पाँच लंड का असली मज़ा

दोस्तों मेरा नाम नेरश है और ये बात तब की है जब मैं 21 साल का था मैं उन दीनों बि.टेक. कर रहा था काफ़ी अच्छे दिन कट रहे थे मेरे सबसे अच्छे 4 दोस्त थे मेरे लिए उन दीनों मेरे दोस्त ही मेरे लिए सब कुछ थे, मेरी हाइट 5.8 इंच है और मेरी बॉडी भी काफ़ी अच्छी थी वैसे तो मैं कॉलेज में अभी तक काफ़ी लड़कियों को चोद चुका था पर मेरे दिल में हमेशा से एक आंटी या भाभी को चोदने की इच्छा थी। एक दिन की बात है उस दिन हमारे कॉलेज के बाहर एक छोटी सी चाय और समोसे कचोरी की दुकान थी हम सब दोस्त वहां पर बैठकर बड़े मज़े से समोसे खा रहे थे और साथ ही तोड़ा बहुत हँसी मज़ाक भी कर रहे थे तभी कुछ देर बाद वहां पर एक आंटी आई और वो वहां पर बैठकर चाय पीने लग गई उस आंटी को देखकर मेरा दिल मचल उठा, सच में काफ़ी ही ज़्यादा कमाल की थी वो, एकदम परी जैसी उम्र करीब 29 या 30 साल होगी और फिगर 34-32-38 होगा क्यूंकि उसकी गांड बहुत ज़्यादा बड़ी थी जो की सबसे मस्त लग रही थी मेरा 8 इंच का लौड़ा उसे देखकर खड़ा हो गया मुझे वो बहुत ही पसंद आ गई थी क्यूंकि वो बहुत गोरी भी थी उसके होंठ गाल देखते ही मेरा दिल कर रहा था अभी के अभी जाकर साली को चूस लूँ बस, मेरा दिल तो मचल उठा था इसलिए मैं उसे बैठे बैठे लाइन मारने लग गया था वो मुझे देख रही थी और मैं भी, मेरे दोस्त भी उसे चोदना चाहते थे इसलिए हम सबने तभी ग्रूप में सेक्स करने का प्लान बना लिया था उसके बाद मैं उससे आँखो ही आँखो में बात करने लग गया और वो भी मुझे बार बार देख रही थी कुछ देर बाद वो अपनी चाय पीकर और वहां से उठकर बाहर जाने लग गई हम पाँचो भी उसके पीछे पीछे निकल लिए वो वहां से एक ऑटो में बैठ गई और हम भी उसके साथ ही बैठ गये।

मैं उसके पास बैठा था मैं काफ़ी खुश था क्यूंकि ऐसी आंटी मैंने आज तक नहीं देखी थी सच में बहुत ही खूबसूरत थी आंटी, मेरा लंड अभी तक उसे देखकर सलामी दे रहा था फिर मैंने अपनी पूरी हिम्मत करके उसकी कमर पर हाथ रखा तो वो कुछ नहीं बोली, मैं काफ़ी खुश हो गया फिर मैं उसकी नंगी कमर पर हाथ घुमाने लगा क्यूंकि उसने साड़ी डाली हुई थी वो बिल्कुल भी मुझे नहीं रोक रही थी यह सब करने से, मैं अब उसकी कमर और बूब्स को धीरे धीरे मसल रहा था कुछ ही देर बाद हम बस स्टैंड पर उतर गये अब मैं ही उसके साथ आगे जा रहा था फिर मैं अपने दोस्तों को बुलाने के लिए उन्हें फोन किया पर तभी मुझे उस आंटी ने कहा प्लीज़ यार तुम ही मेरे साथ चलो प्लीज़, मैंने कहा नहीं हम पाँच है और तुम्हे आज पाँच लंड का असली मज़ा देंगें पहले तो वो आंटी मान ही नहीं रही थी पर मेरे बार बार कहने पर वो झट से मान गई फिर मैंने अपने दोस्तों को फोन करके अपने पास ही बुला लिया आंटी ने कहा की मेरा घर वहां से थोड़ी ही दूर है मैंने अपने दोस्त अमित को कहा की तू जाकर कॉन्डोम ले आ, आंटी बोली नहीं कॉन्डोम तो है मेरे पास मैंने पूछा कितने कॉन्डोम है वो बोली 10 पड़े है घर पर फिर मैंने कहा सिर्फ़ 10 ये तो अभी जाते ही लग जाएगें मेरी रानी, मेरी बात सुनकर वो मुस्कुराने लग गई फिर मैंने अमित को कहा की तू साथ में विशाल को भी ले जा और आते हुए 4 पैकेट कॉन्डोम और 6 बोटल बियर और साथ में कुछ नमकीन वगेरा भी ले आना फिर वो दोनों चले गये और मैं आंटी और मेरे 2 और दोस्त उसके घर आ गये हम सब सोफे पर बैठे थे फिर आंटी ने हमें पानी दिया और मैंने आंटी को खींचकर अपने पास बैठा लिया और फिर मैं उसके बूब्स दबाने लग गया मेरे साथ गगन भी बैठा था हम दोनों उसके बूब्स को मसल रहे थे और मैं उसके होंठो को चूस रहा था सच में काफ़ी मस्त माहोल बना हुआ था हम दोनों को आंटी को चूसते हुए 20 मिनट से ज़्यादा हो गये थे।

तभी गगन बोला यार उन दोनों को आने में काफ़ी समय लगेगा शायद, चल हम दोनों चुदाई शुरू करते है तभी आंटी बोली पहले मैं सिर्फ़ तुमसे चुदना चाहती हूँ। फिर मैं उसके साथ उसके कमरे में चला गया और आंटी ने अंदर से कमरे को बंद कर लिया वो पिंक कलर की साड़ी में काफ़ी हॉट और सेक्सी लग रही थी उसने अपना पल्लू नीचे गिरा दिया मैं उसे इस हालत में देखकर पागल सा हो गया मैं उसके पास गया और उसे अपनी बाहों में लेकर उसे ज़ोर से किस करने लग गया मैंने उसके होंठो को अपने दांतों से काटकर सूजा दिया फिर मैंने उसके ब्लाउज को भी उतारकर फेंक दिया और उसे कहा की ये अब मेरी जान अपनी साड़ी भी उतार दो, मैंने उसकी साड़ी पकड़ी और उसका चीर हरण कर दिया अब वो मेरे सामने सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में खड़ी थी। उसने मुझे कहा तुमने तो मेरे कपड़े निकाल दिए अब अपने भी निकाल दे, मैंने कहा तू ही निकाल दे मेरी जान फिर उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए मैं सिर्फ़ उसके सामने अंडरवियर में था उसने मेरा लंड अंडरवियर के बाहर से ही पकड़ लिया और बोली यार तेरा लंड तो काफ़ी बड़ा और मोटा लग रहा है ये सुनते ही मैंने उसे बेड पर धक्का देकर लेटा दिया और मैं उसके ऊपर आ गया और उसके होंठो और गर्दन को ज़ोर ज़ोर से चूसने और चाटने लग गया। सच में मुझे काफ़ी अच्छा लग रहा था फिर मैंने उसकी कमर में हाथ डालकर उसकी ब्रा खोल दी और उसके बूब्स उछलकर मेरे हाथ में आ गये, उसके मोटे और गोरे बूब्स देखकर मैं पागल सा हो गया मैं ज़ोर ज़ोर से उसके बूब्स को चूसने लग गया उसके दोनों बूब्स के निप्पल को मैंने अपनी जीभ से चाटा और अपने दातों से निप्पल को दबाकर मैंने उसकी जान निकाल दी। फिर मैं उसके बूब्स को अच्छे से चूसकर मैं सीधा नीचे उसकी चूत के पास गया मैंने बड़े प्यार से उसकी पेंटी को निकाल दिया उसकी पेंटी गीली हो चुकी थी मैंने उसकी पेंटी को सूँघा और मदहोश सा हो गया। फिर मैंने उसकी दोनों टांगो को पकड़कर खोला और उसकी चूत पर अपना मुहँ लगाकर उसकी चूत को चाटने लग गया आंटी पूरी तरह से पागल हो गई और उसने मेरा सिर पकड़कर अपनी चूत से लगा लिया और कुछ ही देर बाद उसका पूरा जिस्म अकड़ गया और उसकी चूत का सारा पानी मेरे मुहँ में भर गया फिर मैंने उसकी चूत को चाट चाटकर साफ कर दिया फिर अब उसकी बारी थी उसने मुझे बेड पर ही खड़ा कर दिया और अपने दोनों हाथों से मेरे अंडरवियर को उसने पूरा उतारा और फिर मेरे लंड को अच्छे से देखने के बाद उसने मेरे लंड को मुहँ में लेना शुरू कर दिया वो मेरे लंड को अच्छे से चूस रही थी मेरा लंड बीच बीच में उसके गले तक जा रहा था जिससे मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था।

Pages: 1 2

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *