मामा की नशेड़ी लड़की को चोदा

मेरा नाम मुकेश है मैं सूरत का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 26 वर्ष है। मेरे माता-पिता भी सूरत में रहते हैं और हमें सूरत में रहते हुए काफी वर्ष हो चुके हैं। मेरे पिताजी की परचून की दुकान है और वह उसे ही चलाते हैं। मेरी बहन अभी स्कूल में पढ़ रही है और मैं अपने कॉलेज के बाद से एक छोटी कंपनी में नौकरी कर रहा हूं लेकिन मैं अपनी नौकरी से संतुष्ट नहीं हूं इसलिए मैंने इस बारे में अपने माता पिता से कहा। वह कहने लगे कि यदि तुम कुछ काम करना चाहते हो तो तुम अपना काम खोल सकते हो, मेरे पिताजी ने मुझे कहा कि तुम्हे यदि पैसों की आवश्यकता है तो तुम मुझसे ले लो लेकिन मैंने उन्हें कहा कि मैं अभी कुछ समय नौकरी करना चाहता हूं, उसके बाद मैं अपना काम खोलने के बारे में विचार करूंगा। एक दिन मेरे मामा का फोन मुझे आया और वह मुझसे पूछने लगे कि तुम क्या कर रहे हो, मैंने उन्हें बताया कि मैं यही एक कंपनी में नौकरी कर रहा हूं।

मेरे मामा मुंबई में रहते हैं और वह मुझे कहने लगे की तुम कुछ समय के लिए मुंबई आ जाओ तो मेरी बहुत बड़ी मदद हो जाएगी। मैंने अपने मामा से पूछा कि मेरे द्वारा आपकी क्या मदद हो जाएगी, वह कहने लगे कि तुम मुंबई आओ तो मैं तुम्हें सब कुछ बताता हूं। मैंने उन्हें कहा कि मैं नौकरी छोड़ कर कैसे आ सकता हूं, वह कहने लगे कि मैं तुम्हारे लिए यही कहीं नौकरी देख लूंगा। मैंने जब इस बारे में अपने घर पर बात की तो मेरे पिताजी कहने लगे कि तुम अचानक से जाने का क्यों प्लान बना रहे हो, मैंने उन्हें कहा कि मैं कुछ समय वही नौकरी करूंगा उसके बाद मैं सूरत आ जाऊंगा। उसके बाद मैं अब मुंबई चला गया और जब मैं मुंबई गया तो मैंने अपने मामा को फोन किया। उसके बाद मैं उनके घर चला गया। जब मैं उनके घर गया तो मेरे मामा मुझसे मिलकर बहुत खुश हुए और कहने लगे कि तुमने बहुत अच्छा किया जो तुम मुंबई आ गए। मैंने अपने मामा से पूछा कि ऐसी क्या बात हो गई जो आपने मुझे मुंबई बुला लिया, वह कहने लगे कि मुझे तुम्हारी मदद की जरूरत है।

मैंने अपने मामा से पूछा कि मैं आपकी किस प्रकार से मदद कर सकता हूं, वह कहने लगे कि रचना को नशे की बहुत आदत लग चुकी है और वह हमारी बिल्कुल भी बात नहीं सुनती। हम इस बात से बहुत परेशान है लेकिन हम यह बात किसी को भी नहीं बताना चाहते। तुम रचना के बहुत अच्छे दोस्त हो इसलिए हमने तुम्हें यह बात बताई। मैंने अपने मामा से पूछा कि यह सब कैसे हुआ, वह कहने लगे की रचना का एक लड़के से चक्कर चल रहा था, हमें वह लड़का बिल्कुल भी पसंद नहीं था और हम लोगों ने पहले ही रचना को मना कर दिया था परंतु वह बिल्कुल भी हमारी बात सुनने को तैयार नहीं थी और कह रही थी कि वह बहुत ही अच्छे घर का लड़का है लेकिन फिर भी मैंने रचना को मना किया परंतु उसने हमारी एक बात भी नहीं सुनी और जब रचना को लड़के की हकीकत पता चली तो उसके बाद वह बहुत टूट चुकी है, वह हम लोगों से अच्छे से भी बात नहीं करती। मैंने और तुम्हारी मम्मी ने उसे समझाने की कोशिश की लेकिन वह हमारी बात बिल्कुल भी नहीं मानती और हम लोग बहुत ही परेशान हो चुके हैं इसीलिए मुझे लगा कि मुझे तुम्हें ही फोन करना चाहिए क्योंकि रचना तुमसे बहुत बात करती है और वह तुम्हारी बात भी मानती है इसी वजह से मुझे तुम्हारी मदद की आवश्यकता है। जब मैंने यह बात सुनी तो मुझे भी बहुत बुरा लगा और मैंने अपने मामा से पूछा कि रचना कहां है, वह कहने लगे कि वह तो रात को ही घर आती है। जब वह घर आती है तो बहुत नशे में होती है इसलिए वह हमसे बिल्कुल भी बात नहीं करती और अपने कमरे में जाकर सो जाती है। मैंने मामा से पूछा कि क्या वह अब आपसे बिल्कुल भी बात नहीं करती, वह कहने लगे कि वह अब हम दोनों से बिल्कुल भी बात नहीं करती, हम बहुत ज्यादा परेशान हैं। मैं घर पर ही था, मैं और मामा बात कर रहे थे। वह बहुत ही परेशान थे, मुझसे भी उनकी परेशानी बिल्कुल देखी नहीं जा रही थी और मैंने भी उनसे कहा कि आप बिल्कुल चिंता मत कीजिए, मैं रचना से इस बारे में बात करूंगा। हम लोगों ने खाना खा लिया था उसके बाद भी रचना नहीं आई। जब मैंने उसे फोन किया तो उसने मेरा फोन भी नहीं उठाया। काफी वक्त से मेरी उससे अच्छे से बात नहीं हो रही थी इसलिए मुझे इस बारे में बिल्कुल भी जानकारी नहीं थी परंतु जब मुझे यह जानकारी हुई तो मुझे बहुत बुरा लगा।

रात के करीबन 12 बज चुके थे और हम सब लोग उसका इंतजार कर रहे थे। जब वह घर आई तो बहुत ही नशे की हालत में थी इसलिए हम लोगों ने उससे बात नहीं की और जब सुबह हुई तो मैंने उसकी स्थिति देखी, वह बहुत ही कमजोर हो गई थी और उसके चेहरे पर बिल्कुल भी मुस्कुराहट नहीं थी। जब उसने मुझसे पूछा की तुम कब आये, तो मैंने उसे कहा कि मैं कल ही आ गया था लेकिन तुम नशे की हालत में थी इसलिए मैंने तुमसे बात नहीं की। मैं अब रचना के पास ही बैठा हुआ था और रचना से जब मैं पूछने लगा तो वह मुझे कहने लगी कि मैंने उस लड़के पर बहुत ज्यादा भरोसा किया लेकिन उसने मेरे भरोसे को बहुत ठेस पहुंचाई और अब मैं बिल्कुल भी किसी से बात नहीं करना चाहती। मैंने उसे कहा कि इसमें मामा और मामी का कोई कसूर नहीं है जो तुम उन लोगों से बात नहीं कर रही हो। तुम्हें उन लोगों से बात करनी चाहिए, वह लोग तुम्हारे लिए बहुत ही चिंतित हैं। यदि तुम उनसे बात नहीं करोगी तो उन्हें अच्छा नहीं लगेगा।

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