घर की शिफ्टिंग के दौरान

महेश ने भी मेरी बहुत मदद की। हम दोनों ने उस घर पर शिफ्ट कर दिया और हम दोनों ही उस दिन बहुत थक गए थे। महेश ने मुझे कहा कि तुम मेरे घर चलो और वहां पर ही आज खाना खा लेना। महेश ने मेरे लिए अपने घर पर खाना बनवा दिया और हम लोगों ने साथ में ही खाना खाया। उसके बाद हम लोग वहां से वापस लौट आए, महेश भी मेरे साथ मेरे कमरे में ही बैठा हुआ था। हम लोग घर की सफाई कर रहे थे और अभी भी काफी सामान मेरा बिखरा हुआ था और महेश मेरे साथ बहुत मदद कर रहा था। हम दोनों ही काफी थक गए थे इसलिए हम लोग कुछ देर बैठ गए और बैठकर हम लोग बातें करने लगे। मैं महेश से रंजना के बारे में कह रही थी और मैंने उसे कहा कि रंजना ने आते वक्त भी मुझसे अच्छे से बात नहीं की। महेश मुझे कहने लगा कि कोई बात नहीं यदि वह तुम से बात नहीं करना चाहती तो तुम भी अब उससे बात मत करना और उसके बाद जब हम दोनों ने पूरे घर की साफ-सफाई अच्छे से कर दी तो उसके कुछ देर तक महेश बैठा हुआ था। मैंने उसे कहा कि हम लोग चाय बनाते हैं। मैंने उसके लिए चाय बनाई, फिर हम दोनों बैठ कर चाय पी रहे थे और आपस में बात कर रहे थे। मैंने महेश से कहा कि तुमने मेरी बहुत मदद की, मुझे बहुत अच्छा लगा। वह कहने लगा दोस्ती में इस प्रकार की बातें अच्छी नहीं है। तुमने भी मेरी कई बार मदद की है लेकिन महेश ने मेरी वाकई में बहुत मदद की थी क्योंकि मुझे जब भी जरूरत पड़ती है तो महेश ही सही समय पर मेरे साथ खड़ा रहता है इसलिए महेश कि मैं बहुत इज्जत करती हूं। महेश और मै बहुत ज्यादा थक चुके थे हम दोनों साथ में बैठे हुए थे। महेश का शरीर पसीना पसीना हो गया था और मैं भी पूरे पसीने में लथपथ थी इसलिए मेरे स्तन मेरी टी शर्ट से साफ दिखाई दे रहे थे। महेश ने जैसे ही मेरे चूचो पर अपना हाथ रखा तो मैं मचलने लगी और मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ। मैंने भी महेश को कसकर पकड़ लिया और मेरा मूड उस दिन ना जाने क्यों इतना खराब हो गया। उसने मेरे स्तनों को दबाना शुरू कर दिया और काफी देर तक उसने मेरे स्तनों को दबाया।

उसके बाद उसने जैसे ही मेरे होठों को अपने होठों में लेकर चूसा तो मुझे बड़ा आनंद आने लगा मैं उसका पूरा साथ देने लगी। काफी देर ऐसा करने के बाद जब उसने मुझे नंगा किया तो मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा और मैंने भी महेश की निकर से उसके लंड को बाहर निकालते हुए अपने मुंह में समा लिया और बहुत देर तक उसके लंड को चुसती रही। मुझे उसके लंड को चूसने में मजा आ रहा था। कुछ देर मैंने ऐसे ही उसके लंड को सकिंग किया और उसके बाद उसने भी मेरे दोनों पैरों को चौड़ा करते हुए मेरी योनि को चाटना शुरू कर दिया। जब वह मेरी योनि का रसपान कर रहा था तो मेरे अंदर से गर्मी बाहर आ रही थी और मेरी योनि से पूरा पानी बाहर निकलने लगा। काफी देर तक उसने ऐसा ही किया उसके बाद जैसे ही उसने मेरी नरम और मुलायम योनि के अंदर अपने लंड को डाला तो मैं चिल्ला उठी और मुझे बड़ा अच्छा महसूस होने लगा। मेरी चूत से खून निकलने लगा था और उसे भी मजा आने लगा। उसने मेरे दोनों पैरों को चौड़ा करते हुए मुझे बड़ी तीव्र गति से धक्के देना शुरू कर दिया। वह इतनी तेजी से मुझे झटके दे रहा था मेरा शरीर हिलने लगा और वह मेरे बड़े बड़े स्तनों को मुंह में लेकर चूस रहा था। काफी देर तक उसने ऐसा ही किया उसके बाद उसने मुझे घोड़ी बना दिया। घोड़ी बनाते ही जब उसने अपने लंड को मेरी योनि में डाला तो मुझे बहुत दर्द महसूस होने लगा लेकिन कुछ देर बाद मेरी योनि से कुछ ज्यादा ही पानी बाहर निकलने लगा और मुझे मजा आने लगा। मैं भी अपनी चूतड़ों को महेश से मिलाने लगी और कुछ देर बाद ही उसका वीर्य मेरी योनि के अंदर गिर गया। उसके बाद से महेश और मै हमेशा ही सेक्स करते हैं।

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