नियोगी बाबा का अशुद्धिकरण योग

सुजाता ने अन्दर जाते ही हेयर रिमूवर क्रीम अपनी बगलों और चूत के ऊपर के बालों पे लगाकर उन्हें साफ़ किया. फिर उसने अपने पूरे बदन पे मलाई लगायी. और फिर नहा ली. फिर उसने बाबा के कहेनुसार फूल से अपने होठों को छुआ. अचानक उसे बाबा की कही बात याद आ गयी “जिसे तुम फूल समझ रही हो वो मैं ही हूँ”. सुजाता को अपने बदन में एक सिहरन सी महसूस हुयी. फिर उसने फूल को अपने निप्पल और फिर अपनी चूत पे स्पर्श कराया. उसे एक अजीब सा रोमांच हो रहा था. फिर वो कपड़े पहन कर बाहर आ गयी. और बाबा का ध्यान करने लगी.

सबकुछ तीन दिनों तक बताये गए नियमों के हिसाब से चलता रहा. सुजाता चौथे दिन फिर से बाबा के पास उपाय जानने के लिए पहुंची.

बाबा ने उसे बैठने को कहा और अपने सारे शिष्यों को कमरे से बाहर जाने को कहा. बाबा के चेहरे पे काफी गंभीरता के भाव थे.

सुजाता ने कहा- बाबा आपके बताये गए प्रत्येक नियम का पालन मैंने पूरी निष्ठा से किया. क्या कोई उपाय पता चला.

बाबा- मुझे पता है. मैंने कहा था न वो फूल नहीं मैं ही हूँ. उस फूल के माध्यम से मुझे सब दिख रहा था.

सुजाता शरमा गयी. लेकिन बाबा अभी भी गंभीर बने हुए थे.

बाबा ने सुजाता को अपने पास बुलाया और कहा- सुजाता! मैंने 3 दिनों तक ध्यान लगाया. लेकिन हर बार तुम्हारे कष्ट निवारण का जो उपाय मुझे ध्यान आया. वो अत्यंत कठिन है.

सुजाता- बाबा! आपके द्वारा बताया गया हर उपाय मैं करने को तैयार हूँ.

बाबा की आखों में अचानक से आंसू आ गए. सुजाता ये देखकर काफी बेचैन हो उठी और उनके आंसू पोछने लगी. बाबा ने उसे रोक दिया और कहा- हे नारी! तुम्हारा सतीत्व सुरक्षित रहे. तुम महान हो! और इसी लिए मैं तुमसे उपाय बताने का साहस भी नहीं कर पा रहा हूँ.

सुजाता की बेचैनी बढती जा रही थी. उसने बाबा के पैर पकड़ लिए और रोने लगी. और कहने लगी- बाबा मैं अपने परिवार का दुःख नहीं देख सकती. कृपा करके मुझे उपाय बताएं!

बाबा ने एक गहरी सांस ली और कहा- सुजाता आज तक तुम पवित्र हो. लेकिन तुम्हारे पति को जो भी नौकरी मिल सकती है उन सब में कुछ न कुछ अशुद्धियाँ हैं. और तुम्हारी पवित्रता की वजह से उनका संयोग तुम्हारे पति के साथ नहीं मिल पाता. इसी वजह से तुम्हारे पति की पिछली नौकरी भी चली गयी थी. अशुद्धियाँ पवित्रता के साथ नहीं रहना चाहतीं.

सुजाता- मैं कुछ समझी नहीं प्रभु?

बाबा- तुम्हारी पवित्रता तुम्हारे पति के मार्ग में बाधक है. इसलिए तुम्हें भी अशुद्ध होना पड़ेगा!!

सुजाता- अशुद्ध? ..ल…लेकिन कैसे?

बाबा- तुम्हें अपने सतीत्व का त्याग करना होगा. पर पुरुष से शारीरिक सम्बन्ध बनाने होंगे. सम्बन्ध भी तुम्हें उसी पुरुष से बनाने होंगे जो कुछ विशेष मन्त्रों का उच्चारण अपने मन में कर सके.

सुजाता लगभग चीखते हुए- बाबा!! ये क्या कह रहे हैं आप?

बाबा- सत्य यही है और इसिलिये मैं तुम्हें ये उपाय नहीं बताना चाह रहा था.

सुजाता ने अपना सिर पकड़ लिया.

बाबा ने कहा- मुझे पता था! ये उपाय बहुत कठिन है. इसलिए अब तुम जाओ!!

सुजाता कुछ देर वैसे ही बैठी रही और सोचती रही. फिर उसने कहा- बाबा! मैं तैयार हूँ. लेकिन वो पुरुष कहाँ से लाऊँ जो मन्त्रों का उच्चारण कर सके?

बाबा मौन रहे. फिर सुजाता ने कहा- बाबा क्या आप मेरे साथ सम्बन्ध बनायेंगे?

बाबा ने क्रोध से कहा- ये क्या कह रही हो तुम?

सुजाता ने कहा- मुझे क्षमा करें प्रभु! लेकिन आपके सिवा मैं किससे ये प्रार्थना करूँ.

बाबा ने कुछ देर मौन रखा और आखें बंद कर लीं. ऐसा लगा जैसे वो किसी अदृश्य शक्ति से बातें कर रहे हैं. फिर उन्होंने सुजाता से कहा- पवित्र शक्तियां आदेश दे रही हैं की मुझे ही ये अशुद्धि यज्ञ करना होगा, और वो भी आज ही!

बाबा सुजाता को अपने शयन कक्ष में ले गए. काफी आलिशान बेडरूम था उनका. खुशबूदार और ठण्डा. बाबा ने कहा- सुजाता! मुझसे जरा भी शर्माने की जरूरत नहीं है. इस यज्ञ से सिर्फ तुम्हारी देह अशुद्ध होगी. तुम्हारी आत्मा पवित्र ही रहेगी. इसलिए निस्संकोच अपने वस्त्र उतार दो.

ये कहकर बाबा ने अपने सारे कपड़े उतार दिए. सुजाता ने अपनी आखें बंद कर लीं. बाबा सुजाता के पास गए और बोले- तुम्हारा आखें बंद कर लेना स्वाभाविक है. लेकिन मेरे पास समय का अभाव है इसलिए तुम्हें जल्दी करनी होगी.

ये कह कर बाबा ने सुजाता की काली शीफान साड़ी को सुजाता की गोरी देह से अलग कर दिया. फिर सुजाता का पेटीकोट और ब्लाउज भी उतार दिया. अब सुजाता सिर्फ ब्रा और पैंटी में बाबा के सामने खड़ी थी. ये द्रश्य देखकर बाबा के लंड में तनाव आने लगा. उन्होंने सुजाता के अधरों को चूम लिया और सुजाता के हाथों में अपने लंड को पकड़ाते हुए कहा- तुम इसे वही फूल समझो जो मैंने तुम्हे दिया था. और उसी क्रम में अपने शरीर के उन अंगों से छुओ जिस क्रम में उस फूल से छूती थी.

ये कहकर उन्होंने सुजाता की ब्रा और पैंटी भी उतार दी. अब सुजाता ने बाबा के लंड को अपने होठों से छुआ. फिर अपनी चूचियों के बीच में दबाया और फिर खड़ीं होकर अपनी चूत से सटाने लगी. दोनों के मुह से सिसकारियाँ निकल रही थीं.

बाबा ने अचानक से सुजाता को अपनी गोद में उठा लिया और बिस्तर पे लिटा दिया. फिर सुजाता के ऊपर बाबा छाने लगा. उसके पूरे शरीर को अपने शरीर से रगड़ने लगे. तीन दिनों तक लगातार मलाई के उपयोग से सुजाता की त्वचा काफी चिकनी हो गयी थी. बाबा को काफी मजा आ रहा था. सुजाता ने अभी भी अपनी आखें बंद कर रखीं थी. इसलिए वो बाबा की आखों में उतर आई हवस को नहीं देख पा रही थी. ये हवस देखकर कोई भी बता सकता था की बाबा ढोंगी है है. और ये सारा दोंग उसने केवल सुजाता के शरीर को भोगने के लिए किया है.