछालने लगी, फूफा जी भी अपना लंड बड़ी बेदर्दी से मेरी चूत के आर पार करने में लगे थे.

मेरी चूत में से मेरा लावा फूटने लगा था और फूफा जी के लंड के साथ वो बाहर की तरफ़ बहने लगा था, अब मुझसे फूफा जी का लंड और सहन नहीं हो रहा था इसलिए मैंने फूफा जी को रुकने के लिए कहा.
फूफा जी भी इतनी ताबड़तोड़ चुदाई कर के थक चुके थे इस लिए वो भी मेरी बात मानते हुए रुक गये, मैंने उनका लंड अपने हाथ से पकड़ के चूत में से बाहर निकाल दिया और चैन की सांस लेने लगी.

फूफा जी भी मेरे साथ लेट गये और बोले- कोमल, सच में बताओ रात में क्या हुआ था? और तुमने मुझे रोका क्यों नहीं ऐसा सब करने से?
मैंने झूठी कहानी सुनाते हुए कहा- फूफा जी, जब मैं आपको सुलाने के लिए अंदर लेकर आई तो आप मेरे बूब्स को दबाने लगे, उस टाइम सास ससुर जी अपने कमरे में चले गये थे, इसलिए उनको आपकी इस हरकत का पता नहीं चला.. और फिर जब मैं आपको बैड पर लिटाने लगी तो आपने मुझे बैड पर गिरा दिया और खुद मेरे ऊपर चढ़ गये और मेरे होंठों को चूसने लगे और मेरे चुचों को भी मसलने लगे.

फूफा जी ने कहा- तुमने भागने की कोशिश नहीं की?
मैंने कहा- भागना तो चाहा था मगर आपने अंदर से दरवाजा लॉक कर दिया और दरवाजे के पास खड़े होकर अपने सारे कपड़े उतार फेंके और जब मैं दरवाजे खोल कर भागने लगी तो आपने मेरी सलवार का नाड़ा तोड़ दिया और वो नीचे गिर गयी फिर आपने एक एक करके मेरी कमीज़, ब्रा और पेंटी भी उतार दी.
फूफा जी ने कहा- तुम शोर भी तो मचा सकती थी?

मैंने कहा- शोर भी मचाने वाली थी, फिर मैंने सोचा कि आप यह सब तो नशे की हालत में कर रहे हैं, और अगर मैं शोर मचाऊँगी तो आपके साथ साथ मेरी बदनामी भी होगी, और सास ससुर जी के साथ साथ गाँव वाले भी आपको बुरा भला कहेंगे. इसलिए मैं चुपचाप आपके सामने लेट गयी और आपने अपना काला हब्शी लंड मेरी चूत में पेल दिया.
फूफा जी बोले- तो कोमल… तुमने मेरी इज़्ज़त बचाने के लिए अपनी इज़्ज़त लुटा दी.
मैंने कहा- और नहीं तो क्या… पता है फूफा जी, जब आपका लंड पहली बार मेरी चूत में घुसा था तो मुझे कितना दर्द हुआ था… दर्द के मारे मेरी तो जान ही निकलने वाली थी, उस वक़्त तो मैं ज़ोर से चिल्लाने वाली थी.

तो फूफा जी मुस्कराते हुए बोले- चिल्ला लेती मेरी जान, हमने आपके ससुर की बहन को भी तो चोदा है, उनकी बहू को चोद लिया तो क्या हुआ!
मैंने मुस्कराते हुए कहा- तो फूफा जी, एक रात और रुक जाना, बहू को अच्छी तरह से चोद के जाना…
फूफा जी हंसते हुए बोले- अच्छा तो मतलब… बहू भी ज़बरदस्ती करवाना चाहती थी.
मैंने मुस्कराते हुए कहा- फूफा जी क्या करूँ, आपका लंड है ही ऐसा… मेरी चूत आपके लंड की दीवानी हो गयी है और चाहती है कि ऐसा लंड रोज उसके अंदर घुसे.

फूफा जी बिना कुछ बोले मुस्कराते हुए फिर से मेरे ऊपर चढ़ गये और मुझे अपनी बांहों में कसते हुए जफ्फी डाल दी और मेरा नंगा बदन चूमने लगे. फिर फूफा जी ने मुझे घोड़ी बनने को कहा और मैंने अपना सर बैड के साथ जोड़ कर अपनी गांड ऊपर उठा दी.

फूफा जी मेरी गांड की तरफ़ आ गये और मेरी चूत को अपने हाथों से फैलाते हुए उसको चाटने लगे, उनके चाटने से मुझे बहुत मजा आ रहा था… मैं अपनी चूत उनके मुँह पर दबाने लगी और फिर फूफा जी ने मेरी चूत को चाट चाट कर अच्छे से साफ कर दिया.

अब फूफा जी ने अपना लंड मेरी चूत में फिर से घुसेड़ दिया और मेरी कमर को दोनों हाथों से पकड़ लिया और फिर अपने पैरों पर खड़े होकर अपना लंड मेरी चूत के अंदर बाहर करने लगे. मैं फिर से चुदाई के मज़े में डूबने लगी.
घोड़ी बन कर चुदाने में मुझे थोड़ा दर्द हो रहा था मगर मैं दर्द की परवाह किए बिना फूफा जी पूरा लंड अपनी चूत में घुसवाना चाहती थी. फूफा जी का लंड भी इतना बड़ा था कि आसानी से अंदर नहीं लिया जा सकता था, मगर फिर भी मैं अपनी कमर हिला हिला कर फूफा जी का साथ दे रही थी.

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