मेट्रो की भीड़ में खूबसूरत लड़की की गांड मारी

दोस्तो, मैं आपका दोस्त हर्ष दिल्ली से आपके लिए अपनी एक आपबीती ले कर आया हूँ. यह घटना मेरे साथ दस दिन पहले ही उस वक्त हुई थी, जब मैं अपने ऑफिस से अपने घर के लिए एमजी रोड से मेट्रो में चढ़ा था.

जो लोग दिल्ली से हैं, वो सभी जानते हैं कि गुड़गांव से दिल्ली के लिए शाम के वक़्त बहुत भीड़ होती है.

उस दिन मैं जैसे ही मेट्रो में चढ़ा, उस मेट्रो में बहुत भीड़ थी. मैं धीरे धीरे जगह बनाता हुआ एक साइड में खड़ा हो गया. एक स्टेशन के बाद और भीड़ आ आई, जो कि एक दूसरे के ऊपर चढ़ने को आमादा थी.
इस भीड़ में एक बड़ी ही खूबसूरत लड़की थी, जो कि 24-25 साल की थी. उसने शॉर्ट स्कर्ट पहनी हुई थी. वो लड़की बड़ी ही पतली सी थी. उसकी उभरी हुई गोल सी गांड बहुत ही शानदार लग रही थी. मैं भी वहीं खड़ा था और उसकी गांड को देख रहा था.

इतने में ही वो लड़की मेरे आगे आकर खड़ी हो गई. मेरी तो जैसे लॉटरी निकल पड़ी. इस वक्त मेरी साँसें ऊपर की ऊपर और नीचे की नीचे रह गयी थीं. मैंने उस दिन बिना अंडरवियर के पैंट पहनी हुई थी, जो कि मेरी हैबिट भी है. उसे अपने करीब देख कर ही मेरा लंड खड़ा हो गया.

जैसे ही वो मेरे सामने आई, मेरा 6 इंच का लंड और उसका सुपारा, जो कि बहुत मोटा है सलामी देने लगा. चूंकि भीड़ बहुत ज़्यादा थी और वो हिल डुल भी रही थी. उसकी उभरी हुई गोल गांड मेरे लंड के सामने आकर सैट हो गयी. उसकी गांड की फांक महसूस करके अब तो मेरा लंड भी पूरा खड़ा होकर उसकी गांड के छेद पर जा लगा. मेरे मुँह से एक गरम और हल्की सी आअहह निकल गई. मुझे ऐसा लगा, जैसे मेरा लंड कहीं रूई में जा धंसा हो.

सच पूछो दोस्तो, मुझे तो जन्नत का मज़ा आ गया. मैं थोड़ा और आगे हो कर खड़ा हो गया और लंड को उसकी गांड में ज़ोर से घुसा दिया. मुझे लगा शायद उसे भी बड़ा मज़ा आया. भीड़ ज़्यादा होती जा रही थी. मेरा टाइट और शानदार लंड उसकी गांड में घुसता जा रहा था.

मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था, उसने अपनी गांड मेरे लंड पर उठा कर रख दी. मेरा लंड पूरा गर्म हो चुका था. वो मेरे लंड को एंजाय कर रही थी. मैंने महसूस किया कि उसने भी अपनी गांड मेरे लंड पर उठा कर पूरी सैट कर कर दी.

मैंने लंड को तुनकी दी तो वो आगे से बोली- यार बहुत मज़ा आ रहा है.. बस तुम थोडा लंड और अन्दर तक मेरी गांड में डाल दो, मैंने भी अन्दर पेंटी नहीं पहनी हुई है. उसकी बात सुनकर मैं तो एकदम हैरान रह गया.

बस फिर क्या था, मैंने सोच लिया कि आज तो पक्का लॉटरी लग गयी.. ये तो खुद चुदवाना चाह रही है. इतनी खूबसूरत लड़की खुद मेरे लंड से चुदवाना चाह रही है.. तो मैं क्यों पीछे हटूं.

मैंने फॉरन अपना लंड बाहर निकाल कर अपने हाथों में लिया और अपने मुँह से थोड़ा थूक निकाल कर अपने लंड में लगा दिया. मुठिया कर मैं लंड को थोड़ा और मोटा करने लगा. फिर मैंने अपने मोटे हो चुके लंड को उसकी स्कर्ट के नीचे से उसकी टाइट गांड में लगा दिया. उसकी गांड का छेद बहुत ही टाइट था. मैंने अपना लंड उसकी गांड में सैट किया उसने भी गांड मटका कर लंड को छेद पर फिट करवा लिया. मैंने थोड़ा सा धक्का मारा तो मेरा लंड उसकी गांड में अन्दर चला गया.. लेकिन बहुत ही मुश्किल से जा पाया था.

उस साली ने बड़ी आसानी से अपनी गांड थोड़ा और आगे कर दी. मेरे लंड को अपनी गांड में डलवाने के लिए उसने मुझे पूरा सपोर्ट किया. वो गांड मरवाने में पूरी खिलाड़िन लग रही थी. मैंने इधर उधर देखा कि कोई हमें नोटिस तो नहीं कर रहा है. बस फिर मैंने थोड़ा सा और धक्का लगा कर अपना आधा लंड उसकी गांड में सरका दिया. वो अपनी तरफ़ से मुझे पूरा सपोर्ट कर रही थी.

मैंने फिर थोड़ा सा धक्का और दिया और इस बार मेरा पूरा लंड उसकी गांड में चला गया. अब मैं थोड़ा सा रुका और मैंने पीछे देखा. क्योंकि अब मेरा इरादा अपना काम आगे बढ़ाने का था. मैंने धीरे धीरे धक्का मारना स्टार्ट कर दिया और अपने सीने को उसकी पीठ से लगा दिया.. क्योंकि मैं उसकी खुशबू अपनी सांसों में लेना चाहता था. उसने बड़ा ही प्यारा परफ्यूम लगा रखा था.

मैंने अपना काम चालू रखा और गांड मारने के लिए अपने धक्के थोड़े थोड़े और तेज कर दिए. वो मस्ती से मेरा साथ दे रही थी.

उसकी गांड का छेद बहुत ही टाइट था.. जिससे मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मैंने उसकी गर्दन पर किस करना स्टार्ट कर दिया, वो कमाल की लड़की थी. उसका जिस्म बहुत ही खूबसूरत और शानदार था. उसकी मक्खन जैसी गांड का तो जवाब ही नहीं था.

मैंने अपना हाथ आगे ले जाकर उसकी चुत में अपनी उंगली डाल दी और चूत को अपने उंगली से चोदने लगा. उसका मुँह मेट्रो की छत की तरफ़ था.

लड़की बहुत ही चालू थी यार… ना उसने आवाज़ निकाली और ना ही किसी को पता लगने दिया. वो खड़ी खड़ी मेरा छह इंच का लंड अपनी गांड में मजे से डलवाए जा रही थी. खैर वो जो भी थी, शानदार थी.

मैंने उसके कान में बोला- मज़ा आ रहा है?
वो भी पलट कर बोली- हां बहुत… बस अपना काम चालू रखो.. बोलो मत… बात मत करो.. वरना आगे पीछे वालों को पता चल सकता है.
मैंने बोला- ठीक है.. मेरी जान.

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