साली की चूत चुदाई का सपना पूरा हुआ

उसने मुझे चूत चोदने के लिए तड़पा कर रख दिया था. वो खुद भी लंड लेने के लिए मचल गयी थी. मैंने क्रीम की शीशी व कॉण्डोम का पैकेट लिया और उसकी चूत की चुदाई की तैयारी कर दी.

एक तकिया हनी के चूतड़ों के नीचे रखकर मैंने उसकी चूत पर जीभ फेरना शुरू किया तो वो बोली- आह्ह जीजू… अब और न तड़पाओ.
उसकी बात सुनकर मैंने अपने लण्ड पर क्रीम चुपड़ी और साली की चूत के द्वार पर लण्ड का सुपारा रखकर दस्तक दी तो उसकी चूत ने जवाब दिया- चले आओ दरवाजा खुला है.

मैंने धक्का मारा तो पहले धक्के में आधा और दूसरे धक्के में पूरा लण्ड हनीप्रीत की गुफा में समा गया.
जैसे ही मेरा लंड उसकी चूत की गुफा में उतरा तो वो उसके मुंह से निकल गया- जी…जू … आह्हह … कहकर हनी ने अपने चूतड़ उचकाने शुरू कर दिये.

चूत में लंड जाते ही उसके चेहरे के आनंद को देखकर मुझे समझते देर न लगी कि बहुत दिन से यह चुदासी है. मैंने हनी की कमर पकड़ ली और साली की चुदाई की ट्रेन चला दी. जैसे जैसे धक्के पड़ रहे थे वैसे वैसे ही उसके मुंह से जी…जू… उम्म्ह… अहह… हय… याह… जी…जू… की सिसकारियां निकल रही थीं.

वो बार बार मेरा नाम लेकर अपनी गांड को ऊपर उठाने लगी. उत्तेजना बहुत ज्यादा हो गयी थी. मैं ज्यादा देर तक नहीं टिकने वाला था. इसलिए जब मुझे लगा कि मेरा काम होने वाला है तो मैंने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया.

लंड को बाहर निकाल कर उस पर हार्ड डॉटेड कॉण्डोम चढ़ाकर उसकी चूत में डाला तो लम्बी सी आहह.. भरते हुए हनी बोली- जीजू … आह्ह आपने तो दिन में तारे दिखा दिये.
मैंने कहा- अब मुझे भी जन्नत का आनन्द लेने दो और मैंने धकाधक अपनी साली की चूत को पेलना शुरू किया.

फच-फच की आवाज के साथ साली की पानी छोड़ रही चूत की चुदाई में मैं इतना खो गया कि क्या बताऊं. मैं बस धक्के पर धक्के लगाये जा रहा था.

डिस्चार्ज होने से पहले लण्ड फूलकर इतना टाइट हो गया कि अन्दर बाहर करना मुश्किल हो रहा था लेकिन मैं रुका नहीं बस पेलता रहा. अगली पांच मिनटों तक मैंने उसकी चूत को जबरदस्त तरीके से रगड़ दिया.

अब मुझसे रहा न गया और मेरे लंड पर मेरा कंट्रोल खो गया. मेरे लण्ड से एक फव्वारा छूटा जिसने मुझे जन्नत का दीदार करा दिया. मेरे लंड से वीर्य निकल कर कॉन्डम में भर गया.

फिर हाँफते हुए मैं हनी के ऊपर ही ढेर हो गया. वो भी जोर जोर से सांसें लेते हुए मुझे अपनी चूचियों में शरण देने लगी. मैंने कई मिनट तक अपनी धड़कनें सामान्य होने का इंतजार किया और उसके बाद फिर से साली के जिस्म के साथ खेलना शुरू कर दिया.

तभी उसने याद दिलाया कि आपको ऑफिस के लिए देर हो रही है. अब तो मैं ऑफिस और काम को भूल जाना चाहता था. मैं जल्दी से तैयार होकर ऑफिस गया और पांच दिन की छुट्टी लेकर आ गया.

साली की चूत चुदाई का सुनहरा मौका मिला जिसका मैंने जमकर मजा लिया. पांच दिनों मैंने उसकी चूत कम से कम 15 बार तो जरूर चोदी होगी. वो भी मेरे लंड की जैसे दीवानी सी हो गयी थी. अब तो घर आते ही हम दोनों एक दूसरे के जिस्मों से लिपट जाते थे.

इस तरह से साली की चूत चोदकर मैंने अपनी ख्वाहिश पूरी की और मुझे उसकी चूत चोदने में जैसे जन्नत का मजा मिला. बहुत दिनों के बाद काम का ऐसा सुख प्राप्त हुआ था.

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