साली की चूत चुदाई का सपना पूरा हुआ

मैंने कई साल बाद अपनी साली को देखा तो साली की चूत चोदने के अरमान फिर जाग गए. साली की चुदाई का जो सपना मैंने देखा था उसको पूरा करने का मौक़ा मुझे कैसे मिला.

दोस्तो, मैं विजय कपूर एक बार से आप लोगों के लिए अपनी एक नई कहानी लेकर आया हूं.
मेरी पिछली कहानी
सुहागरात में फटी बीवी की फटी चूत का इलाज
को आपने इतना प्यार दिया उसके लिए आप लोगों को बहुत बहुत धन्यवाद.

यह कहानी एक गर्म प्यासी चूत की चुदाई के बारे में है. अब आपका ज्यादा समय न लेते हुए मैं अपनी कहानी को शुरू करने जा रहा हूं. कहानी में कहीं कोई कमी रह जाये तो मुझे माफ करें.

दस साल पहले जब मेरी शादी हुई थी तब मेरी साली हनीप्रीत बंगलौर में पढ़ रही थी. पढ़ाई पूरी होने के बाद उसको बंगलौर में ही नौकरी मिल गई. लगभग छह साल पहले उसकी शादी दिल्ली में रहने वाले एक युवक से हुई तो वह बंगलौर से दिल्ली आ गई.

शादी के दो-तीन महीने बाद ही गुड़गांव में उसने कोई कम्पनी ज्वाइन कर ली और दिल्ली से डेली अपडाउन करती रही. करीब साल भर बाद पुणे की किसी कम्पनी से अच्छा ऑफर मिला तो उसने पुणे जाकर ज्वाइन कर लिया.

पिछले पांच साल से हनी पुणे में रह रही थी और उसका पति दिल्ली में.

मैंने अपनी पत्नी से इस बारे में कई बार बात की कि हनी पुणे में है और उसका पति दिल्ली में. क्या मामला है, इनका परिवार कैसे बनेगा? पति पत्नी एक साथ नहीं रहेंगे तो गृहस्थी कैसे बनेगी?
मेरी पत्नी हमेशा एक ही जवाब देती- मुझे खुद समझ नहीं आ रहा और मम्मी से पूछती हूँ तो उनका भी ऐसा ही जवाब होता है.

इधर एक महीना पहले मेरी सास को दिल का दौरा पड़ा, ईश्वर की कृपा से उनकी जान बच गई लेकिन बाईपास सर्जरी करानी पड़ी और बीस दिन तक अस्पताल में रहीं.

मां की हालत की खबर सुनकर हनीप्रीत व उसका पति दोनों लोग एकदम से उनका हालचाल जानने के लिए आ पहुंचे. हनीप्रीत का पति तो दूसरे दिन लौट गया लेकिन हनी रुक गई. जिस अस्पताल में ऑपरेशन हुआ, वो मेरे घर से बहुत करीब था और मेरी ससुराल से काफी दूर.

व्यवस्था इस प्रकार से बनी कि रात को हनी अस्पताल में रुकती, सुबह नौ बजे मैं अपनी पत्नी को अस्पताल ले जाता और हनी को अपने घर ड्राप करके अपने ऑफिस चला जाता.
हनी नहा धोकर हमारे घर पर आराम करती.
शाम को छह बजे मैं ऑफिस से लौटता और अपने घर से हनी को लेकर अस्पताल जाता व अपनी पत्नी को वापस ले आता.

जब से मेरी शादी हुई थी, हनी के साथ मेरा रिश्ता नमस्ते-नमस्ते से अधिक नहीं था. हालांकि जब से शादी हुई थी हनी पर हाथ साफ करने की तमन्ना तो थी जो समय के साथ साथ ठंडी हो गई थी.

पिछले पांच छह दिन से हनी रोज मेरी बाइक पर बैठकर मेरे घर तक आती-जाती थी. इस दौरान ब्रेक लगाते समय उसकी चूचियां मेरी पीठ से टकराकर मेरी तमन्ना फिर से जगा रही थीं.

उस दिन अपनी पत्नी को अस्पताल छोड़कर मैं और हनी घर के लिए निकले तो मैंने तय कर लिया कि आज मैदान फतेह करना है. आमतौर पर मैं घर पहुंच कर ताला खोलकर चला जाता था. आज मैंने ताला खोला और मैं भी अन्दर आ गया.

मैंने हनी से कहा- आज मुझे थोड़ी देर से जाना है. तुम नहा लो, फिर चाय बना लेना, तो मैं चाय पीकर चला जाऊंगा.
हनी ने अपना गाउन और टॉवल उठाया और बाथरूम में घुस गई. नहाकर बाहर निकली तो उसके बालों से पानी टपक रहा था.

‘जहेनसीब’ कहकर मैं मुस्कुराया तो वो मेरी प्रतिक्रिया पर बोली- क्या हो गया?
मैंने कहा- माशाअल्लाह … तुम इतनी खूबसूरत हो! मैंनें तो आज ही ध्यान से देखा.

हनी को उम्मीद नहीं थी कि मेरे मुंह से अनायास ही उसके हुस्न की तारीफ में इतने रसीले शब्द टपकने लगेंगे.
वो मेरी ओर देखती ही रह गयी. मेरी नजरें उसके बदन को जैसे छूकर नापने लगीं.

नजरों के वार से वो खुद को बचा नहीं पा रही थी और उसका चेहरा लाल होने लगा था. उसकी बढ़ती हुई सांसों और बढ़ी हुई धड़कनों के साथ ही उसके ऊपर नीचे होते वक्ष इस बात के गवाह थे कि उसके अंदर मेरे शब्दों ने वासना की चिंगारी फूंक दी है.

उठ कर मैं उसके पास गया और उसके बदन को ऊपर से नीचे तक निहारने लगा. उसके बदन को मेरी नजरें मोर के पंख की तरह सहला सी रही थी जिसके स्पर्श से उसके बदन में झुरझुरी सी पैदा होने लगी थी.

उसके गाउन में उठे हुए उसके उरोजों की शेप और उसके उठे हुए नितम्बों से चिपके उसके गाऊन की मस्त से आकार को ताड़ते हुए मैं उसके करीब जैसे ही पहुंचा तो लंड में हलचल पैदा होनी शुरू हो गयी थी.

मैं हनी के पीछे पहुंचा और मैंने उसे अपनी बांहों में भर लिया. मेरी बांहों के घेरे में आते ही उसके बदन में करंट सा दौड़ गया और उसके गर्म से जिस्म की छुअन ने मेरे अंदर एक उन्माद सा पैदा कर दिया.

उसको बांहों में लेकर मैंने उसकी गर्दन को पीछे से चूम लिया तो वो आगे होते हुए अलग हो गयी.

मगर अब तो आग लग चुकी थी, अब मैं रुकने वाला नहीं था. मैंने उसको दोबारा से अपनी बांहों में जकड़ लिया और उसकी चूचियों को दबाते हुए उसकी गर्दन को चूमने लगा.

वो कसमसाते हुए बोली- क्या कर रहे हो जीजा जी!
मैंने मदहोशी में उसको चूमते हुए कहा- तुम्हें प्यार देने की कोशिश कर रहा हूं.
वो बोली- ये कहीं गलत तो नहीं है?
मैंने कहा- इतना नहीं सोचते. सिर्फ ऐसे पलों का आनंद उठाते हैं.