सच्चे प्यार की तलाश

दोस्ती और प्यार के बीच बड़ा बारीक सा फासला होता है. वो फासला तो हम तय कर चुके थे. दोस्ती में कोई डीमांड नहीं होती. एक दुसरे के गिले शिकवे स्थायी नहीं होते. लेकिन प्यार स्थायित्व मांगता है. एक दूसरे के भावनाओं की गहरी समझ मांगता है. मेरे पहले प्यार की छोटी सी दास्तान….

बात तब की है जब मे 10वीं कक्षा मे था. रोज अपने बेस्ट फ्रेंड के साथ ट्यूशन जाता था. कुछ दिनों तक तो सब ठीक था और मैं अपनी मस्ती में मस्त था, फिर अचानक मैने एक दिन एक लड़की को देखा जो मुझे देख रही थी. मैने अपने दोस्त को बताया तो उसने कहा यार ऐसा लग रहा है पहले भी इसे कहीं देखा है.

दुसरे दिन वो हमें 9 वीं कक्षा में अपनी दो दोस्तों के साथ बैठी हुयी दिखी. वो मुझे देख कर मुस्कुराई फिर हम चले आये.

शाम को ट्यूशन पे मैंने अपने दोस्त से कहा- यार इस लड़की का जरूर कोई चक्कर है. ये रोज हमें देखती है.

मेरे दोस्त ने कहा की तू उसके पास मेरी दोस्ती का ऑफर ले के जा. मेरा मन तो नहीं था लेकिन अपने बेस्ट फ्रेंड की इच्छानुसार जाना ही पड़ा. मैंने बड़ी मुश्किल से उसे रोक कर बात की.

अपने दोस्त की तरफ इशारा करते हुए मैंने कहा- मेरा फ्रेंड जो वहाँ खड़ा है, आप से दोस्ती करना चाहता है.

वो थोड़ा रुकी और बोली- मैं कल बताउंगी.

जब ये बात मैंने अपने दोस्त को बताई तो वो काफी खुश हो गया और बोला- भाई! लगता है, पट जायेगी.

फिर दूसरे दिन जब हम मिले तो उसने मुझे साइड में बुला कर धीरे से कहा- मुझे आप में इन्ट्रेस्ट है.

मैं तो हैरान रह गया और बोला- मैं कल सोच कर बताऊंगा.

फिर जब मैंने ये बात अपने दोस्त को बताई तो उसने कहा- ये तो अच्छा ही हुआ. वैसे भी मैं उससे फ्रेंडशिप करके उससे तेरी ही बात करता.

मैं उससे फ्रेंडशिप करने के लिए मान गया. अगले दिन हम स्कूल में मिले और मैने उसे बोला – ठीक है! लेकिन सिर्फ दोस्ती.

उसने मुस्कुराते हुए कहा – ओके! सिर्फ दोस्ती.

लेकिन उसकी मुस्कराहट में एक अजीब तरह का शरारतीपन था. फिर 3 दिन तक मैंने उससे कोई बात नहीं की. क्योंकि मुझे इस तरह का कोई अनुभव नहीं था. मेरी 10वीं के बोर्ड एग्जाम भी नजदीक आ रहे थे और मुझे ज्यादा इन्ट्रेस्ट भी नहीं था. लेकिन वो बहुत चालू थी. उसने पूरे ट्यूशन में ये बात फैला दी थी कि उसकी और मेरी बहुत अच्छी दोस्ती है और मैं स्कूल में भी उससे काफी बात करता हूँ. वो ट्यूशन पे नहीं आ रही थी मैंने उसे एक लेटर लिखा और ब्रेकअप कर लिया. मैं वापिस पहले की तरह अपने दोस्त के साथ मस्ती से रहने लगा.

फिर तकरीबन 1 साल तक मेरे और उस लड़की के बीच कोई बातचीत नहीं हुयी. अचानक 11वीं की परीक्षाओं के बाद मेरी एक क्लासमेट जो उस लड़की के घर के पास ही रहती थी, मेरे पास आयी.

और बोली- तुम उससे पैचअप कर लो! वो रोज मेरे घर पे आकर रोती है. वो बहुत अच्छी है. प्लीज वापिस उससे फ्रेंडशिप कर लो.

इस समय तक मेरे अन्दर भी जवानी का जोश उफान मरने लगा था और मैं भी थोड़ा बहुत हस्तमैथुन करने लगा था. इसलिए मैंने हामी भर दी, और उससे थोड़ी बहुत बातचीत शुरू हो गयी.

अब मैं 12वीं में पढने लगा था और वो 11वीं में. हमने आपस में नम्बर एक्सचेंज कर लिए थे. हम खूब बातें करते और एक दूसरे को मैसेज भी करते. एक दिन मैंने उसे कहा – आई लाइक यू!

वो काफी खुश हुयी प्रतिउत्तर में उसने भी “आई लाइक यू टू!” कहा.

हमने फ्रेंड्स के साथ एक डेट फिक्स की और साथ में एक मंदिर घूमने गए. कुछ दिनों बाद हमने एक दूसरे को आई लव यू बोल दिया. मुझे 15अगस्त का वो दिन आज भी याद है जब पार्क में हमने बारिश के बीच पहली बार एक दूसरे को किस किया. उसके बाद तो ऐसा नशा चढ़ा कि अक्सर हम स्कूल की असेम्बली बंक मार के एक दूसरे को काफी देर तक स्मूच करते रहते और खोये रहते. स्मूच के बाद हमारा रिश्ता एक दूसरे से गले मिलने तक पहुंचा. लेकिन हाय! हग करने के समय बस ऐसा लगता की पूरी दुनिया यहीं थम गयी हो.

अब हमारे चर्चे पूरे स्कूल में होने लगे थे. अब तो टीचर्स भी पूछने लगे थे कि मैं कहीं किसी गलत संगत में तो नहीं हूँ? फिर हमारे फेयरवेल का भी दिन आ गया. हम काफी उदास थे. उस दिन उसके घर कोई नहीं था तो हम 3 कपल उसके घर गए. औपचारिक बातचीत के बाद मैं उसे लेकर 1 कमरे में गया और कुण्डी लगाकर दरवाजा बंद कर दिया. वो थोड़ा इमोशनल थी इसलिए उसे सामान्य करने के लिए मैं उसे किस करने लगा. किस करते-करते मैंने उसे बेड पे लिटा दिया. फिर उसकी गर्दन पे और गर्दन के थोड़ा नीचे किस करने लगा. फिर उसके बालों से खेलने लगा.

मैने उसकी कुर्ती के 2-3 बटन खोल दिए. मैं उसकी चूचियाँ देखना चाहता था. उसने अपने हाथ मेरे लंड तक पहुंचा दिए थे. हालाँकि उसकी इस हरकत पे मैं चौंका था. मैंने ऊपर से ही उसकी चूचियों को सहलाना शुरू कर दिया. तभी किसी ने दरवाजा खटखटा दिया. उसने अपने कपड़े ठीक किये और बाहर चली गयी. लेकिन तब तक मेरा खड़ा हो चुका था. मैं उसके शांत होने के बाद ही कमरे से बाहर निकला. उस दिन मुझे पहली बार “खड़े लंड पे धोखा” का मतलब समझ में आया. हम सारे दोस्त अपने-अपने घर चले गए.

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