कुवारी कामवाली की चूत चोदकर खून निकाला

मेरा नाम अग्निश हे और मैं पटियाला का हूँ. और ये बात आज से बहुत समय पहले की हे. जब मैं 12वी में था तब की ये बात हे. हमारे घर में एक कामवाली थी उसकी दो बेटियाँ थी. और दोनों में जो छोटी थी, रोहिणी, उसका फिगर एकदम ही सेक्सी था. उसको देख के किसी के मुहं में भी पानी आ जाए. मैं उसे काफी दिनों से लाइन मार रहा था. एक बार ये जवान कामवाली झाड़ू लगा रही थी और मैं उसके पीछे से निकला. मैंने धीरे से उसकी गांड के ऊपर हाथ रख दिया. वो थोड़ी चौंकी लेकिन कुछ बोली नहीं. मैं ऐसे अब बार बार करने लगा था. वो कुछ नहीं कहती थी इसलिए मेरी हिम्मत बढ़ने लगी थी. लेकिन मुझे डर सा था की कही वो मेरी मम्मी को ना बोल दे इसलिए मैं आगे नहीं बढ़ रहा था.

लेकिन एक दिन मैंने सही हिम्मत दिखा ही दी. घर के बाकी के लोग बहार हाल में थे और वो मेरे कमरे में झाड़ू लगाने के लिए गई. मैं उसके पीछे गया. वो आगे की और झुक के झाड़ू लगा रही थी. मैं उसके पीछे दबे पाँव गया. और मैंने उसे ले दबोचा. वो घबरा गई लेकिन कुछ नहीं बोली. वो बोलती भी कैसे मैंने सीधे ही उसके होंठो को अपने होंठो से लगा के थूंक की लेनदेन चालु भी कर दी थी. और फिर मैंने अपने एक हाथ से उसके बूब्स के लड्डू दबाये. तभी मुझे किसी के कदमो की आवाज आती लगी तो मैंने उसे छोड़ दिया. वो उसकी माँ थी जो कहने के लिए आई थी की बहार का झाड़ू पहले लगा दो मुझे पोछा करना हे. मैंने मन ही मन कहा तेरी माँ की चूत मारू साली कुछ देर लेट आती तो तेरी माँ चुदती थी.

वो मेरे तरफ देख के चली गई. लेकिन एक बात थी की उसके चहरे के ऊपर स्माइल थी. और मुझे लगा की अब तो इसको चोदना ही हे कुछ भी कर के. शाम को मुझे फिर से मौका मिल गया रोहिणी के साथ में. शाम को वो कमरे में आई तो मैंने उसे वापस पकड़ लिया. और कपड़ो के साथ ही उसके साथ सेक्स करने लगा. वो पोछा करने के लिए निचे बैठी थी तो मैंने उसके बालों को पकड के उसके चहरे पर पेंट के साथ ही लंड को घिसा. वो मुझे छोड़ने के लिए कह रही थी पर मैं तो चोदने के मुड में था. मैने अपने एक हाथ को उसके ढीले कुरते में डाला और उसके लड्डू मसलने लगा. मैंने उसकी एक चुन्ची को बहार निकाल के अपने होंठो से चाट ली. साला फिर से कोई आ गया और मेरा काम बिगड़ गया.

फिर तो मैं जब भी मौका मिलता था उसे पकड़ के किस कर लेता था. और उसके हाथ से अपने लंड को पकड़ा देता था. उसके बूब्स मसलता था और वो निचे झुके तो उसकी गांड पर अपना लंड टच करता था. पर चोदने के लिए सही मौका मुझे नहीं मिल रहा था. मैं वर्जिन लड़कियों की चुदाई की कहानियाँ पढने लगा था. और एक दिन मैंने उसे पूछा की झांट साफ़ करती हो क्या तुम?

रोहिणी एकदम से शर्मा के अन्दर के रूम में भाग खड़ी हुई. मैं उसके पीछे गया और उसके हातथ को पकड़ के अपने लंड पर रख दिया. आज मौका था कुछ टाइम के लिए. मम्मी छत पर कपडे लेने गई थी अपने.

मैंने फिर से पूछा, रोहिणी झांट साफ़ करती हो क्या तूम?

वो बोली, वो क्या होता हे?

मैंने कहा, जो चूत के ऊपर बाल उगे होते हे उसे झांट कहते हे. निकाले हे कभी?

वो हंस के बोली, नहीं!

मैंने कहा एक बार दिखाओ ना अपनी चूत.

वो बोली, मेडम आ जायेंगी.

मैंने कहा., मेडम के आने से पहले तू बंद कर लेना चूत को.

वो डर सी रही थी. मैं उसे ले के दरवाजे के पीछे आ गया. उसने अपना नाडा खोला और अपनी घाघरी को निचे किया. उसने सच कहा था उसकी चूत झांटदार थी और एकदम कडक और कसी हुई देसी वर्जिन चूत थी वो. उसे देख के ही मेरे मुहं में पानी आ गया. मैंने अपने हाथ से उसे सहलाया तो रोहिणी के मुहं से सिसकी निकल गई. तभी सीड़ियों की तरफ से मम्मी की चप्पल की आवाज आई. मैंने दरवाजा खोला और वो भाग गई. अब मैंने इस नादान कामवाली की बेटी को चोदने के लिए एक प्लान बनाया. मेरे एक दोस्त के पास ब्ल्यू गंदे फोटोस की एक मेग्जिन थी. उसे मेग्जिन के अन्दर बड़े लंड से बुर चुदाई के पिक्स थे. मैंने दोस्त से कहा की मुझे एक हफ्ते के लिए दे दे. वो बोला, साले एक हफ्ते तक मुठ मारेगा क्या!

मैंने कहा, अरे वो बाद में बताऊंगा.

दोस्त की मैगज़ीन मैंने अपने कमरे में तकिये के निचे रख दी. दुसरे दिन रोहिणी जब कमरे की सफाई कर रही थी तो मैं छिप गया. उसने तकिये को उठा के बिस्तर साफ़ करने का अपना रोज का काम चालू किया. मैंने मैगज़ीन ऐसे रखा था की तकिया उठाते हुए बुर के अन्दर घुसा हुआ लंड दिखे. रोहिणी वो देख के एकदम से खड़ी हो गई. उसने मैगज़ीन को उठा ली और एक एक कर के सब फोटो देखने लगी. वो एकदम हार्डकोर पिक्स थे जिसमे बड़े 9-10 इंच के लंड से भी चुदाई होती दिखाई गई थी. रोहिणी ने पन्ने पलटे और मैंने पीछे से उसके पास आ गया. मैंने उसे पकड लिया.

वो बोली, साहब मेडम हे घर पर.

मैंने कहा वो अपने कमरे में हे मैं देख के आया हूँ.

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