मॉम की चुदाई आंखों देखी

मॉम के मुँह से ‘खूब जोर से …’ और कई तरह की आवाजें निकल रही थीं. मॉम डैड का नाम लेकर कह रही थीं- आह … राजू मेरी जान … चोद दे अब तो जोर से … चोद दे डैड …
डैड भी लंड पेले जा रहे थे.
मॉम बड़बड़ा रही थीं- उई मॉम क्या करूँ आहह … मारो जोर से … चोद चोद दे राजू … आआह्ह … मर गईई … मज़ा आ गया राजू …

मॉम जब ज्यादा लाड़ में रहती हैं, तो मेरे डैड को राजू कह कर भी बुलाती हैं … चुदवाते हुए वो उन्हें राजू राजू पुकार रही थीं.

डैड का इतना बड़ा लंड होगा, मैंने तो कभी सोचा भी नहीं था. दूर से मुझे ऐसा लग रहा था, जैसे मॉम की चूत में कोई चिकना सा मोटा मूसल जैसा एक पिस्टन, उनकी चूत को पेलम पेल कर रहा हो. चूत में से फच फच की आवाज़ भी आ रही थी.

तभी डैड ने मॉम से कहा- तू घोड़ी बन जा … अब मैं तुझे पीछे से चोदूंगा.
मॉम झट से लंड के नीचे से निकलीं और घोड़ी सी बन गईं … और पलंग पर हाथ टेक लिए. मॉम की गांड हमारी तरफ दिख रही थी. डैड ने मॉम की गांड पर जैसे ही लंड रखा, वो उचक कर बोलीं- गड़बड़ नहीं करना.
डैड ने कहा- नहीं कोई गड़बड़ नहीं होगी.
तब फिर मॉम झुकीं, तो डैड ने थोड़ा सा नीचे से लेकर लंड को मॉम की चूत में पेल दिया और फटाफट धक्के पे धक्का मार कर चोदने लगे.

मेरी और परेजू की हालत ख़राब हो रही थी. हम दोनों ने ही चुदाई का सीन पहली बार ही देखा था और बहुत ही उत्तेजित हो रहे थे.

डैड मामी को जितना जोर से धक्का मार कर चोदते, उतनी ही मॉम की तरफ से सिसकारी और आनन्द का इज़हार होता. वो डैड को खूब उकसा उकसा कर चुदवा रही थीं. थोड़ी देर तक चुदाई के बाद डैड ने जल्दी जल्दी चोदना शुरू किया और लगा जैसे कि उन्हें कंपकंपी सी आ गई हो. वे रुक गए और लम्बी सी आह के साथ झड़ गए. मॉम भी करीब करीब तभी निढाल सी होने लगीं. डैड ने अपना लंड धीरे धीरे निकालना शुरू किया. लंड तो ऐसा लग रहा था, जैसे निकलता ही जा रहा हो और बहुत ही लम्बा होता जा रहा हो. पर सच बताऊं … डैड का लंड था बहुत सुन्दर.

अब हमने सोचा कि यहां से हट जाना चाहिए. मैं आगे आगे चली, पीछे से परेजू को बुलाया और हम दोनों परेजू के कमरे में आ गए. वहां मैं परेजू से चिपट गई और बोली कि भाई मुझे भी ऐसे ही प्यार करो.

परेजू ने मुझे चूम चूम कर ऐसा कर दिया कि अब तो कोई भाई था न बहन थी. बस एक मर्द था और एक लड़की थी. उस दिन पहली बार उसने मुझे चोदने की कोशिश की. हालांकि चुदाई तो नहीं हो सकी … लेकिन चुदाई से कुछ कम भी नहीं हुआ.

इस चुदाई की अधूरी घटना कभी फिर बताऊँगी. हां इसके बाद लगभग रोजाना ही हम दोनों चुदाई करते थे. किसी को कोई शक नहीं हुआ क्योंकि भाई बहन तो थे ही. एक ही घर भी था.
आपके मेल का इन्तजार रहेगा.

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