ममेरे भाई बहन की चुदाई

हाय.. ऐसा लगा जैसे बस सब कुछ मिल गया. उसके किस करने से लग रहा था जैसे पहले से किस की सारी पढ़ाई कर के आई है.

मैंने भी उसको अब कस के बांहों में पकड़ा और किस करना चालू कर दिया. अमावस्या थी.. घनघोर अँधेरा था.. कुछ दिख ही नहीं रहा था. तो हमने एक दूसरे के कपड़े उतार दिए. फिर मैंने उसकी चूचियां चूसीं. वैसे तो मैंने कभी सेक्स बहुत ज्यादा नहीं किया था लेकिन ब्लू फिल्म देख कर सब तरह के खेल सीख गया था. मैंने उसके गले में किस किया तो वो ‘आह उह ओह..’ की आवाज करने लगी. मेरा लंड खड़ा हो गया था. मुझे उसने कस के बांहों में पकड़ रखा था और मैं किस कर रहा था. अचानक मुझे लगा कि पलंग आवाज कर रहा है.

मैंने कहा कि पलंग आवाज करेगा तो माँ पापा को शक हो जाएगा.
निशा ने कहा- कोई और जगह नहीं है क्या? मेरी चुत में आग लग गई है जल्दी से मुझे कुछ करो, यहीं जमीन पर कर लेते हैं.

उसकी बात सुनकर मेरा लंड फनफना गया कि लौंडिया खुद चुदने के लिए कह रही और मैं उसको न चोदूँ, ये तो सरासर बेइंसाफी है.

उसके मुँह से जमीन पर चुदाई की बात सुनकर मुझे लगा कि इधर इसने हल्ला किया तो माँ जाग सकती हैं.

फिर मुझे याद आया कि छत पर चटाई पड़ी है. मैंने उससे कहा कि चलो छत पर चलते हैं, उधर ही तेरा गेम बजाता हूँ.
वो मुझे चूमते हुए बोली- चलो देखते हैं कितना बड़ा गेम बजाने वाला आइटम है.

उस वक्त मैंने उसकी बात पर गौर नहीं किया. हमने ओढ़ने के लिए चादर उठाई और छत पर चले गए. वहां जा कर मैंने चटाई बिछाई.. और हम दोनों बड़ी बेताबी से फिर से चालू हो गए.

अब मैंने निशा को इतना गर्म कर दिया कि वो कहने लगी कि रोमी अब रहा नहीं जाता.. प्लीज अन्दर डाल दो.

मैंने जल्दी से उसे कपड़ों की बाधा दूर की और अपने कपड़े उतार कर मैं नंगा हो गया. उसने मेरा खड़ा लंड देखा तो उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई. उसकी कामुक मुस्कान देख कर मुझे लगा जैसे उसक उसकी मनपसंद खिलौना मिल गया हो. उसने लपक कर मेरा लंड पकड़ लिया और सहलाने लगी; अचानक उसने मेरा लंड अपने मुँह में भर लिया.

मुझे तो मानो जन्नत मिल गई थी, मैंने मस्ती से अपना लंड उसको चुसाया और कुछ देर बाद उसके मुँह से लंड निकाल कर उसकी चूत पर रखकर धक्का लगा दिया. मेरा लंड सटीक निशाने पर लगा था और निशा की चूत भी रस से रसीली थी, साला लंड एक बार में पूरा अन्दर घुसता चला गया.

लंड ने हमला क्या किया, निशा जोर से चिल्ला पड़ी- आह मर गई..

मैंने जल्दी से उसके होंठ अपने होंठों से दबा दिए. लेकिन अगले कुछ ही पलों में निशा अपनी गांड उठा उठा कर लंड लीलने लगी. मैं समझ गया कि वो पहले से चुदी हुई थी.. लेकिन भैन की लौड़ी नाटक तो ऐसे कर रही थी, जैसे पहली बार लंड लिया हो.

मुझे क्या.. माँ चुदाए.. लंड का पानी निकालना था. मैंने धक्के देना चालू रखे और जबरदस्त चुदाई शुरू कर दी. उसके भरे हुए मम्मे इतना मस्त मजा दे रहे थे कि हाथों को अब तक उनकी मुलायमियत का अहसास हो रहा है. वे मेरे ऊपर आकर अपनी चुत में लंड लेने लगी और मुझे अपने चूचे चुसाने लगी.

सच में उसकी चुदाई की अदाओं ने मेरा दिल जीत लिया था. साली रांड की तरह चुद रही थी. उसकी गांड मेरे लंड को ऐसे ठोक रही थी, जैसे मैं उसको नहीं बल्कि वो मुझको चोद रही हो. कुछ ही देर में मुझे कुछ अजीब सा लगने लगा.

ये तो आपको मालूम ही है कि चुदाई के पहले राउंड में हमेशा लड़कों का जल्दी काम हो जाता है. लेकिन मेरे केस में उल्टा हुआ. मैंने सुबह 5:30 बजे तक चुदाई की. निशा कलप उठी और उसने हाथ जोड़ कर चुत पर रहम करने की भीख मांगी.

मैंने किसी तरह लंड का पानी निकाला और अलग हुआ.

रोज की तरह माँ पापा के उठने का टाइम हो रहा था. हम दोनों ने फटाफट कपड़े पहने और नीचे अपनी सोने की जगह आ गए.

मैंने दरवाजा खटखटाया और उधर निशा फिर से सोने का नाटक करने लगी ताकि माँ को शक न हो. माँ ने दरवाजा खोला.. तो मैं अन्दर आकर वापस सोने लगा. निशा को माँ ने उठाया. वो भी अन्दर आकर मेरे पास ही सोने लगी.. क्योंकि हम सब बच्चों के लिए एक अलग रूम है, जहाँ डबल बेड पड़ा है.

निशा का भाई भी अभी सो रहा था. मेरे एक भाई और बहन हैं, वो भी सो रहे थे. हमने फिर से चादर में घुस के 5 मिनट किस किया और दूध चूसने लगा.

करीब 6 बजे माँ ने सबको उठाया. मुझे तो नींद आ रही थी, पर उठना पड़ा. दिन में माँ ने बताया कि बेटा निशा से दूर रहना. इसका व्यवहार ठीक नहीं है. इसके गाँव में चाचा के साथ पकड़ी गई थी. इसलिए इसको कुछ दिनों के लिए यहां भेजा है.

बाद में मुझे पता चला कि उसका ममेरे भाई के साथ भी रिश्ता था और भी कई लोगों के साथ उसकी बात पता चली. लेकिन जो भी हो मुझे ममरी बहन निशा की चूत चोदने के लिए मिल गई.

फिर बाद में मैंने निशा के घर जा के भी बहन को चोदा और इस तरह मेरा शारीरिक संबंध निशा के साथ बन गया.

आप मुझे अपनी राय मेल करके बताएं कि मेरी भाई बहन की चुदाई की कहानी कैसी लगी.