पड़ोसन के पति को फंसाकर चूत और गांड मरवायी

मैं भी तो कब से यही चाह रही थी कि ये अब मेरी गांड मार दें. फिर भी मैं नखरा करते हुए बोली- नहीं नहीं … वहां दुखेगा.
तो वो बोले- बिल्कुल नहीं दुखेगा.. मैं बड़े आराम से अन्दर बाहर करूँगा. मैं मना करने लगी.

उन्होंने मुझे अपने मोबाइल में एक फिल्म दिखाई जिसमें लड़की गांड मरवाती है और जब लड़का लंड बाहर निकालता है, तो गांड का छेद बड़ा नजर आता है. वो मुझे वीडियो चोदते हुए दिखा रहे थे थे. उन्होंने मेज पर रखा बेबी आयल लिया और मेरे छेद में डाल कर उंगली से गांड चोदने लगे.

जब मेरा छेद अच्छे से तैयार हो गया तो एक झटके में सुपारे को मेरी गांड में डाल दिया. नौ इंच के मोटे लंड के घुसते ही मेरी चीख निकल गयी.

धीरे धीरे अन्दर करते हुए शुभम जी ने अपना पूरा लंड मेरी गांड में डालकर मुझे चोदना शुरू कर दिया. मैं तकिये पर सर रख कर दोनों हाथों से गांड खोल कर चुदवा रही थी. बीच बीच में शुभम जी लंड निकाल देते, जिससे गांड का छेद खुला का खुला रह जाता.

लंड निकलने से मेरी गांड के खुले छेद से अन्दर हवा जाती.. तो अन्दर ठंडक महसूस होती. जब शुभम जी लंड गांड के अन्दर डालते, तब मेरी पाद निकल जाती.

इसी तरह करीब 30 मिनट की लम्बी चुदाई मैं 3 बार झड़ी. अब शुभम जी ने अपनी स्पीड बढ़ा दी, जिससे मैं समझ गयी कि अब इनका भी होने वाला है. तभी वो कराहते हुए मेरी गांड में झड़ गए. हम दोनों वहीं बिस्तर पर निढाल पड़े रहे.

मैं उठ कर बाथरूम गयी. उनका वीर्य मेरी गांड से निकल कर टपक रहा था. हम दोनों ने एक दूसरे को साफ किया. फिर शुभम जी अपने कपड़े पहन अपने घर चले गए. मैंने नंगी पड़ी सो गई.

शुभम जी ये बोलकर गए थे कि किसी दिन और अच्छे से चुदाई करूँगा, अभी मेरा मन नहीं भरा है.
मैंने भी बोल दिया कि हां मेरा मन भी अभी प्यासा है.

यह मेरी सच्ची चुदाई की कहानी है. आप मुझे मेल कर सकते हैं.

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