पड़ोसन के पति को फंसाकर चूत और गांड मरवायी

मैं भी घर का सारा काम करके के खुद को तैयार करने लगी. मैंने सोचा कि सेक्स ही तो करना है, ज्यादा कपड़े पहन कर क्या करना. मैंने रेड कलर की नई ब्रा पैंटी पहन ली और ऊपर से नाईटी पहन ली.

रात को 11 बजे कॉल आया कि भाभी जी आप दरवाजा खोल के रखो, मैं आ रहा हूँ.

मैंने जैसे ही दरवाजा खोला, शुभम जी तुरंत अन्दर चले आए. फिर दरवाजा बंद कर दिया.

दरवाजे को बंद करते ही वो मुझ पर टूट पड़े. शुभम मेरे होंठों को चूसने लगे. चूचियों को दबाने लगे. उनका लौड़ा मेरे नाभि पर ठोकर मार रहा था. मैं उनका साथ देने लगी. पांच मिनट दरवाजे पर चूमा चाटी के बाद उन्होंने मुझे गोद में उठाया और सीधे बेडरूम में ले गए. वहां उन्होंने मेरी नाइटी को निकाल दिया और मेरी चूचियों को ऊपर से दबाने लगे. फिर मेरी ब्रा को एक झटके में उतार कर एक तरफ फेंक दिया. वो मेरी चूचियों को पीने लगे. मैं मस्ती के उफान में गोते लगाने लगी. मेरे मुँह से चुदास वासना से भरी सिसकारियां निकलने लगीं. मैं ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ करने लगी.

वो मेरी चूचियों को बहुत जोरों से निचोड़ निचोड़ कर मेरा दूध पी रहे थे. मैं अपने एक हाथ से उनके बाल सहला रही थी और दूसरे हाथ से उनके लंड को मुट्ठी में भर कर दबा रही थी.

फिर शुभम जी ने अचानक से मेरी पैंटी को एक झटके में उतार फेंका और मेरी चूत को चाटने लगे. वो अपनी जीभ मेरी चूत के छेद में घुसाते निकालते हुए मजा देने लगे. साथ ही अपनी एक उंगली से मेरी चुत की दाने को छेड़ते जा रहे थे.

‘उफ्फ हाय …’ मैं मचलने लगी. काफी दिनों के बाद किसी ने मेरी चूत को छुआ था. कुछ मिनट की चूत चुसाई में ही मैं कांपते हुए झड़ने लगी. वो मेरी चूत का सारा रस पी गए. फिर वो उठे और अपने कपड़े उतार कर फेंक दिए.

शुभम जी बोले- जब भी तुम्हें देखता था … तो मेरा लंड तुझे सलामी देने लगता था. तुमको पटाने के लिए कब से सोच रहा था, लेकिन मुझे मालूम ही नहीं था कि तुम खुद ही पटने को मचल रही हो.

अब वो सिर्फ अंडरवियर में थे. मैं बिस्तर से उठ घुटनों के बल बैठ गयी. मैंने जैसे ही उनका अंडरवियर नीचे किया, वैसे ही उनका लंड हुंकार मारते हुए मेरे सामने खड़ा फनफना रहा था. शुभम जी का लंड लगभग 9 इंच लंबा 2 इंच के पाइप जितना मोटा था. उनका थोड़ा केले जैसा टेढ़ा था.

मैं लपक कर लंड को मुँह में लेकर किसी लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी. मैं अपने मुँह में सुपारे को लेकर चूस रही थी और एक हाथ से लंड को पकड़ कर गोल गोल घुमा रही थी.
वो बड़बड़ाये जा रहे थे- आह.. चूस चूस और चूस.. तेरी सहेली कभी नहीं चूसती.. आह खा जा मेरे लंड को.

मैं भी मस्ती से इस दमदार लंड को चूसे जा रही थी. फिर उन्होंने मेरे सर को पकड़ कर लंड को गले तक उतार दिया और मेरे मुँह को चोदने लगे. मैं सिर्फ उम्मम उम्मम की आवाज निकल रही थी.
थोड़ी ही देर में उन्होंने अपना लावा मेरे गले में छोड़ दिया. अपने लंड को पूरे गले तक उतार कर सारा रस मेरे अन्दर छोड़ दिया.

जहां तक मुझसे बन पाया, मैं उस वीर्य को पी गयी. फिर मुझे उबकाई सी आने लगी, तो मैं दौड़ कर बाथरूम में गयी और फिर वापस आ गयी.

वो बिस्तर पे बैठे हुए थे. हम दोनों थोड़े से थक गए थे, इसलिए मैं उनके पास बैठ गयी. मैंने उनसे पूछा- आप रात को सुषमा को छोड़ कर कैसे चले आए?
तो उन्होंने जवाब दिया- मैं उसको नींद की गोली दे कर आया हूँ. बेबी रात को करीब 3 बजे हमेशा उठता है. इसलिए कोई टेंशन वाली बात नहीं है.
मैं कुछ नहीं बोली.

वो बोले- सच में तुम्हारे साथ मजा आ गया.
फिर मैंने उनके लंड को हाथ लगाया, तो वो तुरंत फुफकारने लगा.
मैं बोली- अब इस लंड को मेरी चूत में डालो … और मुझे चोदो.
वो बोले- आप घोड़ी बनो, मुझे ऐसे करने में बहुत मजा आता है … लेकिन मेरी बीवी करने नहीं देती.
मैं बोली- ठीक है.

मैं झट से घोड़ी बन गयी. उन्होंने अपने लंड पर थूक लगाया और चुत के मुँह में लंड रख कर उसको अन्दर की ओर धकेल दिया. चुत गीली होने की वजह से लंड पूरा का पूरा अन्दर चला गया.

लंड बड़ा था, सो मेरी चीख निकल गयी. उन्होंने मेरी परवाह किये बिना चोदना शुरू कर दिया. मैं भी मस्ती में आकर आआहह करते हुए उनके मोटे लंड से चुदवा रही थी.

वो भी लगातार धक्के देते हुए बोल रहे थे- ले साली मेरा लंड खा.
मैं भी बोल रही थी- हां चोदो … और जोर से चोदो … चोदते रहो … मेरी चूत को आज भोसड़ा बना दो.

दस मिनट के चुदाई मैं झड़ गयी. उन्होंने अपना लंड निकाल कर मुझे आराम से झड़ जाने दिया. मेरा सर तकिये पर था, गांड पीछे तरफ उठी हुई थी. मेरी गांड का छेद खुल और बंद हो रहा था. वो मेरी गांड के छेद की हरकत को देख रहे थे.

फिर उन्होंने अपना लंड चूत में डाल कर नितंबों को फैला दिया, जिससे मेरी गांड का छेद खुल गया. उसमें उन्होंने अपना गांड के छेद पर थूक गिरा कर उंगली से अन्दर करने लगे.
शुभम जी बोले- मुझे आपकी गांड बहुत अच्छी लग रही है.. क्या मुझे आप गांड मारने दोगी?

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