मेरी कामवासना और मेरी मॉम की चुदाई

चूंकि मॉम की बुर काफ़ी वक़्त से चुदी नहीं थी, डैड बाहर थे. मॉम मेरे इस झटके से ‘आआहह..’ करके आनन्द के मारे बेहोश सा हो गईं.
मैं धीरे धीरे मॉम के जिस्म को चूम रहा था.. उनके होंठों को भी चूस रहा था. साथ ही धीरे धीरे चुत में अन्दर लंड भी हिला रहा था.
मॉम भी झटके से लंड घुसने पर करीब एक मिनट तक शांत आँख बंद करके लेट गई थीं.

एक मिनट बाद वे ‘आअहह..’ करते हुए बोलीं- निकाल ले बाहर.. दर्द हो रहा है बेटा.
मैं बोला- मॉम अभी तो असली मज़ा आएगा.

मैंने धक्के मारने शुरू कर दिए और करीब आधा घंटा तक मॉम की चुत को चोदा. मामी खूब मजा ले ले कर चुदवा रही थी. इस बीच में बहन भी जाग गई.
मैंने उससे बोला- तुम सो जाओ.
वो आँख बंद करके वापिस सो गई.

मैं मॉम को धक्के मारता रहा. कुछ देर बाद मेरा पानी मॉम की चूत में निकल गया.
मैं मॉम के अन्दर अपना पानी निकाल कर थक गया था. उसके बाद मैं थक कर मॉम के पास लेट गया और नंगा ही सो गया.

सुबह मेरी आँख देर से खुली, तब देखा तो मॉम के चहरे पे संतुष्टि थी लेकिन शायद शर्म के कारण मां मुझसे कुछ बात नहीं कर रही थी.

मैंने एक दो बार उनसे बात करनी चाही, तो वे मुंह नीचे करके मुस्कुराहट लिए वहां से उठ कर चली गईं.

अगले दिन वो रात को सोने से पहले से बाथरूम में शावर ले रही थीं. मैं चुपके से बाथरूम में घुस गया और दरवाजा अन्दर से बंद कर लिया.

फिर मैंने उनको अन्दर ही पकड़ लिया. मैं भी पूरा नंगा हो गया था, वो भी नंगी थीं. मॉम ने कोई आनाकानी नहीं की और मैं उनको बाथरूम में ही दीवार के सहारे झुका कर चोदने लगा. थोड़ी देर बाथरूम के अन्दर ही चोदा, लेकिन इधर कम जगह होने के कारण आराम से चुदाई नहीं हो पा रही थी. तब मैंने मॉम की चुत में लंड अन्दर डाले हुए ही बांहों में उठा कर बाथरूम से अटॅच बेडरूम के बेड पर ले आया.

इसके बाद मॉम की धकापेल चुदाई की. ऐसे ही धीरे धीरे अब मेरी मॉम मेरी पूरी रंडी बन चुकी थीं. हफ्ते में दो तीन बार तो मैं उनको चोदता ही हूँ. धीरे धीरे मैं बहन को चुदाई के लिए भी तैयार कर रहा था.

अब देखो कब ऐसा मौका मिलता है कि मैं किराएदारन आंटी अपनी मॉम और बहन तीनों को एक साथ एक ही बिस्तर पर कब चोद पाता हूँ. जैसे ही मुझे ये अवसर मिलेगा मैं आप सबसे इस चुदाई की कहानी को लिखूंगा.

आपको मेरी ये चुदाई की कहानी कैसी लगी.. मुझे अवश्य लिखें.