शहरी लंड की प्यास गांव की भाभी ने बुझायी

थोड़ी देर की रगड़ाई के बाद ही उनका पानी गिर गया. वो मेरे सामने से हट गई। उनके आगे होते ही लण्ड फच्च की आवाज के साथ चूत से बाहर निकल गया।
मैंने फिर उन्हें अपनी तरफ घुमाया और चूमना शुरू किया। मेरा लण्ड अब भी उनकी चूत पर रगड़ खा रहा था। थोड़ी देर बाद ही वो फिर गर्म हो गयी। मैंने उन्हें अपनी गोदी में उठा लिया और उनकी टांगें अपनी कमर में लपेट ली.

उन्होंने भी अपनी बांहें मेरे गले में डाल दीं और मेरे बदन पर झूल गयी. मैंने उनके चूतड़ों को उठा कर, अपने लण्ड को उनकी चूत के मुंह पर टिकाया. एक हल्के से झटके में ही एक फच्च की आवाज के साथ लण्ड उनकी चूत में उतर गया।
अब वो मेरे लण्ड पर झूला झूल रही थी। वो ऊपर से उछल-उछल कर कर लण्ड को पूरा अपनी चूत में अंदर तक ले रही थी। मैं नीचे से धक्के मार कर चुदाई का मजा ले रहा था।

वो भी पूरे मजे ले रही थी. इस आसन में पूरा लण्ड अंदर तक उनकी चूत में जा रहा था। मेरे हर झटके में उनकी आह निकल रही थी। मैं अब जोर-जोर से उन्हें चोदने लगा। कुछ देर बाद ही वो फिर अपना पानी छोड़ गई। अब मेरा पानी भी निकलने को बिल्कुल तैयार था।

जोरदार आठ-दस धक्कों के बाद ही मेरे लण्ड ने उनकी चूत में पिचकारी मारनी शुरू कर दी और अपने वीर्य से उनकी चूत लबालब भर दी। अब जाकर मेरे लण्ड को थोड़ा सा सुकून मिला था।
मैंने थोड़ी देर उन्हें अपने आप से चिपटाये रखा और उनके होंठों पर एक किस दे दी।

भाभी- अब तो छोड़ दो मुझे? अब तो कर ली ना तुमने अपने मन की। सारा रस भी मेरी चूत में ही भर दिया। अब इस उम्र में मुझे फिर से माँ बनाने का विचार है क्या तुम्हारा?
मैं- अरे भाभी, चिंता क्यों करती हो. मैं दवाई ला दूंगा. चुदाई का मजा तो माल अंदर डालने में ही आता है। आजकल के जमाने में सब जुगाड़ है। जम कर चुदाई के मजे भी लो और बच्चा होने का कोई डर भी नहीं होता।

मैंने उन्हें नीचे उतार दिया। उनकी चूत से मेरा औऱ उनका वीर्य बाहर निलकने लगा।
मैंने कहा- लो भाभी … चूत की सफाई तो मैंने अपने लण्ड से घिस-घिस कर कर दी. अब आप बोलो तो आपकी गांड भी इसी तरह साफ कर दूं?

भाभी फटाफट मुझसे अलग हुई, बोली- चलो अब बाहर जाओ जल्दी से, कोई आ जायेगा तो अनर्थ हो जाएगा। वैसे ही तुमने मेरी चूत की हालत खराब कर दी है। कहां मैं हफ्ते में एक बार तुम्हारे भाई से चुदती थी, तुमने तो अभी मुझे दो बार झड़वा दिया। अपने मूसल को अंदर तक पेल कर मेरी चूत को कहीं का नहीं छोड़ा।

मैंने भी बाहर निकलने में ही भलाई समझी। फटाफट अपने कपड़े पहने और बाहर निकल कर बरामदे में कुर्सी डाल कर बैठ गया। भाभी भी नहाने लगी। थोड़ी देर बाद भाभी भी कपड़े बदल कर मेरे करीब ही बैठ गयी।
मैंने कहा- चलो भाभी, पहले चाय बना कर लाओ, फिर बातें करते हैं। दोनों थक जो गए हैं इतनी मेहनत करके। चाय से कुछ तो फुर्ती जागेगी।

भाभी चाय बनाकर ले आयी। मैंने चाय की चुस्की लेते हुए कहा- तो भाभी मजा आया कि नहीं मेरे लण्ड से चुदवाने में?
वो बोली- हां, मजा तो बहुत आया। मैंने तो कभी सोचा भी नहीं था कि कभी तुम्हारे भाई के अलावा किसी और से भी चुदूंगी। लेकिन अब डर भी बहुत लग रहा है।
“किस बात का डर भाभी जी?” मैंने पूछा।
वो कहने लगी- ये बात अगर किसी को पता चल गई तो?
मैंने कहा- अरे किसी को पता नहीं चलेगा. जब तक हम ही किसी और को न बात दें। मैं तो किसी को बताने से रहा … आप भी नहीं बताएंगी। बात हमारे ही बीच में रहेगी। फिर आप ही बताओ कि किसी और को क्या पता लगेगा कि हमारे बीच में कुछ ऐसा हुआ भी है?
भाभी मेरी बात से सहमत हो गई.

मैंने पूछा- अच्छा, अब कब मेरे लण्ड की सवारी करोगी? कल फिर आऊं क्या?
भाभी बोली- ना बाबा ना … अब तो एक हफ्ते तक मैं किसी से भी नहीं चुदवाऊंगी। मेरा अब मन नहीं है।
मैंने कहा- अच्छा जब भी मैं गांव आऊंगा तो मुझे अपनी चूत चोदने का मौका तो दोगी न?
वो बोली- हां क्यों नही … अगर मौका मिला तो जरूर दूंगी। चलो अब जाओ यहां से, मैं बहुत थक गई हूं. तुमने मुझे पूरा निचोड़ लिया है। अब थोड़ा मैं भी आराम कर लेती हूं।

मैंने भी उन्हें एक किस की और वापस अपने घर आ गया।

शाम को मैं मेडिकल स्टोर से उनके लिए दवाई ले आया और उन्हें इसे रात में ले लेने को बोलकर दे दी। थोड़ी देर के बाद भाभी के बच्चों से व भाई से बात-चीत करके मैं वापस अपने घर लौट आया।

मेरा वापस जाने का मन तो नहीं था मगर वापस तो जाना ही था. साथ ही इस बात की खुशी भी थी कि गांव की भाभी को मैंने पटा लिया था. अब कम से कम इतना जुगाड़ तो हो गया था कि जब भी मन करे मैं अपने लौड़े की प्यास को चूत चोद कर बुझा सकूं. मैं अपनी सफलता पर खुश था.

इस तरह गांव जाकर मेरी चूत मारने की इच्छा पूरी हो गयी। अभी मैं फिर चंडीगढ़ वापस आ गया हूँ। देखो, अब कब तक कोई मस्त माल मुझे अपनी प्यास बुझाने को अपने पास बुलाती है। मेरा लण्ड तो इसी आस-उम्मीद में है।
मुझे ज्यादा अच्छा उनकी सेवा करने में लगता है जो महिलाएं घर में अकेली रहती हैं या जिन्होंने तलाक ले लिया है. मैं समझ सकता हूँ कि ऐसी औरतों की चूत को लंड नहीं मिल पाता है.
इसीलिए मैं अपनी प्यास बुझाने के साथ-साथ उनकी चूत सेवा करके भी पुण्य का कमाता रहता हूँ.

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