पापा ने कामवाली की चूत बजा डाली, मैं छुपकर देख रही थी

मेरा नाम अदिति हे और मेरी उम्र २४ साल हे. मेरी फिगर 32 26 32 हे. मैं पहले भी सेक्स की कहानी लिख चुकी हूँ, लेकिन इस साईट के ऊपर ये मेरी पहली कहानी हे. दोस्तों ये कहानी एकदम रियल हे फेक नहीं हे. ये कहानी तब की हे जब मैं १८ साल की थी और १२वी कक्षा में पढ़ती थी. मेरे घर में मेरे सिवा मेरे मम्मी, पापा, छोटा भाई और बहन हे. उस दिन मम्मी सुबह जल्दी जल्दी काम में लगी हुई थी. उसे काम निपटा के मार्केट जाना था. आज कामवाली अभी तक नहीं आई थी. और माँ काम में पागलों की तरह लगी हुई थी. मैं 9 बजे अपने स्कुल के लिए निकल गई. मेरी छोटी बहन का स्कुल 11 बजे था. महीने का आखरी दिन था इसलिए स्कुल जल्दी छुट गई और मैं घर आ गई. मुझे ऐसा था की मम्मी बाजार से मेरी लिए कुछ जरुर लाइ होगी!

मैं वापस आई और घर के दरवाजे को धक्का दिया. घर का दरवाजा अंदर की तरफ खुल गया. बहार हॉल में कोई भी नहीं था. मैंने सोचा की घर में कोई नहीं हे फिर घर खुला क्यूँ हे! मैं दबे पाँव अंदर बढ़ी और एक एक कमरे को देखने लगी. मम्मी पापा के बेडरूम के अन्दर से कुछ आवाज आई. मैंने छिप के अन्दर देखा तो पापा के हाथ में हमारी कामवाली कमला की कलाई थी. पापा उसे कुछ कह रहे थे और कमला अपना हाथ छुड़ाना चाहती थी. कमला करीब 30 साल की गरीब औरत हे जो 4-5 घरों में काम कर के पैसे कमाती हे.

कमला की पीठ मेरी तरफ थी. वो और पापा जो बात कर रहे थे वो मैंने कान लगा के सुनी.

कमला: साहब जाने दो ना ये सब अच्छा नहीं लगता हे बार बार.

पापा: अरे अच्छा बुरा कुछ नहीं होता हे मेरी रानी. तेरी शादी नहीं हुई थी तब से हम करते आये हे. तब तो तू एकदम पतली थी और आराम से करने भी देती थी. अब देख कैसे बदन भरा हुआ हे तेरा. अब कर लेने दे ना.

कमला: साहब घर का सब काम भी पड़ा हुआ हे, बीबी जी (मेरी मम्मी) आ गई तो देख के डांटेंगी मुझे.

पापा: तेरी बीबी जी ने सुबह ही सब काम कर लिया हे अब कुछ नहीं रहा हे करने के लिए, आ मेरे साथ कुछ मजे करवा दे. वैसे भी बहुत दिनों के बाद बीबी जी बहार गई हे.

कमला: नहीं साहब अच्छा नहीं लगता हे ये सब.

पापा: अरे मैं पैसे भी देता हूँ न तुम्हे मेरी रानी.

कमला: साहब आप एक घंटे थका के दो सो रूपये देते हे. और फिर मैं जब काम करती हूँ तो थक जाती हूँ.

पापा: अरे मेरी जान तू 200 की जगह 400 ले लेना बस, पहले बता दिया होता की पैसे कम हे तो तभी ज्यादा देता न तुझे.

पापा ने अब कमला के ब्लाउज के ऊपर अपने हाथ को रख दिया. वो साडी के ऊपर से ही कामवाली के बूब्स को मसलने लगे. कमला आँखे बंद कर गई और सिसकियाँ उठी. पापा ने उसे अपनी तरफ खिंच लिया और उसके दोनों बूब्स के ऊपर कुत्ते के जैसे टूट पड़े. पापा के हाथ में नहीं आ रहे थे इतने बड़े बूब्स थे कामवाली के. फिर पापा ने साडी के पल्लू को खोला. कमला के रेड ब्लाउज में उसके बड़े उरोज एकदम सेक्सी लग रहे थे. ब्लाउज के ऊपर निपल्स का आकर बता रहा था की उसने अंदर ब्रा नहीं पहनी थी. पापा ने जब ब्लाउज के बटन को खोले तो ब्रा ना होने की पुष्टि हो गई. कुछ देर पहले कडक दिखने वाले बूब्स ब्लाउज के खुलते ही निचे गिर से पड़े. लेकिन पापा ने फट से उन्हें अपने हाथ से ससंभाल लिया और वो दोनों उरोज को जोर जोर से मसलने लगे. कमला आह आह कर रही थी. पापा ने अब उसके पेटीकोट के नाड़े को पकड के कलाकारी दिखाते हुए खिंच दिया. कमला की बाल से भरी हुई काली देसी चूत मेरे सामने थी.

पापा ने अपने हाथ से चूत को हिलाया और बोले, बहुत दिनों के बाद हाथ में आई हे तेरी भोस.

कमला बोली, हां महिना भर हो गया ना!

पापा, महीने में तो ऐसे लगा की जमाना हो गया तुझे प्यार किये हुए.

कमला हंस पड़ी,. पापा अब खड़े हुए और उन्होंने अपनी पतलून की बटन और ज़िप खोली. उनका बड़ा लंडदेख के मेरे मुहं से वाऊ निकल गया. पापा का लंड कम से कम 8 इंच का था. और उसकी गर्थ यानी की मोटाई कम से कम 3.5 इंच जितनी थी. पापा ने लंड को तल से पकड़ के हिलाया. जैसे कोई डायनोसोर अपने पंजे पकड़ के गरज रहा था. कमला ने लौड़े को अपने हाथ में पकड के उसे हिला दिया.

पापा ने कहा: जानेमन इसे अपने मुहं में ले लो और प्यार करो.

कमला: साहब उलटी होती हे, महक आती हे!

पापा: अरे ले ले ना जल्दी से, उलटी आये तो कर लेना. तेरी मेडम तो इसे पूरा मुहं में ले लेती हे उसे तो आजतक कभी उलटी नहीं आई मेरी जान.

कमला ने बेमन के लंड को अपने मुहं में लिया. पापा ने उसके कान के पास से दोनों तरफ से पकड़ लिया उसे. और वो मुहं में धक्के लगाने लगे. कमला के मुहं से ग ग ग ग ग की आवाजें निकल पड़ी. और एक ही मिनिट में उसने सच में उलटी कर दी. अपनी साडी को मुहं में दबाये वो अंदर ही अटेच्ड बाथरूम में भागी. पापा तब कमरे में अपने लंड को पकड़ के सहला रहे थे. इस समय पापा का लंड बड़ा डरावना सा लग रहा था मुझे भी!

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