पड़ोस में आई मस्त माल

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मेरा नाम दिनेश है मैं पुणे में रहता हूं, मेरी उम्र 32 वर्ष है और मैं एक शादीशुदा पुरुष हूं। मेरे घर में मेरे माता-पिता और मेरा छोटा भाई रहता है। मेरी पत्नी भी नौकरी करती है इस वजह से हम दोनों को साथ में कम ही समय मिल पाता है। मेरे पिताजी और मेरी मां का व्यवहार बहुत ही अच्छा है और वह हमारे साथ बहुत अच्छे से रहते हैं। उन्होंने बचपन से ही हमें कभी भी नहीं डांटा और ना ही कभी उन्होंने हमसे ऊंची आवाज में बात की है। जब से मेरी पत्नी हमारे घर पर आई है मेरी मां को काम में बहुत मदद मिल जाती है क्योंकि मेरी मां की कमर में बहुत दर्द रहता है इस वजह से उन्हें काम करने में काफी तकलीफ होती है। मेरी पत्नी ही घर का सारा काम करती है और उसके बाद अपने ऑफिस चली जाती है। मेरी शादी को भी लगभग दो वर्ष से ऊपर हो चुका है और हम दोनों ही रिलेशन में बहुत खुश हैं लेकिन हम दोनों के पास समय कम हो पाता है इसलिए हम दोनों बहुत कम मिल पाते हैं।

मैं भी एक कॉलेज में एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट में काम करता हूं। मुझे भी वहां काम करते हुए काफी वक्त हो चुका है। मैं जब भी कॉलेज में होता हूं तो मेरे साथ में जितने भी लोग काम करते हैं वह सब लोग अपने अपने घर की बात करते हैं और सब लोग हमेशा ही अपने घर की समस्याओं को एक दूसरे से शेयर करते हैं लेकिन मैंने कभी भी आज तक उन लोगों से कभी इस प्रकार की बात नहीं की क्योंकि मुझे ना तो इस प्रकार की कोई समस्या है और ना ही मुझे कोई तकलीफ, क्योंकी मेरे घर में सब लोग बहुत ही अच्छे हैं और मेरा जीवन भी अच्छे से चल रहा है, इसीलिए मैं कभी भी उन लोगों से इस प्रकार की बातें नहीं करता। एक दिन हमारे मोहल्ले में कुछ नए लोग रहने के लिए आये, जो कि हमारे सामने वाले घर में ही आए थे। उस दिन मेरी छुट्टी थी और मैं घर पर ही था। मैंने उस व्यक्ति से पूछा कि क्या आप शादीशुदा हैं, वह कहने लगे हां मैं शादीशुदा हूं और मेरे साथ में मेरी पत्नी के भाई भी रहते हैं। वह लोग साथ में ही काम करते हैं। उनका नाम राजेश है। मेरी उनसे एक दो बार मुलाकात हुई थी और एक दो बार ही मैंने उनसे बात की थी। कुछ दिनों तक तो वह लोग बहुत ही अच्छे से थे और हमारी कॉलोनी में सभी लोग बहुत ही अच्छे हैं।

हमारी कॉलोनी में कभी भी कोई शोर शराबा नहीं होता इसी वजह से सब लोग हमारी कॉलोनी की बहुत तारीफ करते हैं और कहते हैं कि आपकी कॉलोनी में सब लोग बहुत ही सभ्य और सामाजिक लोग हैं। हमारे ही पीछे एक और कॉलोनी है उसमें बहुत ज्यादा शोर शराबा होता है और वहां पर आए दिन झगड़े होते रहते हैं। हमारे कॉलोनी में जो व्यक्ति आए थे वह कुछ दिनों तक तो अच्छे से रहे लेकिन धीरे धीरे उन लोगों के घर से बहुत ही तेज आवाज आने लगी, पहले कुछ दिनों तक तो किसी ने भी कुछ नहीं कहा लेकिन अब उन लोगों के आपस में बहुत झगड़े होते थे। राजेश हमेशा ही शराब पीकर आते थे और उनके साले का हमेशा ही झगड़ा रहता था इस वजह से हमारी कॉलोनी में सब लोग परेशान होने लगे थे। जिस दिन हमारे कॉलोनी की मीटिंग थी उस दिन सब लोगों ने तय किया कि हम लोग पुष्कर के मालिक से बात करेंगे क्योंकि वह विदेश में रहते हैं और बहुत कम ही उनका यहां आना होता है लेकिन उनका नंबर हमारे कॉलोनी के एक व्यक्ति के पास था क्योंकि वह उनके परिचित हैं। उन्होंने कहा कि मैं उनसे इस बारे में बात करूंगा और आप लोगों को इस बारे में जानकारी दे दूंगा। हमारी कॉलोनी में हर हफ्ते मीटिंग होती थी और अगले हफ्ते उन व्यक्ति ने कहा कि मेरी उनसे बात हो चुकी है वह लोग उनसे घर खाली करवाने के लिए कह देंगे। फिर कुछ दिनों बाद उन लोगों ने वहां से घर खाली कर दिया और सब लोग बहुत ही सुकून से रहने लगे क्योंकि उन लोगों का बहुत ज्यादा शोर शराबा होता था, जिस वजह से बच्चों की पढ़ाई में भी दिक्कत होती थी और सब लोगों को भी बहुत दिक्कत होने लगी थी। मैं जब ऑफिस जाता तो हमेशा उन लोगों की ही बात करता था और कहता कि वह लोग बहुत ही असामाजिक तरीके के लोग हैं, वह इतनी गाली गलौज करते थे कि उनके घर से साफ-साफ सुनाई देता था इसी वजह से उन्हें सब लोगों ने वहां से खाली करवाने के लिए कहा। मेरा हमेशा की तरह ही अब अपने ऑफिस जाना और उसके बाद घर आना, यही लगा हुआ था।

मेरी छुट्टी के दिन मैंने अपने घर पर कहा कि आप यदि कहीं घूमने चले तो अच्छा रहेगा। उस दिन सब लोगों ने तय किया कि कहीं घूमने चलते हैं। उस दिन हम लोग घूमने के लिए चले गए और सब लोग साथ में ही थे। हम लोगों ने पहले मूवी देखी और उसके बाद हम लोग कुछ देर मॉल में ही बैठे रहे। समय का पता ही नहीं चला कब समय निकल गया। उस दिन मेरी अपनी पत्नी से भी काफी बात हुई और काफी लंबे समय बाद हम दोनों साथ में बैठकर इतनी बातें कर रहे थे, नहीं तो ऑफिस जाने के बाद मैं भी थक जाता था और मेरी पत्नी भी बहुत थक जाती थी। हम दोनों ही जल्दी सो जाते थे। हमारी काफी समय बाद इतनी बात हुई तो मुझे बहुत अच्छा लगा। जब हम लोग घूम कर वापस लौटे तो हमने देखा कि जिस घर में पहले राजेश का परिवार रहता था, उस घर में कुछ नए लोग रहने के लिए आ गए। मेरे पिताजी भी उनसे बात करने लगे और मैं भी उनसे बात करने लगा। उनकी पूरी फैमिली थी और उनकी दो लड़कियां थी जो कि 20 से 25 वर्ष की रही होंगी। मेरे पिताजी उनसे पूछने लगे कि आप क्या करते हैं, वह कहने लगे कि मैं बैंक में जॉब करता हूं और अभी मेरा ट्रांसफर यहीं हो चुका है। मैंने भी उनसे कहा कि यहां पहले कोई फैमिली रहती थी, वह बहुत ही शोर शराबा करती थी।

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