पड़ोस की लड़की का डर

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मेरा नाम राहुल है मैं जयपुर का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 27 वर्ष है। मैं अपने पिताजी के साथ ही उनकी दुकान पर काम करता हूं, मुझे उनके साथ काम करते हुए दो वर्ष हो चुके हैं। मैंने जब से अपनी पढ़ाई पूरी की है उसके बाद से मैं उन्हीं के साथ काम कर रहा हूं। मेरे पिताजी की बहुत ही पुरानी दुकान है और उस पर वह काफी समय से काम कर रहे हैं। मेरी मां घर का काम संभालती हैं और मेरी छोटी बहन अभी स्कूल में ही पढ़ रही हैं। मैं अब अपनी दुकान का काम अच्छे से संभालने लगा था इसलिए मेरे पिताजी कई बार काम से बाहर भी चले जाते थे और मैं दुकान पर काम देखा करता था। मुझे भी अब काफी लोग पहचाने लगे थे क्योंकि मुझे काम करते हुए काफी समय हो चुका था। बीच बीच में मैं अपने दोस्तों को भी फोन कर लिया करता था और उनसे उनके हाल-चाल पूछ लेता था। जब कभी मेरे दोस्तों का मुझे फोन आता तो वह कहते कि तुम तो बहुत ही व्यस्त रहने लगे हो और तुम्हारे पास बिल्कुल भी समय नहीं है।

मैंने उन्हें कहा कि अब मैं दुकान पर ही रहता हूं इसलिए मुझे समय नहीं मिल पाता। सुबह मैं घर से निकल जाता हूं और शाम को ही मेरा घर लौटना होता है। मेरे कॉलेज में जितने भी लड़के थे वह सब नौकरी कर रहे हैं और जब कभी वह मुझे मिलते हैं तो मुझे बहुत खुशी होती है। मैं जिस कॉलोनी में रहता हूं उस कॉलोनी में ही मेरे सामने वाले घर में एक लड़की रहती है, उसका नाम सुमन है। सुमन अक्सर हमारी दुकान में आती है और वह हमसे ही सामान लेकर जाती है। सुमन बिहार की रहने वाली है और वह जयपुर में किसी सरकारी विभाग में काम करती है। मैं जब भी सुमन को देखता हूं तो मुझे उसे देख कर बहुत अच्छा लगता है। उसका रंग सांवला सा है लेकिन वह दिखने में बहुत ही सुंदर है। वह जब भी हमारी दुकान में आती तो मैं उसे देखकर बहुत खुश होता था और वह भी मुझसे मिलकर बहुत खुश होती थी। मैं कई बार उसके साथ मजाक भी कर देता था लेकिन उसे कभी भी बुरा नहीं लगता था।

जब कभी उसे कुछ सामान मंगवाना होता था तो वह मुझे ही फोन कर देती थी और कहती थी की तुम अपनी दुकान से मुझे सामान भिजवा दिया करो एक बार मैं रात को घर देरी से आया और जब मैं घर पहुंचा तो मैंने देखा कोई व्यक्ति हमारी कॉलोनी में इधर-उधर घूम रहा है, मुझे उस पर शक हुआ और जब मैं अपने घर में गया तो वह हमारे पड़ोस में ही रहने वाली आंटी के दरवाजे से झांक रहा था। मैंने देखा कि वह उनके दरवाजे की कुंडी को तोड़ रहा है, मैंने रात को जैसे ही उन आंटी को आवाज मारी तो वह वहां से भाग गया। जब वह भाग रहा था तो उसे लोगों ने पकड़ लिया और उसके बाद हमारी कॉलोनी के लोगों ने उससे पूछा कि तुम कहां से आये हो, वह सबको हाथ जोड़ने लगा और मेरे पिताजी ने कहा कि इसे पुलिस के हवाले कर दो, उन्होंने पुलिस स्टेशन में फोन कर दिया। जब पुलिस आई तो वह उसे अपने साथ ले गई। उसके बाद उन्होंने मुझे धन्यवाद कहा और कहा कि यदि तुम समय पर मुझे आवाज नहीं लगाते तो शायद वह व्यक्ति हमारे घर पर चोरी कर लेता क्योंकि वह आंटी भी घर पर अकेली रहती हैं इसीलिए वह बहुत डर गई थी। हमारे कॉलोनी के सब लोग बाहर इकट्ठा हो गए और आपस में बात करने लगे। सुमन भी बाहर ही थी। सब लोग आपस में बातें कर रहे थे और उसके बाद सब लोग अपने अपने घरों में चले गए। सुमन ने मुझे कहा कि तुमने बहुत ही अच्छा काम किया है यदि तुम समय पर आंटी को नहीं बताते तो शायद उनके घर पर चोरी हो जाती। उस दिन मैंने सुमन से भी काफी बात की है। रात भी काफी हो चुकी थी और मुझे सुबह अपने काम पर भी जाना था इसीलिए मैं अपने घर चला गया। जब मैं सोया तो सुबह मेरी नींद नहीं खुली और मैं लेट से उठा लेकिन मैं जल्दी से तैयार होकर अपनी दुकान में चला गया। मेरे पिताजी दुकान में ही बैठे हुए थे, वह कहने लगे आज तुम देरी से उठे, मैंने उन्हें कहा कि आज मेरी आंख नहीं खुली इस वजह से मुझे उठने में देरी हो गई। उन्होंने कहा कोई बात नहीं, उसके बाद मैं उनके साथ दुकान पर ही बैठा रहा। मैं उनके साथ दुकान पर काम करने लगा और कुछ देर बाद मेरे पिताजी कहने लगे कि मैं किसी काम के सिलसिले में बाहर जा रहा हूं, तुम काम संभाल लो, मुझे आने में लेट हो जाएगी। मैंने उन्हें कहा ठीक है आप चले जाइए, मैं दुकान पर काम संभाल लेता हूं।

उसके बाद मेरे पिताजी दुकान से चले गये और मैं दुकान पर ही बैठा हुआ था। उस दिन जब मैं घर लौटा तो मुझे सुमन दिखी और वह भी मुझसे बात करने लगी। हम लोग बैठकर काफी बातें कर रहे थे। हमारे कॉलोनी के बाहर पर ही एक बैठने की सीट है हम उस पर ही बैठे हुए थे और वह मुझसे काफी बात कर रही थी। मुझे भी सुमन से बात करके अच्छा लगा और वह मुझे कहने लगी कि कल की बात से मैं बहुत डर गई हूं। वह कहने लगी कि मैं भी अकेली ही रहती हूं इसलिए मुझे भी बहुत डर लगता है। मैंने उससे कहा कि डरने की कोई बात नहीं है क्योंकि यह घटना हमारी कॉलोनी में पहली बार ही हुई थी और सुमन को भी हमारे कॉलोनी में रहते हुए काफी समय हो चुका है। मैंने उसे कहा कि तुम्हें डरने की आवश्यकता नहीं है, हमारी कॉलोनी में आज तक कभी भी इस प्रकार की घटना नहीं हुई, यह पहली बार ही हुआ है। उस दिन हम लोग काफी देर तक बैठे रहे, उसके बाद मैं अपने घर चला गया। जब मैं घर गया तो मेरी मां ने मेरे लिए खाना बनाया हुआ था। मैंने हाथ मुंह धो कर खाना खाया और उसके बाद मैं अपने कमरे में चला गया। मैं कुछ देर अपने कमरे में बैठा हुआ था। उसके बाद मैं छत में चला गया क्योंकि उस दिन गर्मी बहुत हो रही थी इसलिए मैं छत में ही टहलने लगा।