ऑफिस के जूनियर को

जब अजय ने मुझे अपने ऑफिस की एक लड़की से मिलाया तो मुझे लगा शायद वह उसकी दोस्त है, अजय और गौतमी बहुत अच्छे से बात कर रहे थे। मुझे समझने में ज्यादा देर नहीं लगी कि इन दोनों के बीच में कुछ तो चल रहा है इसलिए मैंने उस वक्त अजय से इस बारे में बिल्कुल भी बात नहीं की, मैं अजय को कोने में ले गई और उसे पूछने लगी कि क्या तुम मुझे इस लड़की से मिलाने के लिए लाए थे। वह कहने लगा कि गौतमी की आज छुट्टी थी इसलिए वह भी मुझे कहने लगी कि मैं भी आपके साथ चलूंगी इसलिए मैं उसे अपने साथ ले आया लेकिन मुझे यह बात समझ आ चुकी थी कि अजय और गौतमी के बीच में कुछ तो चल रहा है लेकिन मैं गौतमी को यह बात नहीं कह सकती थी इसलिए मैंने उसे उस वक्त कुछ भी नहीं कहा और जब हम लोग घर आ गए तो मैंने अजय से कहा कि तुम मुझे आगे से कभी भी गौतमी से मत मिलवाना। अब मुझे समझ आ गया था कि मेरे पति और गौतमी के बीच में रिलेशन चल रहा है। मैंने जब उनकी फोन डिटेल चेक की तो उसमें वह दोनों बहुत ज्यादा बात करते हैं, मैं इस बात से बहुत दुखी थी लेकिन मुझे बिल्कुल भी समझ नहीं आया कि मुझे अजय से इस बारे में अच्छे से बात करनी चाहिए क्योंकि इसमें मेरी भी गलती है, मैंने भी अजय को बिल्कुल वक्त नहीं दिया और अब उसके बाद मैं भी अपने ऑफिस के कामों में ही लगी रही। मैं ऑफिस के काम में ही बिजी रहती थी। एक दिन संजय मेरे पास आया और वह कहने लगा कि आजकल आप मुझसे बिल्कुल बात नहीं कर रही है, मैंने उसे कहा कि तुम तो देख ही रहे हो कि कितना काम रहता है इसी वजह से मैं तुमसे बात नही कर पा रही हूं। कुछ देर बाद अब हम दोनों बात करने लगे थे। एक दिन मैंने संजय को अपने पति के ऑफिस में काम करने वाली लड़की, गौतमी के बारे में बताया तो वह कहने लगा यह तो बहुत ही गलत हुआ, मुझे संजय से बात करके बहुत अच्छा लगता था और उस दिन उससे बात करके मुझे बहुत हल्का लगा। मैं जब भी ऑफिस में होती तो संजय से ही बात करती थी और घर में भी जब मुझे वक्त मिलता तो मैं संजय को फोन कर लिया करती थी।

संजय मेरी भावनाओं को बहुत अच्छे से समझने लगा था मुझे भी उससे बात कर के अच्छा लगता था। एक दिन अजय कहीं बाहर गए हुए थे तो मैंने उसे अपने घर पर बुला लिया। जब वह घर पर आया तो कहने लगा कि आज आपने मुझे अपने घर पर क्यों बुला लिया। मैंने उसे कहा कि आज मैं बहुत ही उदास हूं और मेरा आज मूड बहुत खराब हो रहा है। मैंने उस से वाइन शॉप से शराब मंगा ली। मैंने बहुत ज्यादा शराब पी ली थी उस दिन मुझे बहुत नशा हो गया। संजय मेरे सामने बैठा हुआ था और मैंने उसके लंड को हिलाते हुए अपने मुंह में ले लिया। मै उसके लंड को चूसने लगी मैंने उसके लंड से पानी निकाल दिया। उसने भी मुझे अपने नीचे लेटा दिया और मेरे कपड़े खोल दिए। वह मेरे होठों को बहुत अच्छे से चूस रहा था और कुछ देर बाद मेरे स्तनों को भी चूसने लगा। उसने मेरे स्तनों का बहुत अच्छे से रसपान किया और मेरे स्तनों पर दांत के निसान भी मार दिए। उसने मेरे दोनों पैरों को चौड़ा किया और मेरी योनि को चाटने लगा उसे बहुत अच्छा लग रहा था। उसने जैसे ही अपने लंड को मेरी योनि के अंदर डाला तो मैं चिल्ला उठी और मुझे बहुत अच्छा लगने लगा। मुझे इतना अच्छा महसूस हो रहा था कि मैं उसका पूरा साथ दे रही थी। मैं अपने पैरों को चौड़ा कर लेती और वह मुझे बड़ी तेजी से चोदता। उसने मुझे इतनी तेजी से झटके मारे की मेरा पूरा शरीर दर्द होने लगा। वह इस प्रकार से मुझे चोदता तो मुझे अच्छा लगता। संजय का लंड मेरी योनि में जाता तो मुझे बहुत अच्छा प्रतीत होता। संजय कहने लगा कि मैडम आपकी चूत मार कर मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा है। उसने मुझे घोड़ी बना दिया जैसे ही उसने अपने लंड को मेरी योनि में डाला तो मैं चिल्ला उठी। वह मुझे बड़ी तेज गति से धक्के मार रहा था लेकिन हम दोनों की रगडन से जो गर्मी पैदा हो रही थी वह हम दोनों से ही झेली नहीं गई और हम दोनों ही एक साथ झड गए। जैसे ही संजय का वीर्य मेरी योनि में गया तो मुझे बहुत अच्छा लगा और उसका माल बहुत ज्यादा गर्म था।