माँ और लंगड़ा सुथार की चुदाई देख कर मूत निकल गया मेरा

randi maa kisi or se chudai ki हम लोग जब इस घर में शिफ्ट हुए तो घर का बहुत सब काम बाकि था. पापा के जिस दोस्त के घर पर हम लोग किराए पर रहते थे उन्होंने मकान बेच दिया था. और नयी पार्टी को पजेशन की जल्दी थी. इसी वजह से मकान का काम अधुरा था तभी हम लोग यहाँ आ गए थे. वैसे सीमेंट, इलेक्ट्रिक वगेरह का काम हो गया था. सिर्फ फर्नीचर वगेरह रहता था. मेरी फेमली के अन्दर मैं, मम्मी और पापा बस तिन लोग ही हे. वैसे मेरी एक छोटी बहन थी. उसकी पैदाइश के वक्त माँ की हिस्ट्रेकटौमी हुई थी इसलिए वो फिर से प्रेग्नेंट नहीं हो सकती थी. जौंडिस की वजह से मेरी बहन 4 साल की थी तब मर गई. चलिए अब वापस आज के ऊपर आते हे.

मेरे पापा एक शेर ब्रोकर हे और उनका अपना ट्रेडिंग ऑफिस भी हे शहर के बीचोबिच. वो काफी नामी ट्रेडर हे और उनकी ऑफिस में किसी भी टाइम कम से कम 2-3 लोग होते हे पापा की शेर ट्रेडिंग को फोलो करने के लिए. पापा दिन में सिर्फ खाने के लिए और रात में सोने के लिए घर पर आते हे. माँ ने अपने टाइम पास के लिए एक पोमेरियान पिल्ला रखा हुआ हे वो दिन भर उसे घुमाती और खिलाती पिलाती रहती हे. मैं अभी कोलेज में हूँ और मुझे दोस्तों के साथ घूमना पसंद हे. बात डेढ़ महीने पहले की हे. पापा ने फर्नीचर के काम के लिए एक जानेमाने सुथार को घर पर लगाया था. उसका नाम मुकेश मिस्त्री था और वो डेढ़ पाँव का था. जी हां वो एक पैर से लंगड़ा चलता था. लेकिन उसकी कारीगरी का जवाब नहीं था. पापा ऑफिस चले जाते थे मैं कोलेज और मुकेश घर के अन्दर अपनी कारगिरी के लिए कभी दो तो कभी तिन मजदूरो के साथ में आता था. फिर मैंने देखा की लंगड़ा मुकेश अक्सर अकेला ही आता था. काम तो बहुत था पर वो हफ्ते में एक दो दिन अकेला ही आके लगा रहता था. पहले तो मुझे कोई डाउट नहीं हुआ लेकिन एक दिन मैं जो देखा वो देख के मेरे होश ही उड़ गए.

उस दिन मेरी कोलेज में दो लेक्चर फ्री थे. इसी वजह से मैं अपने रेग्युलर समय से डेढ़ घंटा पहले ही घर आ गया. आके देखा तो माँ का बेडरूम बंद था और उसका कुत्ता बाहर हॉल में सोया पड़ा था. ऊपर के कमरे से भी कोई हलचल नहीं आ रही थी, जिस रूम में सुथार का काम चालु था. मैंने अपनी बेग रखी और ऊपर चढ़ने को ही था की मुझे माँ की और सुथार की खुसपूस कान पर पड़ी! मैंने सुना तो मेरे होश ही उड़ गए. जैसे जैसे मैं सीड़ियों के ऊपर चढ़ा उनकी आवाज और भी क्लियर होती गई.

मुकेश: अरे आओ ना भाभी जी, और करीब आओ ना.

मम्मी: अब इतने दिन से करीब ही तो आ रही हूँ.

मुकेश: भाभी आप को जिस दिन पहली बार देखा तभी मुझे लगा की आप के अन्दर बड़ी हवस भरी हुई हे.

मम्मी: हां मैंने भी देखा था तुम्हे मेरे बूब्स को निहारते हुए, कुत्ते के जैसे लाळ टपका रहे थे.

मुकेश: आप के लिए ही कम मुनाफे में ये काम लिया हे.

मम्मी: हां मुझे चोद चोद के पैसे वसूल जो कर रहे हो!

और फिर मुकेश ने माँ को किस कर लिया. मैं अब दरवाजे के पास था और अंदर माँ सुथार के बाहों में थी वो की-होल से देख रहा था. ये दरवाजा कुछ दिन पहले मुकेश ने ही बनाया था जिसके अन्दर से मैं आज उसे और अपनी माँ को सेक्स करते हुए देख रहा था. माँ के बूब्स खुले हुए थे और मुकेश उसे अपने दोनों हाथ से दबा रहा था जैसे अन्दर से दूध निकालना हो. और उसका लंड माँ के हाथ में था.

मम्मी: जल्दी निपटा दो मेरा बेटा कुछ देर में ही आ जाएगा.

मुकेश: अरे हफ्ते में दो बार तो देती हो भाभी, फिर इतनी जल्दबाजी कैसी, एक तो आप के कुत्ते ने पुरे एक घंटे की मैया चोद दी आज!

माँ के बूब्स को छोड़ के अब मुकेश ने उसके सब कपडे खोल दिए. माँ एकदम नंगी थी लंगड़े सुथार के सामने और वो माँ की बिग गांड को पकड़ के दबा रहा था. माँ ने अब मुकेश के लंड को अपने हाथ से पकड़ के हिलाना चालू कर दिया. मुकेश बोला, हिलाओ नहीं सिर्फ अपने मुहं में भी ले लो इसे. माँ ने हंस के उसके तगड़े लौड़े को अपने मुहं में ले लिया. मुकेश की आँखे बंद हो गई और वो माँ को लंड से मुहं में चोदने लगा. पूरा लंड माँ के मुहं में डाल के वो झटके दे रहा था. माँ किसी रंडी के जैसे कोक सकिंग कर रही थी. बड़ा ही सेक्सी सिन था मेरी माँ की चुदाई का!

मुकेश ने दो मिनिट और मेरी माँ के मुहं को चोदा. और फिर उसने अपने लंड को मेरी मम्मी के दोनों बूब्स के बीच में फंसा दिया. वो माँ के बूब्स को दोनों तरफ से पकड़ के उन्हें चोदने लगा. माँ ने भी उसके लंड के ऊपर सही प्रेशर बनाने के लिए अपने बूब्स को दबाये. मुकेश बड़े मजे से माँ के टिट्स फक करता गया. ये भी उसने तिन चार मिनिट किया. और फिर अपने लंड को एक हाथ से पकड़ा उसने. और मेरी माँ के लेफ्ट बूब को दुसरे हाथ में पकड़ के वो उसके निपल के ऊपर लंड को घिसने लगा. माँ सिसकियाँ ले रही थी और वो मजे लुट रही थी इस सुथार के साथ में. मुकेश ने कहा, डार्लिंग तेरे पति से नहीं चुदवाती हे तू?

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