मेरी सेक्सी मकान मालकिन

जैसे ही उनके सॉफ्ट बूब्स मुझसे टच होते तो मेरी तोप सलामी देने लगती. अब वो भी सब समझ गई और अब वो भी शायद मजे लेने लगी थी…

हेलो दोस्तों, अन्तर्वासना पर यह मेरी पहली कहानी है. मैं काफी समय से यहां कहानियों का आनंद ले रहा था, तो मैंने सोचा कि अपनी भी कहानी का आप सब को लुत्फ़ उठाने का मौका दूं. इसीलिए मैं अपनी कहानी लिख रहा हूँ, उम्मीद है कि आप सबको पसंद आएगी.

मेरा नाम रोहन है और मैं ग्वालियर से हूँ, लेकिन फिलहाल इंदौर में रह रहा हूँ और इंदौर के एक नामी कॉलेज से एमबीए कर रहा हूँ. मेरी उम्र है 24 साल है. आप लोगों का ज्यादा समय न लेते हुए अब कहानी पर आता हूँ.

बात है 2 साल पहले की है, जब मैं इंदौर में नया – नया आया था. यहां मैंने किराये पर एक कमरा लिया था. मकान मालिक की उम्र कम थी इसलिए उन्हें मैं भैया कह कर बुलाता था. उनका नाम मनोज था और उनकी मिसेज को मैं भाभी बुलाने लगा. उनका नाम साक्षी था और उनका 5 साल का एक बच्चा था.

यार, भाभी को देख कर इंसान सोचना ही बंद कर दे. वो इतनी मस्त थीं कि मैं जो भी बयां करूं वो भी बहुत कम ही होगा. उनका फिगर 34-30-36 था. कुल मिलाकर वो चलता फिरता बवाल थीं.

उनके साथ उनकी एक दोस्त भी आती थी. जिसका नाम रश्मि था. वो भी बहुत ही मस्त थी. शायद भगवान ने इन दोनों को बड़ी फुरसत से बनाया था, जिन्हें देखकर ही आदमी पर पागलपन छा जाता था. धीरे – धीरे भाभी से मेरी थोड़ी बहुत बात भी होने लगी थी.

वैसे मैंने आपको अपने बारे में तो अभी बता ही नहीं पाया. माफ़ करना दोस्तों, वो दोनों थीं ही ऐसी के कोई भी तारीफों में खो जाये. दोस्तों, मैं बहुत चूजी हूँ मुझे हर लड़की, भाभी या आंटी पसंद नहीं आती. मैं तो एक नम्बर माल को ही हाथ लगता हूँ.

मेरी लम्बाई 5 फुट और 10 इंच है. मैं दिखने में भी किसी से कम नहीं हूँ. तभी तो उन परियों का दिल मुझ पर आ गया था.

दोस्तों, भैया जॉब करते हैं. वो मॉर्निंग में ऑफिस चले जाते हैं और रात में 9 बजे के बाद ही आते हैं. मेरा रूम ऊपर था तो जब भी भाभी कपड़े डालने या उठाने आती तो मैं उस समय अपना सब काम छोड़ कर छत पर आ जाता और उनको देखता रहता. ऐसा बहुत दिनों तक चलता रहा.

एक दिन हवा की वजह से भाभी की पैंटी उड़कर मेरे गेट के सामने गिर गयी. जिसे मैंने देख लिया था, लेकिन तब भी भाभी के डर की वजह से उठाया नहीं था. शाम को जब भाभी कपड़े लेने आई, तब जैसे ही उन्होंने अपनी पैंटी जमीन पर देखी तो वो उठाने लगीं. उस समय मैं भी गेट के सामने ही बेठा था तो जैसे ही वो पैंटी उठाने को झुकीं वैसे ही उनकी नजर मेरे ऊपर पड़ गई और वो शरमा गयीं.

फिर वो मुझसे शर्माने लगीं और इसके बाद जब भी मेरी उनसे बात होती तो वो हंस देतीं और मुझे निगाहें चुराती रहती थीं. उनका बच्चा तो खेलने में लगा रहता और भईया जॉब से रात में आते तो उनसे जब भी बात होती तो वो अकेली ही होती थी.

उसको अकेले देख कर मन करता था कि पकड़ कर चोद दूं, लेकिन कुछ हो ही नहीं पता था. एक दिन मैंने भाभी से बोला कि भाभी, आप बहुत सुंदर हो, तो वो बोली कि मुझे पता है और हंसकर चली गयी. जाते समय उनके पिछवाड़े को देखकर मेरा दिमाग हिल गया. जब वह चलती थी तब उसको मजा ही आ जाता.

अब मैं उनको लाइन मारने लगा. मुझे ऐसा लगता था कि वो भी मुझमे इंटरेस्ट ले रही थी क्योंकि जब भी उनकी फ्रेंड आती तो वे दोनों मुझे देखकर हंसने लगती.

फिर एक दिन मैंने भी हिम्मत करके भाभी को आँख मार दी. इस पर भाभी मुझे गुस्से में देखकर चली गईं. तो मैं डर गया और सोचा कि कहीं भईया को न बोल दे. मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ. अब तो मेरी हिम्मत और बढ़ गयी.

एक भाभी को अपनी फ्रेंड के यहाँ दिन में खाने पर जाना था तो भैया ने बोला कि मैं उनको छोड़ दूं और मैंने उनको हॉ बोल दिया. जब भाभी तैयार होकर निकलीं तो उन्होंने एक ट्रांसपैरेंट रेड साड़ी पहन रखी थी. मैं तो कसम से उनको देखता ही रह गया. फिर भाभी मेरे पास आईं टैब जाकर मेरा अपना ध्यान आया.

फिर मैं अपनी बाइक से उनको लेकर निकल गया. रास्ते में मैंने भाभी को उस बात के लिए सॉरी बोला तो वो बोली, “कोई बात नहीं, ये उम्र ही ऐसी है. सब चलता है यार.” फिर मैं उनसे और फ्रैंक होने लगा और जानबूझ कर ब्रेक लगाने लगा.

जैसे ही उनके सॉफ्ट बूब्स मुझसे टच होते तो मेरी तोप सलामी देने लगती. अब वो भी सब समझ गई और अब वो भी शायद मजे लेने लगी थी.

जैसे ही हम उनके फ्रेंड के यहाँ पहुंचे तो मैं देखकर शॉक हो गया. ये तो वही आईटम थी. भाभी की बेस्ट फ्रेंड. फिर मैं वहां से निकल आया. अब मैं मौके की तलाश में था कि कब भाभी को पकड़ कर चोद दूं.

आखिरकार मुझे मौका मिल ही गया. भाभी जैसे ही शाम को कपड़े उठाने आई. मैंने उनको अपने रूम में बुलाया और गेट बंद कर दिया. अब भाभी डर गईं और बोली कि ये सब क्या हैं!