साइंस टीचर बनी मेरी सेक्स टीचर

मैडम बोलीं, “मोहित, रिप्रोडक्टिव पार्ट्स मतलब कि सेक्ज़ुअल ऑर्गन. मैं तुम्हें आम ज़ुबान में सारी चीजें बेहद आसान करके समझाती हूँ. देखो, जिस्म के निचले हिस्से में तुम्हारा रिप्रोडक्टिव पार्ट है और मेरे जिस्म के निचले हिस्से में मेरा रिप्रोडक्टिव पार्ट. लड़कों के रिप्रोडक्टिव पार्ट को आम ज़ुबान में लंड कहते हैं और लड़कियों के पार्ट को चूत कहते हैं. अब एक काम करो तुम खड़े हो जाओ, मैं तुम्हें दिखाती हूँ”…

अन्तर्वासना के सभी पाठक और पाठिकाओं को मेरा नमस्कार! मेरा नाम मोहित है और ये कहानी नब्बे के दशक के शुरुआत की है. मेरे घर में मैं और मेरे पापा ही थे क्योंकि जब मैं चार साल का था तभी मेरी मम्मी का स्वर्गवास हो गया था. चूंकि मेरे पापा बिज़नेसमैन थे इसलिए हमारे पास पैसों की कोई कमी नहीं थी और पापा मेरी हर इच्छा पूरी करते थे.

उस वक्त मैं 9वीं क्लास में पढ़ता था और मेरी उम्र 19 साल थी. मेरी टीचर रितिका मैडम मेरी स्कूल में हमें साइंस पढ़ाती थी. मैं साइंस में थोड़ा कमज़ोर था. इसलिये पापा ने मैडम से मुझे शाम को मेरे घर पर ही ट्यूशन देने की रिक्वेस्ट की. रितिका मैडम के पति दो साल से कुवैत में नौकरी रहे थे और उनके दोनों बच्चे मसूरी में बोर्डिंग स्कूल में थे. इसलिये घर पर मैडम अकेली ही रहती थी और फिर पापा ने उन्हें फीस भी काफी अच्छी ऑफर की थी तो रितिका मैडम मान गयी और मेरे घर मुझे पढ़ाने के लिए आने लगी.

रितिका मैडम रोजाना काइनेटिक होंडा स्कूटर से शाम को छः बजे मुझे पढ़ाने आती थीं. कई बार जब वो अपनी स्कूटर नहीं लाती थी तो हमारा ड्राइवर रितिका मैडम को कार से भी लेने और छोड़ने जाता था. जिस वक्त रितिका मैडम मुझे पढ़ाने आती थी उस समय घर में बस मैं और हमारा नौकर ही होते थे. पापा तो उस समय ज्यादातर ऑफिस में ही होते थे.

मैडम के आने के बाद हमारा नौकर उनके लिये जूस वगैरह रख जाता था और फिर वो मेरे स्टडी रूम में मुझे पढ़ाती थीं. स्कूल में रितिका मैडम काफी स्ट्रिक्ट थीं लेकिन घर पर वो काफी फ्रेंडली तरीके से मुझे पढ़ाती थीं और हंसी-मज़ाक भी कर लेती थीं. और तो और कभी – कभी मेरे गाल भी खींच देतीं तो कभी गले से लगा लेतीं थीं और कभी मेरे जिस्म पर कहीं ना कहीं प्यार से हाथ फिरा देतीं.

उनका ये सब करना मुझे सामान्य स्नेह ही लगता था जबकि असलियत में उनके मन में कुछ और ही था. उम्र के हिसाब से उन दिनों मुझको भी विपरीत सेक्स, खासकर अपनी हम उम्र लड़कियों के प्रति मन में आकर्षण ज़रूर होता था और जिज्ञासा भी थी. लेकिन उस समय तक मुझे चुदाई के बारे में बिलकुल जानकारी नहीं थी. वैसे तो फिल्मों में कोई उत्तेजक दृश्य देख कर मेरा लंड कभी – कभार अपने आप सख्त हो जाता था लेकिन तब तक मैंने मुठ मारना भी शुरू नहीं किया था.

रितिका मैडम की उम्र पैंतीस साल के करीब थी और वह बेहद खूबसूरत और सेक्सी महिला थीं। बड़ी – बड़ी आँखें, तीखे नैन – नक्श, सुडौल बदन, कुल मिलाकर वह बिलकुल किसी सुपर मॉडल की तरह लगती थीं.

वो अपने अपियरन्स का भी काफी ध्यान रखती थीं. वह हमेशा नये फैशन के सलवार – सूट और ऊँची हील के सैंडल पहनती थीं और चेहरे पर हल्का मेक-अप करके टिपटॉप रहती थीं. लेकिन मेरे मन में कभी भी रितिका मैडम के बारे में कोई गलत विचार नहीं आया था.

एक बार पापा को तीन दिनों के लिए ऑफिस टूर पर जाना पड़ा. मेरे लिए ये कोई नयी बात नहीं थी. पापा जब भी टूर पर जाते थे तो हमारा नौकर मेरा पूरा ख्याल रखता था. लेकिन इस बार हमारे नौकर को एक रात के लिये अपने भाई की शादी में भी जाना था. यह बात रितिका मैडम को पता चली तो उन्होंने पापा से कहा कि एक रात के लिये वो हमारे घर रुक जायेंगी. वैसे भी अगले दिन शनिवार था और हमारे स्कूल की छुट्टी थी.

मैडम की बात सुन कर पापा निश्चिंत होकर उस दिन दोपहर की फ्लाइट से चले गये. हमारे नौकर को भी रात आठ बजे के करीब निकलना था तो उसने डिनर वगैरह तैयार कर दिया और रितिका मैडम के लिये गेस्ट रूम भी तैयार कर दिया. उस दिन रितिका मैडम ने मुझे स्कूल में बता दिया था कि आज वो छः बजे के बजाय सात बजे तक आयेंगी क्योंकि उन्हें किसी पार्टी में जाना था.

शाम को करीब साढ़े सात बजे रितिका मैडम एक छोटे से बैग में अपने कपड़े वगैरह लेकर आ गयीं. रितिका मैडम आज कुछ ज्यादा ही अच्छे से तैयार होकर आईं थीं.आज उन्होंने अपनी आँखों पर आइ-शेडो और मस्खरा भी लगाया हुआ था और काफी अच्छा मेक-अप किया हुआ था. साथ ही उन्होंने पार्टी के हिसाब से बेबी-पिंक कलर का सलवार-सूट पहना था, जिसकी कमीज़ पर मोतियों और क्रिस्टल के साथ रेशमी धागे की सुंदर कढ़ाई की हुई थी और उनके पैरों में काले रंग के काफी ऊँची पेन्सिल हील के सैंडल थे. चूंकि हमारे नौकर को अपने भाई की शादी में जाना था इसलिये रितिका मैडम के आते ही उसने डिनर लगा दिया.

तब रितिका मैडम मुझसे बोली, “मोहित तुम खाना खा लो. मैं तो पार्टी में खा कर ही सीधे आ रही हूँ.”

अब मैं डिनर करने लगा और रितिका मैडम भी डॉयनिंग टेबल पर मेरे सामने वाली कुर्सी पर बैठ गयीं. तभी नौकर उनके लिये संतरे का जूस ले कर आया तो उन्होंने नौकर को भी उसी वक्त जाने को बोल दिया ताकि उसे देर ना हो. उनकी अनुमति मिलने के बाद वो अगले दिन दोपहर तक लौटने का आश्वासन देकर चला गया.

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