पड़ोसन के साथ मिलकर सर्दी मिटाई

फिर थोड़ी ही देर के बाद वो भी मेरा साथ देने लगी थी और धीरे धीरे मेरे हाथ उसकी कमर पर चले गए। में उसकी पतली कमर को सहलाने लगा था, लेकिन उसने मेरे सामने बिल्कुल भी विरोध नहीं किया, जिसकी वजह से मेरी हिम्मत पहले से ज्यादा बढ़ गई और अब मेरा एक हाथ उसके बूब्स पर चला गया। दोस्तों वो तब भी चुप ही रही और मैंने छूकर महसूस किया कि उसके बूब्स बहुत ही नरम थे और यह मेरा पहला अनुभव था, जब में किसी के बूब्स को अपने हाथों से दबाकर उनके मज़े ले रहा था। अब मैंने उसको पूछ लिया क्या यह इतने नरम होते है? तब वो मुस्कुराते हुए कहने लगी और क्या? हाँ यह ऐसे ही होते है, अब तुम मेरे सामने ज्यादा नादान मत बनो। फिर उसी समय हमे कुछ शोर सुनाई दिया और हम लोग वो आवाज सुनकर तुरंत ही अपनी अपनी छत से नीचे चले गये। अब में नीचे अपने कमरे में आकर उसके साथ हुए पहली बार उस मज़े के बारे में सोचता हुआ ना जाने कब सो गया। मुझे पता ही नहीं चला। फिर अब तो हम दोनों हर कभी खुश होकर वो मज़े लेने लगे थे, जिसकी वजह से हम दोनों एक दूसरे के साथ पूरी तरह से खुल चुके थे। हमारे बीच अब वो दूरियां दिन निकलने के साथ साथ कम होती चली गई।

अब में किसी खास मौके के इंतज़ार में रहने लगा था, जिसका फायदा उठाकर में उसके साथ जमकर हमारी पहली चुदाई के मज़े ले सकता। फिर एक दिन मेरे घर सभी घर वाले हमारी अच्छी किस्मत से एक शादी में चले गये और वो लोग अगली दिन वापस आने की बात मुझसे कहकर मुझे अपने घर में अकेला छोड़कर चले गए। फिर मैंने उसको कहा कि आज हमारे पास बहुत अच्छा मौका है तुम मेरे घर आ जाओ और वो मुझसे पूछने लगी कि घर आकर क्या करना है? फिर मैंने उसको कहा कि हम दोनों मेरे घर में बैठकर आराम से बातें करेंगे और अकेले में हमे किसी का डर भी नहीं होगा। अब वो कहने लगी कि हाँ ठीक है में आ जाउंगी और कुछ देर के बाद वो मेरे घर आ गई और पहले तू हम दोनों ने आराम से बैठकर कुछ बातें हंसी मजाक किया। फिर मैंने उसके होंठो पर चूमना शुरू किया, जिसकी वजह से कुछ देर बाद वो भी गरम होना शुरू हो गयी और वो तुरंत ही मुझसे लिपट गयी। अब वो मुझे अपने गले से लगाकर उस मज़े मस्ती में डूबने पूरे पूरे मज़े लेने लगी थी। अब उसके बूब्स मेरी छाती से दब गये और फिर मैंने उसको बेड पर लेटा लिया और अब मैंने उसकी गर्दन और उसके चेहरे पर चूमना शुरू कर दिया।

अब मैंने उसके बूब्स को कपड़ो के ऊपर से ही दबाना शुरू कर दिया, जिसकी वजह से वो भी कुछ ही देर में वो गरम हो चुकी थी और फिर मैंने उसकी कमीज़ को ऊपर कर दिया। अब मैंने देखा कि उसने काले रंग की ब्रा पहनी हुई थी, मैंने पहले उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसके बूब्स को एक बार चूमा और फिर उसके बाद मैंने ब्रा को भी उतार दिया। फिर उसने भी मेरी शर्ट को उतार दिया और अब मेरे सामने उसके गोरे नंगे बूब्स थे, जिनके ऊपर में शुरू से ही बहुत फिदा था और बूब्स को पहली बार अपने सामने पूरा नंगा देखकर तो में पागल ही हो गया। अब में उसके एक बूब्स को चूसने लगा और दूसरे को अपने एक हाथ से दबाने लगा था और में बहुत देर तक उसके बूब्स के साथ वैसे ही मज़े करता रहा और कुछ देर के बाद मुझे जोश आने लगा था। अब नीचे मेरा लंड उसकी चूत पर कपड़ो के ऊपर से ही ठीक उसकी चूत के ऊपर था, में ऊपर से हिल रहा था और वो नीचे से हिल रही थी। फिर में अपना एक हाथ उसकी चूत पर ले गया। तब मुझे छूकर पता चला कि उसने अपनी सलवार के अंदर पेंटी नहीं पहनी थी और मैंने छूकर महसूस किया कि सलवार बहुत ज्यादा जोश की वजह से चूत वाले हिस्से से गीली हो चुकी थी। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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फिर कुछ देर में ही उसने अपनी चूत का पानी छोड़ दिया और वो थोड़ी सी ठंडी हो गयी। अब मैंने एक बार फिर से उसके बूब्स को चूसना शुरू किया, जिसकी वजह से वो कुछ ही देर में दोबारा से गरम होना शुरू हो गयी। फिर उसी समय मेरे घर की घंटी बज गई और मैंने उसको उधर ही छुपा दिया और मैंने जब जाकर दरवाजा खोलकर देखा तो उस समय मेरा एक चचेरा भाई बाहर खड़ा था। अब मैंने झूठे बहाने से अपने चचेरे भाई को उसी समय बाहर से ठंडा लेने भेज दिया और जब वो चला गया तो उसके बाद मैंने तुरंत ही किरण को उसके घर पर भेज दिया। दोस्तों उस दिन मुझे बड़ा दुख हुआ, क्योंकि में अपने हाथ में आने के बाद भी उसके साथ कुछ ना कर सका, लेकिन उसके बूब्स ने मुझे पूरा पूरा मस्त मज़ा दिया था। फिर इस तरह से हमारे दिन गुजरने लगे थे, हम दोनों मौका मिलने पर साथ में बैठकर बातें भी करते थे और कभी कभी चूमते भी थे, क्योंकि दोस्तों अब मौसम बहुत बदल चुका था, इसलिए हमें वैसे मौके अब कम ही मिलते थे। फिर एक बार मुझे पता चला कि उसके घर पर दो दिनों के लिए कोई भी नहीं है, उसकी मम्मी और बहन किसी काम से उनके गाँव चली गयी। अब घर में किरण और उसका एक छोटा भाई घर पर अकेले थे और जब किरण ने मुझे यह सब बताया तब मेरी खुशी की कोई ठिकाना ना रहा।