इंटरनेट चैटिंग साइट से चुदाई तक

मैं भी अब उसे तड़पाने के मूड में नहीं था. फिर मैंने उसकी लेगिंग को वहीं पर फाड़ दिया और साथ में ही उसकी पिंक कलर की पैंटी भी फाड़ दी और उसकी चूत के दाने को थोड़ा सा सहला कर चूत को चाटने लगा. कुछ 2-3 मिनट की चूत चटाई और ऊँगली से चुदने के बाद वो फिर से झड़ गई और अपना सारा चूत रस मेरे मुंह पर छोड़ दिया…

नमस्कार दोस्तों, अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरे खड़े लंड का सलाम और सभी गीली चूतों को मेरा लन्ड का प्यार. दोस्तों, मेरा नाम स्माइल है और मैं पुणे की एक आईटी कंपनी में काम करता हूं. मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूं और कई बार अन्तर्वासना पर कहानी पढ़ते हुए मैंने मुठ भी मारी है. इन कहानियों को पढ़ कर मैंने सोचा क्यों न मैं भी अपनी कहानी आप लोगों के साथ शेयर करूं.

दोस्तों, मैं अक्सर नेट पर चैटिंग साइट पर चैट किया करता हूं. चैटिंग के दौरान मुझे एक लड़की मिली जोकि मुम्बई की थी और शादीशुदा थी. उसका नाम अंकिता (काल्पनिक नाम ) था. शुरू में तो हम दोनों के बीच कुछ दिनों तक नार्मल चैट होती रही फिर बात सेक्स पर आ गई तो उसने बताया कि वो अपने पति से खुश नहीं है.

मुझे अब और क्या चाहिए था! तो मैं और गहराई में जाकर उससे पूछने लगा. इस तरह से हमारे बीच सेक्स चैट शुरू हो गई. अब हम दोनों रोज सिर्फ सेक्स की बातें करते और सेक्सी फोटो शेयर करते थे. उधर वो अपनी चूत में ऊँगली करती और मैं इधर मुठ मारता.

इस तरह कुछ 15 दिन बीते. फिर हमने मिलने का निश्चय किया. उसके बाद वो पुणे आई. जब मैं उसे लेने पुणे स्टेशन गया तो मैं उसे देखता ही रह गया. दोस्तों, वो मेरी इमेजिनेशन से भी खूबसूरत निकली. वो मस्त गदराये जिस्म की मालकिन थी और उसकी हाइट 5 फिट और 5 इंच के करीब थी तथा उसका वेट कुछ 50-55 किलोग्राम था. उसका फिगर 34-30-36 का था.

उसने ब्लैक कुर्ती और सफेद लेगिंग पहनी हुई थी. यह उसके कटीले फिगर पर बिल्कुल फिट थी. उसकी मस्त गांड उभरी हुई एक दम गोल थी जोकि किसी का भी लण्ड खड़ा करने के लिए काफी थी. उसे देख कर वहीं स्टेशन पर ही मेरा लंड खड़ा हो गया और ये बात उसे समझ में आ गई थी. फिर भी मैं क्या करता? मैं चुप चाप उसको बाइक बैठा कर फ्लैट के लिए निकल पड़ा.

पूरे रास्ते मेरा लंड खड़ा था और वो शरारत में पीछे बैठे – बैठे लण्ड पर हाथ फिरा देती थी. जिससे वो और तन जाता था. वो मुझसे एक दम चिपक कर बैठी थी, जिससे उसकी मस्त चूचियां मेरी पीठ से चिपक कर मुझे जन्नत का एहसास दे रही थी.

फिर 30 मिनट तक रास्ते में मजा करने के बाद हम फ्लैट पर पहुंचे. वह पर मैंने सारा मैनजमेंट पहले ही करके रखा था. हम जैसे ही दरवाज़ा खोल के अंदर हुए, वैसे ही मैंने उसे अपनी बाहों में उठा लिया. अब वो बोली, “अरे मेरे चोदू राजा, ये चुदासी लड़की तुम्हारी ही है आराम से चोदना लेकिन पहले फ्रेश तो हो लेने दो”.

लेकिन मैं बोला – रास्ते में तूने जो आग लगाई है पहले उसे शांत कर उसके बाद ही तुझे फ्रेश होने के लिए जाने दूंगा.

यह कहते हुए मैं उसे अपने कमरे में ले आया जहाँ पर पहले से ही एक केक रखा हुआ था. केक का ऊपरी हिस्सा मैंने स्पेशल आर्डर दे कर लण्ड के शेप का बनवाया था. वो केक को देख कर खुश हो गई. फिर मैंने उसके शरीर पर थोड़ा सा केक फैला कर उसे पीछे से ऐसे पकड़ा कि उसकी गांड में मेरा लण्ड कपड़ों के ऊपर से ही रगड़ करने लगा.

अब उसने भी अपनी गांड अच्छे से मेरे लण्ड पर सटा दी और हल्के – हल्के अपनी गांड हिला कर मेरे लण्ड को अपनी गांड से मासाज देने लगी. फिर मैंने उसकी लंबे केशों को जो उसके कूल्हे तक आते थे, उसकी गर्दन से हटाकर उसको गर्दन पर किश करने लगा.

थोड़ी देर हम इसी पोज़ में रहे फिर मैंने उसको केक काटने को बोला. जिस पर वो थोड़ा सा झुकी और केक काट कर मुझे खिलने लगी. उसके हाथों से केक खाने के बाद मैंने केक से क्रीम निकाल कर उसके होंठ, चूंचियों, गले और पैंटी मे हाथ डालकर थोड़ा सा उसकी चूत पर और उसकी कुर्ती को थोड़ा सा उठाकर नाभि पर भी क्रीम लगा दिया.

फिर मैंने जबरदस्ती अपना हाथ लेगिंग के अंदर डालकर उसकी गांड पर भी क्रीम लगाई. जिस पर वो थोड़ा सा नाराज़ होकर बोली, “तुमने मेरे कपड़े खराब कर दिया, अब मुझे सब साफ करना पड़ेगा”. तो मैंने उससे प्यार से बोला, “डार्लिंग, अपनी जबान से चाट – चाट कर मैं सब जगह साफ कर दूंगा. तुम चिंता बिल्कुल न करो”.

फिर इतना कहते ही मैंने उसके गुलाब से नाजुक गालों को चाटने लगा. थोड़ी देर में मैंने उसके गाल का सारा केक अपनी जबान से चाट कर साफ कर दिया. फिर उसने मुझे थोड़ा सा पीछे को धक्का दिया और अपनी कुर्ती उतार कर बोली, “जहाँ – जहाँ पर केक लगाया है सब साफ कर जल्दी से”.

फिर मैं अपने काम पर लग गया. पहले होंठ, फिर गला और फिर चूचियां, सब कुछ चाटने लगा. जिससे उसकी सिसकियाँ निकलना स्टार्ट हो गई और वो गलियों में “बहनचोद और चाट” करके मेरे को और उकसाने लगी. अब मैं भी पूरी तत्परता से उसकी चूचियों से खेल रहा था. कभी मैं उसके निप्पलों पर दांतों से काटता तो कभी हाथों से उसकी पूरी चूचियों की मसाज करता.

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