नर्स सेक्स स्टोरी: गदर माल

शाम को रोजी की कॉल आई.
मैंने पूछा- कैसा लगा आज?
उसने कहा- बहुत अच्छा लगा। कल का क्या प्रोग्राम है?
मैंने कहा- अभी तो कोई प्रोग्राम नहीं है, तुम आ जाओ तो बना लेंगे प्रोग्राम।

रोजी थोड़ा सोचते हुए बोली- कहाँ मिलेंगे?
मैंने कहा- मेरे रूम पर आ जाओ, दिन में यहाँ कोई नहीं होगा, मेरे सारे दोस्त अपने अपने ऑफिस में होंगे. बस मैं और तुम!
वो बोली- ठीक है, कल आती हूँ, मैं आते समय कॉल कर लूंगी, रास्ता बता देना।
मैंने कहा- ठीक है।

मैं मन ही मन बहुत खुश था कि पहली बार किसी लड़की के साथ सेक्स करने की पूरी पूरी उम्मीद हो रही थी।

मैं शाम को बाज़ार गया एक पॉवर कैप्सूल, कंडोम और आइसक्रीम ले आया। शाम को ही मैंने अपने लंड महाराज का मुंडन भी कर लिया जिससे झांटों की समस्या न रहे। अगले दिन का सोच सोचकर मैं बहुत खुश हो रहा था आखिर पहली बार चूत मिल रही थी। लंड महाराज तो फूले ही नहीं समा रहे थे। कई बार मन किया मुट्ठ मार लूं फिर सोचा रहने दो कल तो मिल ही रही है चूत कल ही पूरा दम दिखाऊंगा।
बस यहीं गलती कर दी ‘मुझे मुट्ठ मार लेनी चाहिए थी.’ ये बात अगले दिन समझ में आई।

अगले दिन सुबह 9 बजे तक मेरे सारे मित्र अपने अपने ऑफिस को निकल गए तो मैंने रोजी को फोन किया- कितने देर में आ रही हो?
वो बोली- तुम्हारे ही फोन का इन्तजार कर रही थी, बस दो मिनट में निकलती हूँ।
मैंने उसे रास्ता बता दिया मैंने कहा- मैं कॉलोनी के गेट पर ही तुमको मिल जाऊँगा।

हम लोग नीचे के पोर्शन में रहते थे और मकान मालिक ऊपर रहा करते थे। दस बजे के बाद तो केवल आंटी ही रहतीं थीं जो दिन भर टी वी देखा करतीं थीं। तो कोई समस्या थी ही नहीं!
मैं थोड़ी देर बाद पॉवर कैप्सूल खाकर कॉलोनी के गेट पर पहुंचकर रोजी का इन्तजार करने लगा।

कुछ समय बाद रोजी स्कूटी पर आती हुई दिखाई दी. लाल टॉप और काली लाल छींट की लॉन्ग स्कर्ट चेहरे पर काला चश्मा देखकर गाना याद आ गया ‘गोरे गोरे मुखड़े पे काला काला चश्मा …’

मैंने उसे अपने पीछे आने का इशारा किया और वो स्कूटी लेकर मेरे पीछे पीछे आ गई. स्कूटी बगल वाले घर के बाहर खड़ी करके हम तुरन्त अन्दर चले गए. अन्दर आते ही मैंने कमरे को बन्द किया और उसे खींचकर अपने गले लगा लिया।

मेरे हाथ उसकी पीठ से होते हुए उसके चूतड़ों तक जा रहे थे, मैं उसके चूतड़ों को सहला रहा था। वो भी अपने हाथ मेरी पीठ, गर्दन और बालों में घुमा रही थी।

गले मिलकर हमें पता ही नहीं चला कि कब हम एक दूसरे के होंठों का रसपान करने लगे। उसके होंठ संतरे की फांकों जैसे रसीले थे। मेरे लंड महाराज पैन्ट फाड़कर बाहर आने को बेताब हो रहे थे लेकिन मैंने अपनी पैन्ट नहीं उतारी, मैं पहले रोजी को नंगी करना चाह रहा था।

होंठ चूसते हुए मैंने रोजी का टॉप उतार दिया. टॉप उतारते ही लाल ब्रा में कैद उसके मखमली दूध दिखाई दे गए। किस करते करते पहले तो थोड़ी देर ब्रा के ऊपर से ही धीरे धीरे उसके दूधों को सहलाने लगा फिर उसकी गर्दन को चूमता और चाटता रहा और रोजी मेरे बालों से खेल रही थी।

थोड़ी देर बाद मैंने उसकी ब्रा खोलकर उतार दी. अब उसके नंगे दूध मेरे सामने थे, मैंने एक दूध को अपने मुंह में लिया, उसके निप्पलों को ऐसे चूसने लगा जैसे अभी उनमें से दूध निकलेगा और दूसरे को हाथ से दबाने लगा।
कसम से यारो … ये लग रहा था जैसे मक्खन खा रहा हूँ.

जैसे ही मैंने उसके निप्पलों को चूसा, रोजी सीत्कार उठी- उम्म उम्म्ह… अहह… हय… याह… आअह!
दूध तो नहीं निकला लेकिन कसम से मजा आ गया।

रोजी के हाथ मेरे बालों में बहुत तेजी से घूम रहे थे। मैंने एक दूध के बाद दूसरे पर हमला बोल दिया. रोजी तड़प रही थी. अचानक मुझे ब्लू फिल्म के कुछ सीन याद आये तो मै उसके दूसरे दूध पर धीरे धीरे थप्पड़ लगाने लगा। उसे और भी मजा आने लगा रोजी की सिसकारियाँ बढ़तीं जा रहीं थीं। अब उसका एक हाथ मेरे बालों में था और दूसरा हाथ नीचे की तरफ बढ़ाकर उसने पैन्ट के ऊपर से ही मेरे लंड महाराज को पकड़कर सहलाने और दबाने लगी।

अब मैंने उसकी स्कर्ट को भी उतार दिया. स्कर्ट उतारी तो देखा उसने पेंटी भी लाल ही पहनी हुई थी। मैं पेंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को रगड़ने लगा। रोजी मेरे सिर को चूमे जा रही थी और बालों में बहुत तेजी से हाथ घुमा रही थी।

फिर मैंने उसको बिस्तर पर लिटाया और उसकी पेंटी भी निकाल दी। मेरे सामने साक्षात चूत थी जिसे अभी तक मैंने केवल ब्लू फिल्मों में या तस्वीरों में ही देखा था। हल्की सांवली दो फांकें जिनके बीच में गुलाबी चूत मैं सोचता था कि लोग कैसे चूत चूसते होंगे … घिन नहीं आती?
लेकिन दोस्तो, जब इतनी बढ़िया चूत सामने होती है तो जीभ अपने आप लपलपाती है।

मैंने भी अपना मुँह उसकी चूत पर लगा दिया और लगा चूसने। मुझे पता नहीं था कि कैसे चूसते हैं लेकिन फिर भी लगा रहा, जैसे जैसे मन किया वैसे वैसे चूसता रहा।
रोजी अपनी गांड उठा उठाकर चूत चुसवा रही थी तो इसका मतलब उसे भी अच्छा ही लग रहा था।

चूसना अच्छा लग रहा था लेकिन स्वाद समझ में नहीं आ रहा था।

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