अतृप्त कामवाली को चोदकर यौन इक्षा की पूर्ति की

“भुवन!! प्लीस धीरे धीरे डालो !! … ऊँ.ऊँ.ऊँ..दर्द होता है” कामवाली कहने लगी

मैंने उसकी बात मानी और सिर्फ 5″ लंड अंदर घुसा दिया। अब अंदर बाहर करके उसकी गांड चोदने लगा। तेल की वजह से उसका दर्द कम हुआ था। वरना तो शायद नही करवाती। मैं शुरू हो गया। वो बेड पर पेट के बल लेटी रही। मैं उसके उपर बैठकर उसकी गांड मार रहा था। कुछ देर में वो नोर्मल हो गयी। उसका दर्द छूमंतर हो गया।

मैं पीछे से और धक्का मारा और पूरा 7″ लंड उसकी गांड के बहुत ही कसे बिल में पंहुचा दिया। उसे पता ही नही चला। अब मैं फटाफट उसकी ठुकाई शुरू कर दी। उसे अब दर्द नही हो रहा था। वो मजे लेने लगी। “..मम्मी.मम्मी…सी सी सी सी.. हा हा हा …ऊऊऊ ..ऊँ. .ऊँ.ऊँ.उनहूँ उनहूँ..” करने लगी। मैंने बैठकर उसकी गांड खूब मारा। मुझे तो इतना मजा मिला की बता नही सकता। फिर लंड निकाला और फिर से उसकी खूब गांड को जीभ लगाकर चाटा। पर फ्रेंड्स अभी भी दूसरी वाली मेरा माल नही झरा था। अब दोनों की बैठ गये। फिर से मैं उसे गोद में बिठाकर दूध चूसने लगा। फिर वो कपड़े पहनकर चली गयी।

कुछ दिन बीत गया। मुझे फिर से उसके सेक्सी बदन की तलब लगने लगी। मैं उसे धीरे से अपने कमरे में बुलाया।

“सेक्स करेगी??” मैंने पूछा

“अभी तो बहुत काम है भुवन!! संडे को तुम मेरे घर पर आ जाओ” वो बोली

दोस्तों उसे हफ्ते में एक दिन छुट्टी मिलती थी। मेरी माँ उसे छुट्टी के भी पैसे देती थी। क्यूंकि इन्सान तो आखिर इंसान है। कोई मशीन तो नही। मैं बेसब्री से संडे का इंतजार करने लगा। शाम को मेरी खूबसूरत कामवाली ने काल किया।

“हाँ बोलो!! जानम!” मैंने कहा

“मेरी माँ कुछ देर के लिए बाहर गयी है। तुम आ जाओ” कामवाली कविता फोन पर बोली

“ठीक है आ रहा हूँ” मैंने कहा

“कंडोम लेते आना” वो बोली

“ले आऊंगा” मैंने कहा

उसके बाद मैंने फोन काट दिया। कपड़े पहने और पास की एक दूकान से कंडोम लिया। फिर कविता कामवाली के घर चला गया। शाम का वक़्त था। हल्का अँधेरा था। मैं जल्दी से सीढियों से उपर वाले फ्लोर पर चढ़ गया। मुझे देखती ही वो दरवाजा खोल दी। मैं अंदर घुस गया। वो फौरन दरवाजा बंद कर ली। मुझे बताई की उसकी माँ एक घंटे के लिए बाहर गयी है। पहले हम दोनों ने किस किया। फिर अपने अपने कपड़े उतार डाले।

“आज कैसे चुदेगी?? खुद ही बता दे” मैंने कहा

“आज कुर्सी पर बैठकर मुझे पेलो” कामवाली कहने लगी

मैं नंगा हुआ और अंडरवियर उतार डाला। जल्दी जल्दी लंड फेटने लगा। कुछ देर मुठ देकर लोहे जैसा मजबूत बना लिया और कुर्सी पर बैठ गया। कामवाली मेरे पास आ गयी। मेरा लंड बंदूक की तरह खड़ा हुआ था। वो आकर मेरे लंड पर बैठने लगी। धीरे धीरे लंड को अपनी योनी में घुसा ली। फिर उचक उचक कर खुद ही चुदाने लगी। आज दोस्तों ये वाला पोज हमारे लिए बिलकुल नया था। इससे पहले कुर्सी पर बैठकर हम दोनों ने चुदाई न की थी। कविता “हूँउउउ हूँउउउ हूँउउउ ..ऊँ-ऊँ.ऊँ सी सी सी. हा हा.. ओ हो हो..” करने लगी। मैंने उसे बाहों में भर लिया और उसके गुलाब जैसे होठो को खूब किस किया। वो खुद ही उछल उछलकर चुदाती रही। कुछ देर बाद हम दोनों बिस्तर पर चले गये। मैंने उसे अपने लंड की घुड़सवारी करवाई। कामवाली 2 बार झड गयी। फिर मैं भी झड़ गया।

मैंने उसके 34″ के दूध को मुंह में लेकर 5 मिनट चूसा। फिर उसे एक चोकलेट गिफ्ट की। जल्दी से कपड़े पहनकर भाग आया। दोस्तों अब वो मेरी पर्सनल गर्लफ्रेंड बन गयी है। जब उसका पति उसकी यौन जरूरत को पूरा नही कर पाता तो मुझसे ही चुदाती है।