स्कूल में मैम की दनादन चुदाई

उन्हें काफी दर्द हुआ और उनकी आंखों से आंसू बहने लगे. अब वो मुझसे कहने लगी कि आराम से करो बहुत दर्द हो रहा है. फिर मैंने धीरे – धीरे कर के पूरा लंड उनकी चूत में उतार दिया. अब उन्हें भी थोड़ा ठीक लगने लगा था…

अन्तर्वासना के सभी पाठकों को कैलाश का प्यार भरा नमस्कार! दोस्तों, मैं 22 साल का हट्टा – कट्टा एक नौजवान हूँ. मैं दिखने में भी काफी अच्छा हूँ और मैं अन्तर्वासना की कहानियों का नियमित पाठक हूँ.

यहाँ पर बहुत सारी कहानियाँ सच्ची तो कई कहानियाँ झूठी भी होती हैं पर इन्हें पढ़ने में बहुत मजा आता है. उन सभी रसीली कहानियों को पढ़ कर मैंने सोचा कि क्यों न मैं भी अपनी आपबीती अन्तर्वासना के पाठकों के सामने रखूं. तो अब आप सभी अपने लंड और चूत को संभाल कर रखिएगा, क्योंकि मैं जो कहानी सुनाने जेआ रहा हूँ, वो कोई कहानी नहीं है बल्कि मेरी ज़िन्दगी की हकीकत है.

बात उन दिनों की है, जब मैं 21 साल का था. यानी कि आज से लगभग 1 साल पहले की घटना है. फिर मैंने अपना दाखिला अपनी ही सिटी के एक कॉलेज में करा लिया था. फिर मैं रोज कॉलेज जाने लगा था.

कॉलेज में मैंने जिस कोर्स के लिए दाखिला किया था, वो उस साल नया – नया शुरू हुआ था तो मेरी क्लास में बहुत ही कम स्टूडेंट थे. हमें पढ़ाने के किए एक मैम आती थीं. जिनकी उम्र यही कोई 24-25 की रही होगी.

उनका फिगर तो कमाल का ही था. उनका फिगर यही कोई 32-28-34 का रहा होगा. चूंकि मैं हमेशा आगे की बेंच पर बैठा करता था तो जब मैम हमें पढ़ाने आतीं तो वो किताब मेरे सामने वाली बेंच पर रखती थीं. फिर पढ़ाने के लिए जब वो किताब में देखतीं तो मुझे उनके स्तनों के दर्शन बड़े ही अच्छे तरीके से हो जाते थे.

इस तरह मैं रोज ही उनके स्तनों को देखता रहता और अपने लन्ड़ पर हाथ फेरता रहता था. ऐसा करते हुए मुझे मैम ने 3-4 बार देख लिया था. इसके बाद से उनके चेहरे पर मेरे लिए जो कातिल मुस्कान दिखती दोस्तों, उसका तो आप अंदाज़ा भी नहीं लगा सकते हैं.

एक दिन की बात है. उस दिन मैं क्लास में देरी से पहुंचा था. देर से पहुंचने की वजह से उस दिन मैम ने मुझे बहुत डाटा और नाराज होते हुए बोली कि क्लास के बाद मेरे केबिन में आकर मुझसे मिलो. क्लास खत्म होने बाद मैं डरता हुआ उनके केबिन में गया.

जब मैं वहां पहुंचा तो मैम ने मुझसे कहा कि देर करके के लिए तुम्हें सज़ा तो मिलनी ही चाहिए और मिलेगी भी. तो मैं डरते हुए बोला, “ठीक है मैम, आप जो सज़ा देना चाहो दे सकती हो”.

मेरे मुंह से इतना निकला ही था कि अचानक से उन्होंने मुझे पीछे टेबल पर धकेल दिया और मेरे सिर के बाल पकड़ कर मुझे किस करना चालू कर दिया. मैं तुरन्त ही उनके मनोभावों को ताड़ गया. फिर क्या था, मैं भी चालू हो गया.

अब किस करते हुए मैंने उनके 32 की साइज के स्तानों को धीरे – धीरे दबाना चालू कर दिया. उनकी तरफ से कोई विरोध नहीं हो रहा था और यह सब मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. फिर मैं एक हाथ से एक दूध को दबाता और मसलता रहा था तो मेरा दूसरा हाथ धीरे – धीरे उनकी चूत तक पहुंच गया. दूसरे हाथ से मैं उनकी साड़ी के ऊपर से ही उनकी चूत को सहला रहा था.

मेरे ऐसा करने से अब वो बहुत गर्म हो चुकी थीं. अब उसने पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड को पकड़ लिया और सहलाने लगी. मुझे हाथों का स्पर्श पाकर मेरा लन्ड अपनी पूरी औकात पर आकर 7 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा हो चुका था. उसका ऐसे सहलाना मुझे बहुत ही अच्छा लगा रहा था.

उसके सहलाने से मेरी उत्तेजना एक दम बढ़ गई. फिर क्या था! अब थोड़ी ही देर में मैंने उसकी साड़ी खींच कर उसे आधा नंगा कर दिया. पेटीकोट और ब्लाउज में वो बहुत हसीन लग रही थी. फिर मैंने उसकी ब्रा और पैंटी के साथ उन्हें भी निकाल दिया. अब वह मेरे सामने पूरी नंगी थी.

फिर मैंने उन्हें सामने वाली टेबल पर लेटा दिया. जिससे उनकी शेव की गई बिना बालों वाली चूत मेरे सामने आ गई. यह देख मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ तो मैं उनकी बिना बालों वाली चूत को चाटने लगा. मैं इतना अंदर तक चाट रहा था कि वो मदमस्त हो गईं थीं और जोर – जोर से सिसकियां लेने लगी थीं. करीब 5 मिनट की चुसाई के बाद वो मेरे मुंह में ही झड़ गईं और मैं उनकी चूत से निकला सारा चूत रस पी गया.

फिर मैं खड़ा हुआ ओर उनको नीचे कर के मेरे 7 इंच लम्बे और 3 इंच मोटे लंड को उनके मुंह में दे दिया. वो उसे ऐसे चूस रही थी के पेशेवर रंडी हो. इसमें मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. फिर थोड़ी देर बाद मैंने उनके मुंह से अपना लन्ड बाहर निकाला और उन्हें फिर से टेबल पर लिटा कर थोड़ा सा थूक उनकी चूत पर लगा दिया और फिर लन्ड को सेट करके धक्का लगाया तो मेरा लंड आधा उनके चूत में उतर गया.

उन्हें काफी दर्द हुआ और उनकी आंखों से आंसू बहने लगे. अब वो मुझसे कहने लगी कि आराम से करो बहुत दर्द हो रहा है. फिर मैंने धीरे – धीरे कर के पूरा लंड उनकी चूत में उतार दिया. अब उन्हें भी थोड़ा ठीक लगने लगा था.

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