मेरा यार बना, बुआ का प्यार

बुआ के 23 वर्षों की प्यास अब जाके शांत हो रही थी. चूत में उंगली की जगह अब लंड ने ले ली थी. लंड का हर धक्का उनको जन्नत का सुखद एहसास करा रहा था. उनकी सिसकारियाँ इस बात का संकेत थीं की वो अब तक क्या मिस करती आयी हैं…..

दोस्तों! मेरा नाम राहुल है . ये कहानी मेरी बुआ की है. उनका नाम छाया है और वो एक बहुत सज्जन औरत हैं. पर उसके जीवन में बहुत दुख थे. मेरी बुआ जब २० साल की थी तभी उनकी शादी हो गई थी और एक साल मे उन्हें एक लडका भी हो गया था. वह अपने पति के साथ बहुत खुश थीं कि उनके सुखी परिवार को किसी कि नजर लग गयी और उनके पति का स्वर्गवास हो गया.

उन्हें ससुराल वालों ने मायके भेज दिया. उस वक्त उनकी उम्र सिर्फ 23 साल थी. बच्चे के साथ वो बिचारी कहा जातीं. मेरे पिता के अलावा बुआ का इस दुनिया मे कोई नहीं था. पिताजी ने बुआ को अपने पास रहने के लिए बुला लिया और बुआ हमारे साथ रहने लगीं. मेरे पिता को आर्थिक मदद करने के लिए एक कम्पनी में काम करने लगीं. उस वक़्त मेरे पिता की नई- नई शादी हुयी थी. कुछ सालों बाद मेरा और मेरी बड़ी बहन का जन्म हुआ.

अब आपको मेरे परिवार के बारे मे बताता हूँ. मेरा नाम राहुल है मेरे पिता का नाम राजेंद्र हैं. मेरी माँ का नाम सुनीता है. मेरी बुआ छाया के लडके का नाम विजय है और मेरी बड़ी बहन का नाम कोमल है. इस तरह हम ६ लोगों का परिवार है. हम सब पुणे मे रहते थे.

मेरी बुआ बचपन से मुझसे बहुत प्यार करती थी. मेरी माँ और बुआ के बीच बहुत जमती थी. हम सब डबल रुम मे रहते थे. जैसे- जैसे वक्त बीतता गया, हम सब की उम्र भी बढ़ती गयी. मेरी बड़ी बहन के लक्षण कुछ ठीक नहीं थे इसलिए जब वह २० साल की हो गयी तब पिताजी ने उनकी शादी करवा दी. उस समय मेरी उम्र १८ साल थी. बुआ का लडका विजय मुझसे ६ साल बड़ा था.

बुआ ने उसे पढ़ा- लिखा के टीचर बनाया. मेरी बहन की शादी के १ साल बाद पिताजी ने विजय भैया कि भी शादी करवा दी. शादी के कुछ दिनों बाद विजय भैया का मुबंई ट्रान्सफर हो गया और बुआ भी उनके साथ मुबंई रहने चली गई. सब कुछ ठीक चल रहा था कि अचानक मेरे माता- पिता की एक अपघात मे मौत हो गई और में अकेला पड़ गया. उस वक्त मेरी उम्र २१ साल थी और मेरा डिप्लोमा भी पुरा हो चुका था. मुझे एक अच्छी कम्पनी में नौकरी मिल गयी थी.
मुंबई में बुआ का दिल नहीं लगता था, इसलिए वह फिर से पुणे मे मेरे साथ रहने आ गई. बुआ कि उम्र उस वक्त ४५ साल थी पर दिखने में वह ३० साल की औरत लगती थी. उनके मम्मे भी काफी बड़े थे. उनकी गांड अभी भी काफी सुडौल थी. बहुत सारे आदमियों के उनके पीछे होने के बावजूद उन्होंने किसी को चारा नहीं डाला था. मुझे जब से सेक्स का ज्ञान आया था, तब से मै यहीं सोचता रहता था कि फूफा जी को मरे इतने साल हो गये फिर भी बुआ ने सेक्स कैसे कंन्ट्रोल किया होगा?

अब तक मेरे मन में उनके बारे मे कोई बुरा ख्याल नहीं आया था. पर यह सब ऐसे बदल गया कि मैं दंग रह गया था. हुआ ये कि मैने अपने एक करीबी दोस्त रितेश को अपने साथ रहने के लिए बुलाया. वह मेरा बचपन का अच्छा दोस्त था, इसलिए बुआ भी उसे हमारे साथ रखने के लिए मान गई. कुछ दिनों में ही अपने मजाकिया स्वभाव से वह हम दोनों का चहेता बन गया था. रितेश बचपन से ही बहुत चालू था. वह दिखने में भी काफी स्मार्ट था, इसलिए बहुत सी लड़कियों को चोद चुका था.

रितेश और मैं रात को एक ही बेड पर सोते थे और बुआ हमारे बेड के बाजू मे नीचे गद्दे पर सोती थी. कभी- कभी हम बीयर पीते थे. बुआ भी इस पर सिर्फ बोलती थी कि कम पिया करो! बीयर पीने के बाद मुझे कुछ होश नहीं रहता था और मैं सो जाता था.

एक दिन अचानक मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि रितेश मेरे बगल में नही था और नीचे गद्दे पे बुआ भी नहीं थी. कुछ सोचता इससे पहले ही मुझे बुआ की सिसकियाँ सुनाई दी. ये आवाजें किचन से आ रही थी. मैं बिस्तर से उठा और किचन मे झाँकने लगा. अंदर देखा तो दंग रह गया.

रितेश और बुआ दोनों पूरे नग्न अवस्था में एक दूसरे से लिपटे थे. रितेश अपना 7 इंच का बड़ा लौड़ा बुआ कि चूत मे अंदर- बाहर कर रहा था और बुआ ने अपने दोनों पैरों से रितेश की कमर को कस के जकड़ रखा था और जोर-जोर से सिसकियाँ ले रही थी. और बोले जा रही थी- आअह्ह्ह्ह…कमीने! मेरी जान निकाल दी… और जोर से कर..उफ्फ्फ …उफ्फ्फ

रीतेश- मजा आ रहा है न डार्लिंग?

बुआ- हां रे! तूने मुझे जिंदगी का सबसे हसीं सुख दिया है.

बुआ कि सिसकियाँ बहुत तेज चल रही थी. चोदते समय रितेश का पेट बुआ के पेट से टकरा रहा था और इसकी वजह से एक सेक्सी आवाज़ किचन मे गुंज रही थी. फिर बुआ की चूत से रितेश ने लौड़ा बाहर निकाल लिया और बोला – डार्लिंग! अब तुम मेरे ऊपर आओ.

बुआ झट से उठी और उसके लौडे पर बैठ गई. एक झटके में पूरा लंड बुआ की चूत मे समा गया. बुआ ने जोर से एक सिसकारी ली और लंड पर झटके देने लगी.