शहरी लंड की प्यास गांव की भाभी ने बुझायी

वो फिर नहाने लगी। मुझे उन्हें देखने में मजा आ रहा था। अब तो उनका पेटिकोट भी पूरा भीग चुका था। उनकी चूचियों व चूतड़ों की शेप साफ नजर आ रही थी। धीरे-धीरे मेरा लण्ड खड़ा होने लगा। मैं उसे पाजामे के ऊपर से ही सहलाने लगा।
मैं- भाभी सभी जगह साबुन लगा कर खूब रगड़ो, नहीं तो कुछ जगह गंदी रह जायेगी।
भाभी- क्या मतलब है तुम्हारा?
मैंने कहा- भाभी जहां पेटिकोट बांधा है उन नींबुओं पर और पेटिकोट के अंदर भी हाथ मार लो। अगर तुमसे नहीं हो रहा है तो मैं आ जाता हूँ।

भाभी ने नजरें नीचे किये हुए मेरी तरफ देखा. मेरा हाथ मेरे लंड पर चल रहा था. मैं देख रहा था कि उन्होंने मुझे लण्ड सहलाते हुए देख लिया।
वो बोली- नहीं मैं खुद कर लूंगी. ज्यादा होशियारी न दिखाओ।
अब भाभी दूसरी तरफ घूम कर पेटीकोट के अंदर हाथ डालकर साबुन लगाने लगी। अब मेरी तरफ उनकी गांड आ गयी। गीले कपड़े में भीगी हुई भाभी की मोटी गांड साफ-साफ दिख रही थी। क्या मस्त गांड थी उनकी. अब मुझ से सहन नहीं हो पा रहा था.

लण्ड अब मेरे कंट्रोल में नहीं था। वो झुक कर अपनी चूत में साबुन लगाने में मस्त थी। मैं चुपके से अंदर घुस गया। साथ में पाजामा और अंडरवियर भी उतार लिए। वो तो झुकी हुई थी और पीछे से मैंने अपना लण्ड उनकी उभरी गांड पर टिका दिया।

वो अचानक से हुई मेरी इस हरकत से घबरा गई और मेरी तरफ घूमी. मुझे अंदर पाकर बोली- अंदर क्यों आ गए! जल्दी निकलो बाहर। अगर किसी को पता चल गया तो बड़ी बदनामी हो जाएगी। मेरी ही गलती थी जो मैंने तुम्हारे सामने नहाने को हां कह दी थी।

मैं- भाभी आपकी इतनी मस्त गांड देखकर रहा नहीं गया। देखो मेरा ये औजार कैसे खड़ा हो गया है। वैसे भी अभी किसी के आने का डर नहीं है। कोई नहीं आएगा। बस मजे लो और मुझे भी जरा मजा लेने दो।
वो बोली- नहीं-नहीं, निकलो यहां से.

मगर भाभी की नजर मेरे लण्ड पर ही थी। मैंने उन्हें चूमना शुरू कर दिया। अपना लण्ड जबरदस्ती उनके हाथों में दे दिया और खुद उनकी चूचियाँ दबाने लगा। थोड़ी सी ना नुकर के बाद वो ढीली पड़ गयीं और मेरे चूमने का मजा लेने लगी। मैंने भी मौका देख कर पेटिकोट का नाड़ा खींच डाला। उनका पेटिकोट एक ही झटके में नीचे गिर गया।
उन्होंने उसे गिरने से रोकने की एक असफल कोशिश की पर नाकाम रहीं। अब वो नंगी मेरे सामने खड़ी थी। मैंने फटाफट गुसलखाने का दरवाजा बन्द किया और लाइट जला ली।

भाभी का नग्न जिस्म देखते ही लण्ड का और बुरा हाल हो गया। मैं उनके होंठ चूसते हुए चूचियाँ सहलाने लगा। वो मेरे लण्ड पर हाथ चला रही थी।
मैंने अपना एक हाथ नीचे ले जाकर उनकी चूत सहलानी शुरु की। अब चूत पानी छोड़ने लगी तो मैं उसमे उंगली करने लगा। चूत तो गीली थी ही. मेरे उंगली करने से भाभी का भी बुरा हाल हो गया।

उन्होंने मुझे कस कर पकड़ लिया औऱ बोली- देवर जी, तुमने मुझे बहका दिया अब और मत तड़पाओ और डाल दो अपना ये गर्म हथियार मेरी चूत में। अब सहन नहीं होता।
मैंने भाभी को घुमा कर झुका लिया. वो कुतिया बन कर मेरे सामने झुकी थी। मैं भी ज्यादा ही उत्तेजित था तो लण्ड उनकी चूत पर रगड़ने लगा। जैसे ही वो उनके ही पानी से गीला हुआ भाभी ने खुद लण्ड पकड़कर अपनी चूत के मुंह पर रख दिया और कमर को पीछे की ओर लाने लगी ताकि लण्ड उनकी चूत के अंदर घुस सके।

अब दोनों का एक जैसा हाल था। मैंने भी उनकी कमर को पकड़ा और एक ही झटके में उनकी चूत में अपने लण्ड को पूरा उतार दिया। उनकी उम्म्ह… अहह… हय… याह… निकल गयी।
बस फिर अब क्या था. मैंने दोनों हाथों से उनकी चूचियाँ मसलनी शुरू की और दनादन धक्के देने लगा। बहुत दिनों बाद चूत में लण्ड जा रहा था तो बड़ा मजा आ रहा था। चंडीगढ़ जाने के बाद तो मेरे लिए जैसे चूत का अकाल ही पड़ गया था। वहां की सारी कसर मैं अभी भाभी की चूत में निकाल रहा था।

भाभी की चूचियों को पकड़ पर भींचते हुए मैं अपने लंड को भीगी हुई गीली भाभी की चूत में पेलने लगा. मेरे मुंह से कामुक सीत्कार फूटने लगे. बहुत दिनों के बाद ऐसी देसी चूत की चुदाई करने का मौका मिला था. गांव की चूतों को चोदने का मजा ही कुछ और होता है दोस्तो.

मैं भीगी हुई सेक्सी भाभी की चूत में पेलम-पेल कर रहा था. गीली चूत होने के कारण फच्च-फच्च की आवाज निकल रही थी जो मेरी वासना को और ज्यादा बढ़ा रही थी.
इतनी मस्त भाभी की गीली चूत की चुदाई करने के कारण मैं भी भला कब तक अपने लंड पर काबू रख पाता. मन तो कर रहा था कि भाभी को काफी देर तक जम कर चोदूँ मगर चूत इतने दिन बाद मिली थी तो ज्यादा देर मैं रुक नहीं पाया. मगर अभी मैं किसी भी हाल में झड़ना नहीं चाह रहा था. इसलिए सोच रहा था कि लंड को बाहर निकाल लूं.

किस्मत ने मेरा साथ भी दिया. मैंने देखा कि भाभी की चूत मेरे लंड को ऐसे लेने लगी थी जैसे बस वो झड़ने ही वाली है. उन्होंने मेरी गांड को पकड़ कर अपनी चूत में धक्के लगवाना शुरू कर दिया. मैं समझ गया कि भाभी की प्यास मुझसे ज्यादा बढ़ गई है.
जो हाल चंडीगढ़ में मेरा था, कुछ ऐसा ही हाल शायद भाभी का भी हो रहा था.

Pages: 1 2 3 4

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *