नर्स सेक्स स्टोरी: गदर माल

वो एक कुर्सी लेकर मेरे पास बैठ गयी और मैं उसे गेम सिखाने लगा। बीच बीच में मौका पाकर मैं अपनी कोहनी से उसके चूचे हल्के से दबा देता था. हालांकि डर भी लगता था लेकिन लंड महाराज जो न कराये सो थोड़ा है।

फिर धीरे धीरे हम दोनों में बातें शुरू हो गयी। रोजी बोली- आप अपना मोबाइल नंबर दे दो, मैं घर पर जब गेम खेलूंगी, अगर कोई समस्या होगी तो तुमसे पूछ लूंगी.
मैंने ख़ुशी ख़ुशी उसे नंबर दे दिया और उसका मोबाइल नंबर भी ले लिया।

छुट्टी के दूसरे दिन उसका फोन आया- क्या हो रहा है सुन्दर साहब?
मैंने कहा- कुछ नहीं … बस तुम्हारे बारे में ही सोच रहा था। लगता है गेम बढ़िया तरीके से सीख गयी हो?
“हाँ … जब आप सिखाओगे तो बढ़िया ही सीखूंगी.”
और भी थोड़ी नार्मल सी बात हुई और उसने फोन रख दिया। मैं बहुत खुश था क्यूंकि बात शुरू तो हो गई थी।

फिर हमारी लगभग रोज ही बात होने लगी थी. कुछ दिन बाद फिर से हम दोनों की नाईट ड्यूटी एक साथ लगी थी। हमने फोन पर बात की और एक साथ ही पहुँचे.
उसने मुझे देखा और शरमाकर मुस्कुरायी. मैं भी मुस्कुरा दिया फिर हमने अपनी अपनी यूनिफार्म ली और अपनी अपनी ड्यूटी पर पहुँच गए। उसने अपनी ड्यूटी मेरे फ्लोर पर ही लगवाई थी. जैसे ही मैंने उसे देखा, मेरा मन खिल उठा।

अगली दो रातें कब कैसे निकल गईं, पता भी नहीं चला. हम लोगों ने बहुत सारीं बातें कीं. तीसरी रात को मैं करीब 1 बजे कॉफ़ी पीने नीचे ग्राउंड फ्लोर पर जा रहा था तो मैंने उससे पूछा- तुम भी चलोगी?
तो बोली- चलो।
9वें फ्लोर से एक लिफ्ट सीधा ग्राउंड फ्लोर पर जाती थी बीच में कहीं नहीं रूकती थी।
रोजी बोली- इसी से चलते हैं, बीच में कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा.
कहकर शरमा गई।

मैं उसके साथ लिफ्ट में चला गया. जैसे ही लिफ्ट बंद हुयी मैंने हिम्मत की (हिम्मत इसलिए क्यूंकि इससे पहले कभी मैंने ऐसा कुछ भी नहीं किया था) और रोजी को खींचकर गले से लगा लिया। वो एक टूटी हुयी बेल के जैसे मुझसे लिपट गई। कुछ देर मेरे हाथ उसकी पीठ पर चले और फिर अपने आप मैंने उसके दोनों नितम्बों को अपने हाथों में ले लिया और दबाने लगा। मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए, वो भी मेरा साथ देने लगी.

तभी लिफ्ट ग्राउंड फ्लोर पर पहुँच गयी और हमें अलग होना पड़ा। इतनी रात को अस्पताल में बहुत कम लोग होते हैं. मैंने देखा बाहर कोई नहीं है तो मैंने दोबारा लिफ्ट को 9वें फ्लोर के लिए चलाया जैसे ही दरवाजा बंद हुआ हम फिर एक दूसरे को किस करने लगे. मैं उसके नितम्बों को मसले जा रहा था.

कुछ ही देर में हम ऊपर पहुँच गए थे और तुरंत नीचे वापस आने लगे। मुझे लग रहा था मानो मुझे स्वर्ग की अप्सरा मिल गयी हो और मैं इन्द्र हूँ! उसे छोड़ने का मन ही नहीं हो रहा था।

अबकी बार जब हम नीचे आये और जैसे ही लिफ्ट का दरवाजा खुला तो दो लोग सामने खड़े थे हम लोगों को बाहर निकलना पड़ा. मन ही मन में मैं उनको गालियाँ दे रहा था। हम लोग कॉफी पीकर वापस अपने फ्लोर पर चले तो फिर उसी लिफ्ट में गए और फिर से एक दूसरे को किस करने लगे. अबकी बार मैंने उसकी गर्दन पर भी किस किया. जैसे ही मैंने उसकी गर्दन पर चुम्बन किया, वो सिहर उठी और फिर हमें अपना मन मारना पड़ा क्यूंकि फिर से हम अपने फ्लोर पर पहुँच चुके थे।

तीसरी रात अब काटनी मुश्किल हो रही थी. मेरी केबिन चूंकि उसके नर्सिंग स्टेशन के पीछे ही थी तो मैंने उसे फोन किया अब हम एक दूसरे को देखकर फोन पर बात करने लगे।
मेरे दिमाग में एक आईडिया आया, आज हमारी आखिरी नाईट शिफ्ट थी तो सुबह पास के मॉल में मोर्निंग शो देख सकते हैं। मैंने ये बात रोजी को बताई तो वो बहुत खुश हुई।

सुबह जब हमारी शिफ्ट ख़त्म हुई तो अगली शिफ्ट को हैण्डओवर हमने आराम से दिया जिससे मॉल में समय से पहुँच सकें।

वो कपड़े बदलकर जब सामने आई तो मैं देखता ही रहा उसको … लाल कुर्ती और काली जींस में गजब लग रही थी।

मॉल में पहुँचकर हमने पटियाला हाउस फिल्म की टॉप रो की कार्नर सीटें ले लीं। हमें कौन सा फिल्म देखनी थी. जैसे ही फिल्म शुरू हुई हमने एक दूसरे को किस करना शुरू कर दिया. मेरे हाथ उसके मम्मों पर चल रहे थे, मैंने उसकी कुर्ती में हाथ डालकर उसके मम्मों को दबाना शुरू किया.

रोजी मस्त होती जा रही थी। मस्ती में उसने पैन्ट के ऊपर से ही मेरा लंड पकड़ लिया और उसे दबाने लगी. मैंने पैन्ट की चेन खोलकर अपना लंड निकालकर उसके हाथों में दे दिया।
वो मेरे लंड से खेलने लगी. मैंने उसके सिर पर हाथ रखकर अपने लंड की तरफ दबाया, रोजी बड़े प्यार से मेरे लंड को मुंह में ले गयी और लोलीपोप के जैसे जीभ घुमा घुमाकर चूसने लगी।

मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी, थोड़ी ही देर में मेरे लंड ने उसके मुंह में पिचकारी छोड़ दी। उसने मुंह हटाने की कोशिश की लेकिन मैंने उसका सर अपने हाथों से दबा रखा था जिससे मेरा पूरा माल उसके मुंह में चला गया। उसको उल्टी सी होने को थी लेकिन उसने पूरा माल पी लिया.

और अचानक से रोजी ने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए. रोजी की जीभ मेरी जीभ पर घूमने लगी। मैं कभी उसके मम्मे दबाता तो कभी उसके नितम्ब दबाता था।
तभी फिल्म का इंटरवल हो गया, हमने अपने कपड़े ठीक किये और अपने अपने घर को चल दिए।

Pages: 1 2 3 4 5

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *